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SC ने सुनवाई के दौरान जम्मू-कश्मीर के लोगों से अपील की- यह भविष्य के लिए राहें बनाने का समय

आदेश में यह भी कहा कि सरकार को केंद्र शासित प्रदेश में "पूर्ण सामान्य स्थिति" लाने के लिए सभी प्रयास करने चाहिए (फाइल फोटो)

आदेश में यह भी कहा कि सरकार को केंद्र शासित प्रदेश में "पूर्ण सामान्य स्थिति" लाने के लिए सभी प्रयास करने चाहिए (फाइल फोटो)

अदालत ने अपने आदेश (order) में दर्ज किया, "यह भविष्य के लिए राहें बनाने का समय है. भविष्य की तलाश करें... अतीत में न रहें, आगे देखें." आदेश में यह भी कहा कि सरकार (government) को केंद्र शासित प्रदेश (union territory) में "पूर्ण सामान्य स्थिति" लाने के लिए सभी प्रयास करने चाहिए.

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नई दिल्ली. जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) के लोगों से अपील करते हुए, सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को कहा, "यह भविष्य के लिए राहें बनाने का समय है." न्यायमूर्ति (Justice) संजय के कौल की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के निवासियों (J&K residents) को भविष्य की तलाश करनी चाहिए और अतीत (past) में नहीं जीते रहना चाहिए.

अदालत ने अपने आदेश (order) में दर्ज किया, "यह भविष्य के लिए राहें बनाने का समय है. भविष्य की तलाश करें... अतीत में न रहें, आगे देखें." आदेश में यह भी कहा कि सरकार (government) को केंद्र शासित प्रदेश (union territory) में "पूर्ण सामान्य स्थिति" लाने के लिए सभी प्रयास करने चाहिए. न्यायमूर्ति कौल, जो स्वयं जम्मू-कश्मीर (Jammu-Kashmir) से संबंध रखते हैं, ने कश्मीर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मियां अब्दुल कयूम (Kashmir Bar Association President Mian Abdul Qayoom) को नजरबंद करने से संबंधित मामले की अनुमति देते हुए यह अपील करने की.

रिहा किया जायेगा लेकिन 7 अगस्त तक नहीं जायेंगे कश्मीर
अगस्त 2019 में क़यूम को सार्वजनिक सुरक्षा अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया था, और उच्च न्यायालय ने उनकी "अलगाववादी विचारधारा" के चलते उनकी हिरासत को बरकरार रखा था. बुधवार को कार्यवाही के दौरान, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कयूम की नजरबंदी को आगे नहीं बढ़ाने पर सहमति जताई, और कहा कि उसे तुरंत रिहा कर दिया जाएगा.

कानून अधिकारी ने अदालत के इस सुझाव को मान लिया कि कयूम दिल्ली में रहेंगे और 7 अगस्त तक कश्मीर नहीं जायेंगे, क्योंकि 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के एक साल पूरे होने वाले हैं. कयूम का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे ने भी इस शर्त को स्वीकार कर लिया कि उनके मुवक्किल भी धारा 370 पर कोई विवादास्पद बयान जारी नहीं करेंगे.

दुष्यंत दवे ने जताई कश्मीर जाने की इच्छा
पीठ ने इसके बाद बिना किसी प्रतिकूल स्थिति के इसे हल किया जा सकने के लिए मेहता और दवे दोनों की सराहना की. कोर्ट ने क़यूम से "भविष्य में और अधिक रचनात्मक दृष्टिकोण" अपनाने का आग्रह करने के अलावा, लोगों और सरकार के लिए सलाह की चंद बातें शामिल करना सही समझा.

इस बीच, दवे ने कहा कि अगर सुरक्षित रहे तो वह कश्मीर का दौरा करना चाहते हैं और इसकी सुंदरता की तुलना स्विट्जरलैंड से की जा सकती है. न्यायमूर्ति कौल ने जवाब दिया: "हां, आपको जाना चाहिए. केवल कुछ छोटी-छोटी जगहें हैं, जहां परेशानी है. अन्यथा वहां सब बहुत अच्छा है."

जस्टिस कौल ने भारत में पर्यटन और महामारी पर भी की बात
फिर न्यायाधीश ने कहा कि भारत में पर्यटन की बहुत संभावना है और सरकार को इस क्षमता का फायदा उठाना चाहिए. उन्होंने कहा, "केवल तमिलनाडु में केवल 37,000 मंदिर हैं और वे सभी अद्भुत हैं. मेरा मानना ​​है कि इस देश में महान पर्यटन स्थल हैं और उन्हें बढ़ावा दिया जाना चाहिए."

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जस्टिस कौल ने महामारी के कारण मौजूदा स्थितियों का हवाला देते हुए आगे कहा, "हम जानते हैं कि हम जो कह रहे हैं वह अभी अजीब लग रहा है लेकिन उसकी इच्छा, यह समय जाएगा और सबकुछ ठीक हो जाएगा."

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