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इस अस्‍पताल में कोरोना मरीजों की हो रही TikTok थेरेपी, डॉक्‍टर ही देते हैं चैलेंज

मरीजों को दी जा रही टिकटॉक थेरेपी.

मरीजों को दी जा रही टिकटॉक थेरेपी.

मिजोरम (Mizoram ) के लॉन्गतलाई जिले में स्थित एक कोविड केयर सेंटर (Covid Care Centre) में टिकटॉक थेरेपी (Tiktok Therapy) का इस्‍तेमाल डॉक्‍टर कोरोना मरीजों को उत्‍साहित रखने के लिए कर रहे हैं.

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    नई दिल्‍ली. देश-विदेश में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) तेजी से फैला हुआ है. अधिकांश देश इससे जूझ रहे हैं. वहीं दुनियाभर में इसके इलाज के लिए प्रभावी दवा और वैक्‍सीन विकसित करने पर काम चल रहा है. इन सबके इतर कुछ ऐसे भी तरीके अपनाए जा रहे हैं, जो कोरोना वायरस (Covid-19) से संक्रमित लोगों के अंदर उत्‍साह और आत्‍मविश्‍वास को बढ़ावा देकर उन्‍हें कोरोना से लड़ने की शक्ति दे रहे हैं. ऐसा ही ऐसा ही एक तरीका मिजोरम (Mizoram) के एक कोविड केयर सेंटर (Covid Care Centre) में अपनाया जा रहा है. इसका नाम है टिकटॉक थेरेपी (TikTok Therapy).

    जैसा कि नाम से ही जाहिर है कि टिकटॉक (TikTok) थेरेपी मतलब वीडियो की मदद से मरीजों का आत्‍मविश्‍वास बढ़ाया जा रहा है. इंडियन एक्‍सप्रेस में प्रकाशित खबर के मुताबिक लॉन्गतलाई जिले में स्थित एक कोविड केयर सेंटर में टिकटॉक थेरेपी का इस्‍तेमाल डॉक्‍टर मरीजों को उत्‍साहित रखने के लिए कर रहे हैं. इसमें डॉक्‍टर और कोरोना के गैर लक्षणी मरीज एक दूसरे को डांस चैलेंज या कहें कि टिकटॉक चैलेंज देते हैं. टिकटॉक (TikTok) पर भले की बैन लगाने की मांग समय-समय पर उठती रहती हों. लेकिन इसके जरिये यहां मरीजों के अंदर उत्‍साह बनाए रखने की कवायद हो रही है. इसे लेकर मरीज भी खुश हैं.

    कोविड केयर सेंटर में भर्ती 18 साल के मरीज ने कहा, 'जब मैंने अपने फोन पर पहली बार डॉक्‍टरों के नाचने का वीडियो देखा तो मैं समझ गया था कि यह उनके लिए नहीं है. लेकिन हमने चैलेंज मंजूर किया.' वहीं कोविड केयर सेंटर की 31 साल की मेडिकल ऑफिसर डॉ. एल्‍साडई लालबरसायमा ने कहा कि शायद इन सबके आखिर में मैं भी अच्‍छी डांसर बन जाऊं.

    मिजोरम के लॉन्गतलाई जिले की पश्चिम सीमा बांग्‍लादेश और दक्षिण सीमा म्‍यांमार से जुड़ी है. जिले में दो हफ्ते पहले कोरोना वायरस संक्रमण का पहला मामला सामने आया था. डॉ. एल्‍साडई लालबरसायमा ने उस समय एक वाट्सएप ग्रुप बनाया था. यह डॉक्‍टर, नर्स और मरीजों के लिए था. इसके जरिये सबके बीच में सूचना का प्रसार किया जाता है. जैसे दवा लेने का टाइम और एक्‍सरसाइज करने के लिए बताया जाता है. उनके अनुसार यहां भर्ती सभी 8 गैर लक्षणी मरीज दिल्‍ली से लौटे थे.

    धीरे-धीरे इस वाट्सएप ग्रुप में मेडिकल जानकारी के अलावा फनी स्‍टीकर और बाद में टिकटॉक वीडियो भी डाले जाने लगे. डॉ. के अनुसार, 'हम डॉक्‍टर्स ने तय किया था कि हम सभी टिकटॉक के जरिये अपने डांस वीडियो बनाएंगे और उसे ग्रुप में डालकर मरीजों से भी इस ऐसा करने को कहेंगे. बिलकुल टिकटॉक चैलेंज की तरह.'

    सेंटर में भर्ती 18 साल के एक मरीज ने बताया कि वे ऑन स्‍पॉट डांस मूव्‍ज सोचते हैं. फिर उन्‍हें रिकॉर्ड करके उसे ग्रुप पर डालते हैं. वहीं लॉन्गतलाई जिला अस्‍पताल के सुप्रिंटेंडेंट डॉ. जोथनपारी ने बताया कि जिला अस्‍पताल ही इस समय कोविड केयर सेंटर के रूप में चल रहा है. यहां सिर्फ एक ही 11 साल का बच्‍चा है. अन्‍य सभी मरीज 18 से 30 साल की उम्र के बीच हैं. वे सभी युवा हैं और एनर्जेटिक हैं. हमारा मानना है कि ये थेरेपी उन्‍हें आपस में जोड़े रखने के लिए बेहतर तरीका है. उनके अनुसार यह तभी संभव हो पाया है क्‍योंकि यहां मरीजों की संख्‍या कम है और उनमें से कोई गंभीर नहीं है.

    डॉ. एल्‍साडई लालबरसायमा और उनकी टीम को जब भी समय मिलता है, वो अपना वीडियो रिकॉर्ड करती है. उनका कहना है कि मरीजों के साथ ही हम डॉक्‍टरों को भी तनाव से दूर रहने और मानसिक तौर पर सपोर्ट देने के लिए यह बेहतर तरीका है.

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