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खुलासा: टारगेट पूरा करने खाली ट्यूब भेजते थे लैब, ताकि रिपोर्ट ही निगेटिव आए

गुजरात के राजकोर्ट में टारगेट पूरा करने खाली ट्यूब भेजते थे लैब. 
 (प्रतीकात्मक फोटो)

गुजरात के राजकोर्ट में टारगेट पूरा करने खाली ट्यूब भेजते थे लैब. (प्रतीकात्मक फोटो)

एक मीडिया स्टिंग से पता चला है क‍ि गुजरात (Gujarat) के राजकोट (Rajkot) में कुछ लोग आरटी-पीसीआर (RT-PCR) की 1,300 से अधिक किट बैरंग (खाली) किए ही जांच के लिए लैब में भेज चुके हैं. ये गोरखधंधा टारगेट पूरा करने के लिए किया जाता था.

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राजकोट. एक ओर जहां देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ जंग लड़ी जा रही है, वहीं दूसरी तरफ गुजरात (Gujarat) के सरकारी अधिकारी और कर्मचारियों की वजह से राज्‍य में कोरोना (Corona) ने विकराल रूप ले लिया है. एक मीडिया स्टिंग से पता चला है क‍ि गुजरात के राजकोट (Rajkot) में कुछ लोग आरटी-पीसीआर की 1,300 से अधिक किट बैरंग (खाली) किए ही जांच के लिए लैब में भेज चुके हैं. कई लोगों की मिलीभगत से ये गोरखधंधा इसलिए किया जाता था ताकि उनका टारगेट भी पूरा हो जाए और रिपोर्ट भी निगेटिव आएगी.

दैनिक भास्‍कर राजकोट के स्टिंग में इस पूरे गोरखधंधे का पर्दाफाश किया गया है. स्टिंग के जरिए राजकोट के पडधरी का खोडापीपर स्वास्थ्य केंद्र में कर्मियों द्वारा फर्जी सैंपल लैब भेजने का खुलासा किया गया है. अपने इस गोरखधंधे को अंजाम देने के लिए इन लोगों ने 1300 से अधिक किट को भी बर्बाद कर दिया है.

इस साजिश को अंजाम देने के लिए जिन नाम और नंबर का इस्‍तेमाल किया गया है वो भी पूरी तरह से फर्जी हैं. बताया जा रहा है कि सैंपल के साथ जो मोबाइल नंबर भेजा गया है वह स्‍वास्‍थ्‍यकर्मियों का हुआ करता था. जिससे अगर कभी कोई फोन या मैसेज आए तो इस धांधली का किसी को भी पता ही न चल सके. इस खुलासे के बाद मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने मामले की जांच के आदेश दिए हैं.
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खाली ट्यूब भेजी जाती थी लैब
बता दें कि आरटी- पीसीआर टेस्‍ट के लिए वीटीएम किट में एक कैमिकल भरी ट्यूब होती है. मरीज के नाग और गले से लिए गए नमूलों को इसी ट्यूब में रखकर उसे सील किया जाता है. इसके बाद उसमें मरीज का नाम, मोबाइल नंबर लिखकर लैब भेजा जाता है. बताया जाता है कि लैब को जो किट भेजी जाती थी उसमें बिना नमूने वाली ट्यूब डाल दी जाती थी. इसके बाद जब वहां जांच होती थी तो रिपोर्ट हर बार निगेटिव आती थी.
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