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दक्षिण भारत में पैठ बनाने की कोशिश में टीएमसी, प्रशांत किशाेर ने बनाया ये प्लान

दक्षिण भारत में पैठ बनाने की कोशिश में टीएमसी, प्रशांत किशाेर ने बनाया ये प्लान

प्रशांत किशोर. (फाइल फोटो/News18)

प्रशांत किशोर. (फाइल फोटो/News18)

राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर अब दक्षिण भारत में हैं. ऐसा बताया गया है कि वो कर्नाटक कांग्रेस के टॉप लिंगायत नेता से संपर्क करने के लिए यहां आए थे लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो पाई. गोवा, उत्‍तर प्रदेश और मेघालय में चुनाव अभियानों की रूपरेखा तैयार करने के बाद वो दक्षिण भारत में उन नेताओं से मिलने की कोशिश में हैं जो तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल हो सकते हैं. इसके लिए उन्‍होंने सबसे पहले कांग्रेस नेताओं से मिलना तय किया है. प्रशांत किशोर के पास उन नेताओं की एक सूची है जिनसे वह मिलेंगे और गुरुवार को वो इसी प्रयास में बेंगलुरु में थे. उन्‍होंने बड़े कांग्रेस नेता से मिलने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके. हालांकि उन्‍होंने कुछ अन्‍य नेताओं और कुछ मौजूदा सांसदों से मुलाकात की. सूत्रों ने बताया कि आने वाले दिनों में उनके अन्‍य नेताओं से संपर्क करने की संभावना है.

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    शरत शर्मा कालागारू

    बेंगलुरु. राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishor) अब दक्षिण भारत में हैं. ऐसा बताया गया है कि वो कर्नाटक कांग्रेस (Karnataka congress) के टॉप लिंगायत नेता से संपर्क करने के लिए यहां आए लेकिन उनकी मुलाकात नहीं हो पाई. गोवा, उत्‍तर प्रदेश और मेघालय में चुनाव अभियानों की रूपरेखा तैयार करने के बाद वो दक्षिण भारत में उन नेताओं से मिलने की कोशिश में हैं जो तृणमूल कांग्रेस (TMC) में शामिल हो सकते हैं. इसके लिए उन्‍होंने सबसे पहले कांग्रेस नेताओं से मिलना तय किया है. सूत्रों के अनुसार इंडियन पॉलिटिकल एक्‍शन कमेटी के संस्‍थापक सदस्‍य प्रशांत किशोर कुछ नेताओं को मनाने की कोशिश कर रहे हैं.

    कर्नाटक कांग्रेस के सूत्रों के अनुसार, प्रशांत किशोर के पास उन नेताओं की एक सूची है जिनसे वह मिलेंगे और गुरुवार को वो इसी प्रयास में बेंगलुरु में थे. उन्‍होंने बड़े कांग्रेस नेता से मिलने की कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सके. हालांकि उन्‍होंने कुछ अन्‍य नेताओं और कुछ मौजूदा सांसदों से मुलाकात की. सूत्रों ने बताया कि आने वाले दिनों में उनके अन्‍य नेताओं से संपर्क करने की संभावना है. अपना नाम न छापने की शर्त पर News18 से बात करते हुए कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि किशोर के पास पार्टी के नेताओं की एक सूची थी जिनसे वह मिलना चाहते थे. दरअसल वो यहां नेता एमबी पाटिल से यह पूछने के लिए आए थे कि क्या वह तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) में शामिल होंगे लेकिन पाटिल उनसे नहीं मिले. उन्होंने फोन पर बात की है.

