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संसदीय एकता पर सहमत TMC लेकिन कांग्रेस से बना रही दूरी, क्या है कारण?

संसदीय एकता पर सहमत TMC लेकिन कांग्रेस से बना रही दूरी, क्या है कारण?

पिछले कुछ हफ्तों में विपक्ष के तौर पर टीएमसी की मजबूत छवि उभर के सामने आई है. (फाइल फोटो)

पिछले कुछ हफ्तों में विपक्ष के तौर पर टीएमसी की मजबूत छवि उभर के सामने आई है. (फाइल फोटो)

Mamata Banerjee,Congress and TMC,Derek O Brien: चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) की सहायता से टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी गोवा और त्रिपुरा में 2023 में होने वाले चुनावों की रणनीति तैयार करने में जुटी हुई हैं. बता दें कि कभी यूपीए की सहयोगी रही तृणमूल बढ़ती डीजल की कीमतों और खुदरा सुधार के मुद्दे को लेकर 2012 में गठबंधन से अलग हो गई थी जिसके बाद सरकार अल्पमत में आ गई थी और 2014 तक सरकार समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी के बाहरी समर्थन पर टिकी हुई थी.

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    नई दिल्ली: पिछले कुछ वक्त में टीएमसी (Trinamool Congress) प्रमुख विपक्षी दल के रूप में उभर कर सामने आई है. पार्टी ने सभी विपक्षी पार्टियों को एकजुट रखने की भी भरसक कोशिश की है. टीएमसी जिस तरह से आगे बढ़ी है उससे यह भी खबर सामने आने लगी है कि पार्टी आने वाले दिनों में कांग्रेस की जगह ले लेगी. इस बीच पार्टी ने आज यह साफ कर दिया है कि सोमवार से शुरू हो रहे संसद के शीतकालीन सत्र (Parliament Winter Session) में वह एकजुट विपक्ष का हिस्सा बनेगी. संसद के बाहj टीएमसी और कांग्रेस (Boundaries Between Congress and TMC) के साथ को लेकर पार्टी के वरिष्ठ नेता डेरेक ओ ब्रायन (Derek O Brien) ने बड़ी बात कही है.

    डेरेक ओ ब्रायन ने कहा कि शीतकालीन सत्र में विपक्ष एकजुट होकर केंद्र से सवाल पूछेगा. उन्होंने कहा कि आम मुद्दे ही विपक्ष को एकजुट करेंगे. कांग्रेस के सवाल पर उन्होंने कहा कि टीएमसी के समीकरण जिस तरह से दूसरे दलों के साथ थे वैसी ट्यून कांग्रेस के साथ नहीं थी. उन्होंने कहा कि, मैं ये बता दूं कि राजद, द्रमुक, सीपीएम और टीएमसी में काफी अंतर है क्योंकि वह सभी दल कांग्रेस के साथ चुनावी सहयोगी हैं.

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    राज्यसभा सांसद ओ ब्रायन ने कहा कि राकांपा-शिवसेना और झामुमो कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार चलाते हैं लेकिन कांग्रेस हमारे साथ चुनावी सहयोगी नहीं है और न ही हम उनके साथ सरकार चला रहे हैं.

    कांग्रेस की बैठक में भाग नहीं लेगी टीएमसी
    अब टीएमसी ने कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा बुलाई गई विपक्षी पार्टियों की बैठक में भी शामिल होने से इनकार कर दिया है. इस बात की जानकारी तृणमूल सांसद सुदीप बनर्जी ने दी. टीएमसी के इस फैसले पर मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि  टीएमसी जनकल्याण के मुद्दे पर हमारे साथ लेकिन पार्टी की खुद अपनी बैठक है इसलिए वह शामिल नहीं हो रहे. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ने तंज कसते हुए कहा कि वह जीत गए.

    बता दें कि कभी यूपीए की सहयोगी रही तृणमूल बढ़ती डीजल की कीमतों और खुदरा सुधार के मुद्दे को लेकर 2012 में गठबंधन से अलग हो गई थी जिसके बाद सरकार अल्पमत में आ गई थी और 2014 तक सरकार समाजवादी पार्टी और मायावती की बहुजन समाज पार्टी के बाहरी समर्थन पर टिकी हुई थी.

    पिछले कुछ हफ्तों में विपक्ष के तौर पर टीएमसी की छवि उभर के सामने आई है. चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर की सहायता से टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी गोवा और त्रिपुरा में 2023 में होने वाले चुनावों की रणनीति तैयार करने में जुटी हुई हैं. पिछले कुछ महीनों में टीएमसी ने कई विपक्षी दलों के नेताओं को अपने में शामिल करके यह दिखा दिया है कि आने वाले दिनों में राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई जोरदार होने वाली है.

    जहां कांग्रेस चुप बैठी है वहीं दूसरी तरफ टीएमसी तेजी से चुनावी रणनीति बना रही है. पिछले सप्ताह के दौरान, उन्होंने कांग्रेस और नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड के प्रमुख नेताओं को शामिल करने के साथ हरियाणा और पड़ोसी बिहार में भी पैर जमा लिया.

    Tags: Congress, Mamata banerjee, West bengal news

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