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सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस यूयू ललित ने कहा- जजमेंट की आलोचना हो सकती है, जज की नहीं

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस यूयू ललित ने कहा- जजमेंट की आलोचना हो सकती है, जज की नहीं

जस्टिस यूयू ललित. (File Photo)

जस्टिस यूयू ललित. (File Photo)

देश के होने वाले नए मुख्‍य न्‍यायाधीश (Chief Justice of India) जस्टिस यूयू ललित ने कहा है कि किसी जजमेंट की आलोचना हो सकती है, लेकिन किसी जज की व्‍यक्तिगत क्षमता पर आलोचक ध्‍यान केंद्रित नहीं कर सकते.

हाइलाइट्स

भावी चीफ जस्टिस यूयू ललित ने दिए सवालों के जवाब
जस्टिस ललित बोले- जजों को आजादी से काम करने दें
कहा- अदालतों पर सरकार का कोई दबाव नहीं है

नई दिल्‍ली. देश के होने वाले नए मुख्‍य न्‍यायाधीश (Chief Justice of India) जस्टिस यूयू ललित ने कहा है कि किसी जजमेंट की आलोचना हो सकती है, लेकिन किसी जज की व्‍यक्तिगत क्षमता पर आलोचक ध्‍यान केंद्रित नहीं कर सकते. जस्टिस यूयू ललित 27 अगस्‍त को देश के मुख्‍य न्‍यायाधीश का पदभार ग्रहण कर सकते हैं. उन्‍होंने कहा कि ‘मेरा दृढ़ विश्‍वास है कि एक जज अपने फैसले और आदेश के माध्‍यम से बोलता है.’ उनसे न्‍यायाधीशों के व्‍यक्तिगत क्षमताओं को लेकर सवाल पूछा गया था.

जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि कोई जज सार्वजनिक क्षेत्र में जो कुछ करता है, वह कानूनी विद्वान से लेकर आम आदमी तक, निश्चित रूप से किसी भी व्‍यक्ति द्वारा आलोचना, आत्‍मसात, विश्‍लेषण के लिए उपलब्‍ध है. यह बात उन्होंने एनडीटीवी को दिए एक विशेष इंटरव्‍यू में कही है. उन्‍होंने कहा कि ऐसे मामलों में यह याद रखना चाहिए कि वह एक निर्णय का सामना कर रहा है, इस निर्णय के पीछे के जज का नहीं. ऐसे में जजमेंट की आलोचना हो सकती है, यथासंभव दृष्टिकोण की आलोचना कर सकते हैं. इसको लेकर किसी के पास प्रतिवाद हो सकता है.

जजों को आजादी से काम करने देना चाहिए

जस्टिस यूयू ललित ने कहा कि आप कह सकते हैं कि जज पहले के बाध्‍यकारी दृष्टिकोण को समझने या ध्‍यान में रखने में विफल रहे हैं और इसलिए कहते हैं कि निर्णय का बाध्‍य कानून के एंगल पर परीक्षण नहीं किया जा सकता है. यही बात इससे पहले भी कई चीफ जस्टिस ने कही थी. यूयू ललित ने कहा कि मुकदमों का मीडिया ट्रायल बंद होना चाहिए. जजों को आजादी से काम करने देना चाहिए. सरकार का अदालतों पर कोई दबाव नहीं है.

Tags: Chief Justice of India

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