बंगाल की खाड़ी में उठा 'तितली' तूफ़ान, ओडिशा और आंध्र प्रदेश में मचाएगा तबाही!

तूफ़ान से निपटने और उससे होने वाले असर को लेकर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने हाई लेवल मीटिंग की. जिसमें अलग अलग डिपार्टमेंट के बड़े अधिकारियों ने हिस्सा लिया.

News18Hindi
Updated: October 10, 2018, 11:19 PM IST
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Updated: October 10, 2018, 11:19 PM IST
एक बार फिर बंगाल की खाड़ी में तेज़ तूफ़ान उठा है. मौसम विभाग के मुताबिक़ 'तितली' नाम का ये तूफ़ान तेज़ी से ओडिशा और आंध्र प्रदेश की तरफ़ बढ़ रहा है, जिसने लोगों को अभी से डराना शुरू कर दिया है. मौसम विभाग का अनुमान है कि ये तूफ़ान अपने साथ भारी बारिश ही नहीं बर्बादी की बाढ़ भी लाएगा.

मौसम विभाग के मुताबिक, ओडिशा के गोपालपुर से आंध्र प्रदेश के कलिंगपटनम के बीच गुरुवार को भारी बारिश की संभावना जताई है. फिलहाल तितली तूफान गोपालपुर से बंगाल की खाड़ी में 370 किलोमीटर की दूरी पर है. यह 10 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तट की ओर बढ़ रहा है. मौसम विभाग का दावा है कि ‘तितली’ तूफ़ान ओडिशा और आन्ध्र प्रदेश के तटीय इलाक़ों से टकराएगा और बाद में पश्चिम बंगाल में भी दस्तक देगा. यही वजह है कि तूफ़ान की आशंका को देखते हुए सभी एजेंसियां अलर्ट पर हैं.

तूफ़ान के ख़तरे को देखते हुए ओडिशा की सरकार भी अलर्ट पर है. तूफ़ान से निपटने और उससे होने वाले असर को लेकर मुख्यमंत्री नवीन पटनायक ने हाई लेवल मीटिंग की. जिसमें अलग अलग डिपार्टमेंट के बड़े अधिकारियों ने हिस्सा लिया. इस बैठक में सीएम ने तितली तूफ़ान से निपटने के लिए ज़रूरी क़दम उठाने के निर्देश दिए, साथ ही ओडिशा के गंजाम, गजपति, पुरी, जगतसिंहपुर, केन्द्रापड़ा, खोरधा, नयागड, कटक, जाजपुर, भद्रक, बालेश्वर, कंधमाल, बौध और ढेंकानाल ज़िलों में स्कूलों को बन्द करने का फ़ैसला लिया गया.

ख़तरे को देखते हुए जिन ज़िलों में अलर्ट जारी किया गया है, वहां 300 से ज़्यादा नाव को तैनात कर दिया गया, साथ ही मछुआरों को भी समंदर से दूर रहने की अपील की गई है. वहीं पश्चिम बंगाल के भी कई हिस्सों में भारी बारिश की आशंका है. जिसे देखते हुए कड़े इंतज़ाम होने का दावा किया गया है.

दावा किया जा रहा है कि जब तितली तूफ़ान ओडिशा और आन्ध्र प्रदेश के तटीय इलाक़ों से टकराएगा तो हवाएं 145 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ़्तार से चल सकती हैं. बता दें, भारतीय समुद्र में उठने वाले तूफ़ानों को नाम देने की प्रक्रिया 2004 में शुरू हुई थी, जिसमें आठ देश शामिल है. अभी जो तूफ़ान ओडिशा और आन्ध्र प्रदेश पर ख़तरा बनकर मंडरा रहा है, उसे 'तितली' नाम पाकिस्तान का दिया हुआ है.
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