टीपू सुल्तान जयंती : BJP की धमकी के बाद कर्नाटक के कई शहरों में धारा 144 लागू

धारा 144 लागू होने से एक दिन पहले बीजेपी ने जेडीएस एवं कांग्रेस सरकार से जश्न न मनाने की अपील की थी. साथ ही बेंगलुरु, मैसूर और कोडागु सहित कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी किया गया था.

News18.com
Updated: November 10, 2018, 9:42 AM IST
टीपू सुल्तान जयंती : BJP की धमकी के बाद कर्नाटक के कई शहरों में धारा 144 लागू
धारा 144 लागू होने से एक दिन पहले बीजेपी ने जेडीएस एवं कांग्रेस सरकार से जश्न न मनाने की अपील की थी. साथ ही बेंगलुरु, मैसूर और कोडागु सहित कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी किया गया था.
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Updated: November 10, 2018, 9:42 AM IST
कर्नाटक में टीपू सुल्तान की जयंती मनाने को लेकर हंगामा जारी है. कर्नाटक सरकार 2016 से टीपू सुल्तान की जयंती मना रही है. जबकि बीजेपी ने इस कार्यक्रम को बाधित करने की धमकी दी है, जिसके बाद हुबली, धारवाड़ और शिवमोग्गा सहित कर्नाटक के कई शहरों में धारा-144 लागू कर दी गई है. इस बार जयंती पर कई कार्यक्रम आयोजित करने की योजना है. हर साल की तरह इस साल भी टीपू जयंती पर राजनीति गरमा गई है.

धारा 144 लागू होने से एक दिन पहले बीजेपी ने जेडीएस एवं कांग्रेस सरकार से जश्न न मनाने की अपील की थी. साथ ही बेंगलुरु, मैसूर और कोडागु सहित कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी किया गया था. 10 और 11 नवंबर को सुबह 6 बजे और 7 बजे से इन दोनों शहरों में कर्फ्यू लगा दिया जाएगा. इस दौरान एक ही जगह पर 4 से ज्यादा लोग इकट्ठा नहीं हो सकते.

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इस मामले पर गठबंधन की सरकार के मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने कहा कि पिछली कांग्रेस सरकार की नीति को जारी रखने के लिए 10 नवंबर को टीपू सुल्तान की जयंती मनाया जाएगा. उनके इस बयान के बाद बीजेपी ने कार्यक्रम के विरोध करने की घोषणा की है. हालांकि अभी यह तय नहीं है कि कुमारस्वामी मुख्य समारोह में शामिल होंगे या नहीं या स्वामी कौन से कार्यक्रम का उद्घाटन करेंगे.

हालांकि डॉक्टरों की सलाह के आधार पर मुख्यमंत्री कार्यालय से कहा गया है कि वह किसी भी आधिकारिक समारोह में शामिल नहीं हो पाएंगे. गौड़ा परिवार के सूत्रों ने न्यूज18 को बताया कि उनका परिवार टीपू सुल्तान की जयंती मनाने को अपनी बुरी किस्मत मानता है. क्योंकि कई लोग टीपू सुल्तान को 'तानाशाह शासक' मानते हैं.

इस कार्यक्रम का वैन्यू पहले विधाना सौधा रखा गया था. होम पोर्टफोलियो जारी करते हुए 5 नवंबर को कहा गया था कि सुरक्षा कारणों से पुलिस विभाग की सलाह पर कार्यक्रम का स्थान रविंद्र कलाक्षेत्र स्थानांतरिक किया गया है. इसके साथ ही सरकार की ओर से कहा गया कि अगर कार्यक्रम के वक्त दंगा या शांति भंग करने की कोशिश की जाएगी तो आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. इसके साथ ही कहा गया है कि सोशल मीडिया के माध्यम से भी निगरानी की जाएगी और अपमानजनक जैसे पोस्टों पर भी कार्रवाई की जाएगी.

सिद्धारमैया की अगुवाई वाली पिछली कांग्रेस सरकार ने बीजेपी और कई हिंदू संगठनों के कड़े विरोध के बावजूद 2016 से हर साल 10 नवंबर को टीपू सुल्तान की जयंती मना रही है. पिछले दो वर्षों से इन समारोहों की हिंसक झड़पों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है.
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पूर्व उपमुख्यमंत्री आर अशोक, बीवाई राघवेंद्र और एमएलसी रवि कुमार समेत कई भाजपा नेताओं ने शुक्रवार को विरोध आंदोलन में हिस्सा लिया और आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने मुसलमानों को खुश करने के लिए हिंदुओं की भावनाओं को चोट पहुंचाने का काम किया है. उन्होंने कहा कि टीपू पर मौसूर के पास मेलुकोटे के कोडाणु और मंड्याम इयंगार में हजारों लोगों की हत्या का आरोप था. वह एक धार्मिक कट्टरपंथी था.

भाजपा सांसद प्रताप सिन्हा ने दावा किया कि जिन लोगों ने उसे उदार बनाने की कोशिश की, उन्हें भारी नुकसान उठाना पड़ेगा. बीजेपी के प्रवक्ता एस प्रकाश ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया है कि कुमारस्वामी टीपू की जयंती के कार्यक्रम में भाग लेने से परहेज कर रहे हैं. उन्होंने दावा किया था कि टीपू कन्नड़ भाषा और हिंदू विरोधी था और फारसी को बढ़ावा देता था.
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