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    लिंगायत नेता एमबी पाटिल से नहीं हो सकती मुलाकात!
    प्रशांत किशोर चाहते हैं कि एमबी पाटिल, कर्नाटक में टीएमसी का नेतृत्व करें. सभी जानते हैं कि एमबी पाटिल को लिंगायत समुदाय का मजबूत समर्थन प्राप्त है. मुझे बताया गया है कि एमबी पाटिल पार्टी के वफादार हैं, उन्होंने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. कांग्रेस में मौजूदा राजनीतिक समीकरण के बारे में बात करते हुए एक अन्य नेता ने भी नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर कहा कि पाटिल, राज्‍य में मौजूदा स्थिति का इस्तेमाल कर सकते हैं. सिद्धारमैया के बाद एमबी पाटिल, डीके शिवकुमार, सतीश जारकीहोली और डॉ. जी परमेश्वर मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार हैं. अगर सिद्धारमैया बाहर जाते हैं तो वह एमबी पाटिल और सतीश जारकीहोली का समर्थन जरूर करेंगे. डीके शिवकुमार को हटाने का लगातार प्रयास किया जा रहा है. सूत्रों ने कहा कि ऐसा भी संभव है कि पाटिल, गोपनीय ढंग से किशोर से मिल सकते हैं और अपने विकल्प खुले रख सकते हैं. बीएस येदियुरप्पा एकमात्र ऐसे व्यक्ति हैं जिनकी लिंगायत समुदाय पर पूरी पकड़ है. लेकिन एमबी पाटिल के पास भी अभी मौका है कि वो समुदाय को अपनी ओर ला सकें. यह तभी संभव है जब उन्हें कांग्रेस में चुनावी स्थिति मिले.

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    कांग्रेस की मुश्किल बढ़ीं, क्‍या करें और क्‍या न करें की स्थिति
    एक राजनीतिक पर्यवेक्षक ने कहा कि येदियुरप्पा के मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद, लिंगायत समुदाय भी दुविधा में था. समुदाय जानता था कि उनका नेता मुख्यमंत्री नहीं बन सकेगा. ऐसे में अगर पाटिल ने अपने पत्ते सही खेले, तो वह सिद्धारमैया और अन्य उत्तर कर्नाटक लिंगायत नेताओं के समर्थन के साथ कम से कम शिवकुमार को हटाने के लिए पार्टी आलाकमान पर दबाव डाल सकते थे. सूत्र ने कहा, ‘अगर एमबी पाटिल की प्रशांत किशोर से बातचीत होती है तो कांग्रेस निश्चित तौर पर उन्हें रोकने की कोशिश करेगी. वह चुनाव से पहले कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष पद की मांग कर सकते हैं. यह पाटिल और कांग्रेस दोनों के लिए फायदे का सौदा है. लेकिन यह डीके शिवकुमार पर बुरा असर डालेगा और पार्टी में ही एक आंतरिक लड़ाई की ओर ले जाएगा.

    विधानसभा चुनाव 2023 में उतरने के मूड में है टीएमसी
    सूत्रों के मुताबिक, प्रशांत किशोर कांग्रेस से कम से कम पांच बड़े नेताओं को लाने और सक्रिय नहीं होने वाले नेताओं की तलाश करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. यह भी कहा जा रहा है कि वह अपनी विचारधारा में तटस्थ नेताओं की सूची बना रहे हैं. परिषद में विपक्ष के नेता एसआर पाटिल और वरिष्ठ नेता प्रताप चंद्र शेट्टी जैसे कांग्रेस के कुछ बड़े नामों को परिषद चुनाव का टिकट नहीं मिला, लेकिन युसूफ शरीफ उर्फ ​​’स्क्रैप बाबू’ जैसे नए सदस्य बिना राजनीतिक पृष्ठभूमि के टिकट पाने में कामयाब रहे. वहीं, कई लोगों के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष शिवकुमार से मतभेद हैं तो कुछ सिद्धारमैया से असहज हैं. सूत्रों के अनुसार, किशोर ऐसे कुछ प्रमुख नेताओं को बोर्ड में लाना चाहते हैं. 2023 के कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान टीएमसी के मैदान में उतरने की संभावना है. बनर्जी और किशोर पहले ही उत्तर, पूर्वोत्तर और पश्चिमी राज्यों में बड़ी संख्या में नेता प्राप्त करने में सफल रहे हैं. पार्टी उत्तर प्रदेश, मेघालय, त्रिपुरा और गोवा में राजनीतिक मैदान में प्रवेश कर चुकी है.

    Tags: Congress, Karnataka, Prashant Kishor, TMC

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