भारत से मुकाबले के लिए चीन के बाद अब तुर्की की शरण में पाकिस्तान, मंगा रहा रडार सिस्टम

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो)
पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान (फाइल फोटो)

भारत से मुकाबले के लिए चीन (China) से हथियारों (Ammunition) की दरख्वास्त कर चुका पाकिस्तान (Pakistan) अब तुर्की (Turkey) की शरण में है. भारत में घुसपैठ को बढ़ावा देने के लिए उसने तुर्की से रडार सिस्टम की मांग की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 10:11 PM IST
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नई दिल्ली. पुलवामा हमले (Pulwama Attack) के बाद जिस तरह से भारत ने पलटवार करते हुए बालाकोट (Balakot Air Strike) में आतंकी शिविरों को निशाना बनाया था, उससे पाकिस्तान को होश फ़ाख्ता हो गए थे. चूंकि वो अपनी आदत से बाज आने वाला नहीं था इसलिए उसने अपनी तैयारी तभी से शुरू भी कर दी थी. बालाकोट स्ट्राइक के तुरंत बाद ही पाकिस्तान ने चीन (China) के सामने मिसाइल सिस्टम (Missile System) दिए जाने की गुहार लगाई थी. खुफिया रिपोर्ट में ये साफ हुआ की पाकिस्तान ने मल्टिपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम A-300 बैटरी देने के लिए चीन से दरख्वास्त की थी.

चीन से मांगा था A-300 MLRS
पाकिस्तान लंबी दूरी के इस रॉकेट सिस्टम को भारतीय वायुसेना की तरफ से भविष्य में किसी भी पलटवार से निपटने के लिए अपने जखीरे में लेना चाहता है. A-300 MLRS की रेंज 90 से 299 किलोमीटर तक बताई जाती है और इस सटीक निशाना लगाने में माहिर माना जाता है. फिलहाल पाकिस्तान की आर्टिलरी में A-100 की दो रेजिमेंट मौजूद है और वो इसे और मजबूत करने के लिए चीन A-300 MLRS लेना चाहता है.

चीन से ले रहा है ड्रोन
पाकिस्तान भारतीय सेना की किसी भी मूवमेंट ता पता लगाने के लिए बडी संख्या में ड्रोन भी चीन से ले रहा है जिसमें कॉम्बैट ड्रोन भी शामिल है. वही पाकिस्तान एक और मित्र देश टर्की से भी अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए और सर्विलांस के लिए रडार सिस्टम भी लेने जा रहा है.



तुर्की से मंगा रहा रडार सिस्टम
जानकारी के मुताबिक रैटीनार PTR-X पैरामीटर सर्विलांस रडार सिस्टम की खास बात ये है की ये पोर्टेबल है यानी कि इस सिस्टम को दो लोग आसानी से कही भी ले जा सकते हैं. साथ ही इसे चलाने के लिए सिर्फ एक आदमी की जरूरत होगी है. ये सिस्टम पूरी तरह से ऑटोमैटिक तरीके से बडे इलाके को स्कैन कर सकता है और इसके इस्तेमाल से लगातार दूरबीनों और कैमरे की मदद से निगरानी करने की कोई जरूरत नहीं होगी.

नहीं बाज आएगा पाकिस्तान, फिर करेगा घुसपैठ की कोशिश!
जानकारों की मानें तो पाकिस्तान तुर्की से इस सिस्टम को इसलिए ले रहा है क्योंकि एलओसी पर भारतीय सेना के मजबूत ग्रिड के चलते घुसबैठ की कोशिशें नाकाम हो रही हैं. ऐसे में इस रडार के जरिए वो उन इलाकों को स्कैन करके ढूंढने की कोशिश करेगा जहां से उसे घुसपैठ करना में आसानी हो. इससे पारम्परिक घुसपैठ के रास्तों के बजाए नए रूट तलाशे जाएंगे.
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