राज्यसभा में पेगासस पर केंद्रीय मंत्री के बयान के दौरान TMC ने कागज फाड़कर उछाले

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव सदन में पेगासस पर बयान दे रहे थे.

टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने अश्विनी वैष्णव के पेगासस प्रोजेक्ट को लेकर दिए जा रहे बयान के बीच उनसे प्रतियां छीन लीं जिसके बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और टीएमसी सांसद के बीच बहस भी हो गई.

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    नई दिल्ली. राज्यसभा (Rajyasabha) में इजरायली कंपनी पेगासस स्पाइवेयर (Pegasus Spyware) का उपयोग करके कथित जासूसी पर केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव (Ashwini Vaishnav) के बयान देते समय विपक्षी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने संसद में कागज फाड़े और उन्हें हवा में उछाल दिया. इस मुद्दे पर बयान देने के लिए वैष्णव को बुलाए जाने पर टीएमसी और विपक्षी दल के अन्य सदस्य सदन के वेल में पहुंच गए. उन्होंने नारेबाजी की और कागजात फाड़ दिए. बताया जा रहा है कि ये कागज उस बयान की प्रतियां थीं जो मंत्री को देना था. कागज हवा में उछाले जाने के कारण मंत्री अपना वक्तव्य पूरा नहीं कर सके और उन्होंने इसकी एक प्रति सदन के पटल पर रख दी.

    उपसभापति हरिवंश ने सदन की कार्यवाही को शेष दिन के लिए स्थगित करने से पहले सदस्यों को असंसदीय व्यवहार न करने के निर्देश दिए. विपक्षी सांसदों ने दिन के पहले भाग में भी कार्यवाही को रोक दिया था. आज भी उन्होंने स्थगन को मजबूर कर दिया था, यहां तक ​​कि आधिकारिक तौर पर सूचीबद्ध कागजात भी नहीं रखे गए थे. इस दौरान टीएमसी सांसद शांतनु सेन ने अश्विनी वैष्णव के पेगासस प्रोजेक्ट को लेकर दिए जा रहे बयान के बीच उनसे प्रतियां छीन लीं जिसके बाद केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और टीएमसी सांसद के बीच बहस भी हो गई.



    मार्शलों को करना पड़ा हस्तक्षेप
    सदन के स्थगन के बाद, सांसद शांतनु सेन द्वारा मंत्री से कागजात छीनने और उसे फाड़ने के बाद, भाजपा सांसदों और टीएमसी सांसदों के बीच एक बहसबाजी शुरू हो गई जिसके बाद स्थिति को नियंत्रण में करने के लिए मार्शलों को हस्तक्षेप करना पड़ा.

    सदन में हुए इस घटनाक्रम के बाद केंद्रीय मंत्री मीनाक्षी लेखी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि- विपक्ष, विशेष रूप से टीएमसी और कांग्रेस के सदस्य इतने नीचे गिर गए कि राजनीतिक विरोधी होते हुए भी उन्होंने देश की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाला काम किया.

    लेखी ने कहा कि आज सदन में एक सदस्य ने बयान देने वाले मंत्री से कागजात छीन लिए. उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र में ऐसा व्यवहार कभी नहीं देखा गया. लेखी ने कहा कि हमने पहले भी देखा है कि जब पीएम संसद में नए मंत्रियों को संबोधित कर रहे थे और उनका परिचय दे रहे थे तो वे किस तरह का व्यवहार कर रहे थे.

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