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तिनका तिनका इंडिया अवॉर्ड्स- 2020 : मानवाधिकार दिवस पर जेलों को सम्मान

तिनका तिनका पुरस्कारों का यह छठा साल है. प्रतीकात्मक फोटो
तिनका तिनका पुरस्कारों का यह छठा साल है. प्रतीकात्मक फोटो

तिनका-तिनका फाउंडेशन (Tinka Tinka Foundation) की ओर से 2020 में 17 बंदी और जेल अधिकारी को पुरस्कृत किया जाएगा. साथ ही एक विशेष पुरस्कार मरणोपरांत भी प्रदान किया जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 8, 2020, 7:23 PM IST
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नई दिल्ली. देश में हर वर्ष मानवाधिकार दिवस पर बंदियों और जेलकर्मियों को सम्मानित करने वाली संस्था तिनका तिनका फाउंडेशन (Tinka Tinka Foundation) 9 दिसंबर को पुरस्कारों की घोषणा करेगी. इस वर्ष अवॉर्ड्स की थीम 'कोरोना के दौर में जेल' है. महामारी के दौर में भी इस वर्ष हर श्रेणी में भारी मात्रा में नामांकन आए. इस वर्ष आए करीब 300 नामांकन में 33 महिलाएं भी शामिल थीं. इस वर्ष नतीजे काफी दिलचस्प रहे हैं. इस साल तीन श्रेणियां रहीं- पेंटिंग, विशेष प्रतिभा और जेल प्रशासकों के लिए पुरस्कार.

विजेता बंदियों और जेल अधिकारियों के नामों की घोषणा मानवाधिकार दिवस की पूर्व संध्या यानी 9 दिसंबर को की जाएगी. इन पुरस्कारों को के. सेल्वाराज, आईपीएस, महानिदेशक, हरियाणा कारागार और अजय कश्यप, आईपीएस, पूर्व महानिदेशक दिल्ली जेल रिलीज करेंगे. इस साल निर्णायक मंडल में अजय कश्यप (आईपीएस), पूर्व महानिदेशक दिल्ली जेल, ओ.पी. सिंह (आईपीएस) पूर्व महानिदेशक, उत्तर प्रदेश पुलिस और डॉ. वर्तिका नन्दा, संस्थापक, तिनका तिनका फाउंडेशन शामिल रहे.

2019 में निर्णायक मंडल में जावेद अहमद, आईपीएस, महानिदेशक, एनआईसीएफएस और राम फल यादव, आईपीएस, महानिदेशक, नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो शामिल थे. इन्हें जिला जेल, लखनऊ में आनंद कुमार, महानिदेशक, कारागार, उत्तर प्रदेश, सुलखान सिंह, पूर्व पुलिस महानिदेशक, उतर प्रदेश और वर्तिका नन्दा, संस्थापक, तिनका तिनका फाउंडेशन ने दिया था.



वर्तिका नन्दा का कहना है कि तिनका तिनका फाउंडेशन के पुरस्कारों का यह छठा साल है और इनका मकसद जेलों में सृजन करने वाले बंदियों और विशेष काम कर रहे जेल अधिकारियों का सम्मान करना और उन्हें मुख्यधारा में एक पहचान देना है. हर साल यह समारोह देश की किसी जेल में किया जाता है.
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वर्तिका नन्दा भारत की स्थापित जेल सुधारक हैं और तिनका तिनका भारतीय जेलों पर उनकी श्रृंखला है. वो 2014 में भारत के राष्ट्रपति से स्त्री शक्ति पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं. जेलों पर उनके काम को दो बार लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी जगह मिली है.

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तिनका तिनका डासना औऱ तिनका तिनका मध्य प्रदेश- जेलों की जिंदगी का दस्तावेज देती उनकी लिखी किताबें हैं.
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