कृषि बिल: कांग्रेस ने कहा- संसदीय लोकतंत्र में आज काला दिन, अपने हक के लिए किसान सड़कों पर

केसी वेणुगोपाल ने कृषि विधेयकों के पास होने पर सरकार पर निशाना साधा है (File Photo)
केसी वेणुगोपाल ने कृषि विधेयकों के पास होने पर सरकार पर निशाना साधा है (File Photo)

Farm Bills 2020: कांग्रेस ने राज्यसभा में कृषि संबंधी विधेयक पारित होने पर कहा कि आज का दिन संसदीय लोकतंत्र में काला दिन है. कांग्रेस ने कहा कि विधेयक पारित करने के लिए सरकार ने जल्दी दिखाई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 20, 2020, 10:04 PM IST
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नई दिल्ली. संसद (Parliament) में कृषि विधेयक (Agriculture Bills 2020) पास होने के बाद कांग्रेस ने आज के दिन को भारत के संसदीय लोकतंत्र में काला दिन करार दिया. कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल (KC Venugopal) ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि जिस तरह से किसान विरोधी कानून (Anti-Farmer Law) राज्यसभा (Rajyasabha) में लाया गया वह अस्वीकार्य और निंदनीय है. वेणुगोपाल ने कहा कि किसान एसोसिएशंस और संगठन अपने हक की लड़ाई के लिए सड़कों पर हैं. केसी वेणुगोपाल ने कहा कि हमें समझ में नहीं आता कि जल्दी किस बात की है? वह (सरकार) किसानों की आवाज नहीं सुन रहे हैं. वह राजनीतिक दलों की बातें नहीं सुन रहे हैं. वह संसद की खासकर विपक्ष की आवाज नहीं सुन रहे हैं.

केसी वेणुगोपाल ने कहा कि मैंने राजनाथ सिंह और पांच अन्य मंत्रियों की प्रेस कॉन्फ्रेंस देखी. वह उपसभापति के कदम और उनके रवैये पर सफाई दे रहे थे. यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है. हम वरिष्ठ मंत्रियों से अच्छी प्रतिक्रिया की उम्मीद करते हैं. उन्हें कम से कम उपसभापति के व्यवहार की निंदा करनी चाहिए थी. केसी वेणुगोपाल ने आगे कहा कि लेकिन वह उपसभापति और उनकी प्रक्रिया पर सफाई दे रहे थे. इसका मतलब है कि आज का पूरा कार्यक्रम एक साजिश था, जो कि बीजेपी के नेतृत्व में बना था. वेणुगोपाल ने आरोप लगाया कि वह सदन में किसानों की आवाजों को दबाना चाहते हैं.

वहीं कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने संसद में कृषि संबंधी विधेयकों के पारित होने के बाद रविवार को आरोप लगाया कि सरकार ने इन विधेयकों के रूप में किसानों के खिलाफ ‘मौत का फरमान’ निकाला है.



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उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘जो किसान धरती से सोना उगाता है, मोदी सरकार का घमंड उसे ख़ून के आंसू रुलाता है. राज्यसभा में आज जिस तरह कृषि विधेयक के रूप में सरकार ने किसानों के ख़िलाफ़ मौत का फरमान निकाला, उससे लोकतंत्र शर्मिंदा है.’’



सुरजेवाला ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब
कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए कि जब अनाज मंडी ख़त्म हो जाएंगी, तो किसान को एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) कौन और कैसे देगा? क्या एफसीआई (भारतीय खाद्य निगम) 15.50 करोड़ किसानों के खेत से एमएसपी पर फसल ख़रीद सकती है? आपने क़ानून में एमएसपी पर फसल ख़रीद की गारंटी क्यों नही दी? क्या आढ़ती-मज़दूर फसल बेचने में मददगार है, या बंधन?’’

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संसद ने रविवार को कृषि उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्द्धन और सुविधा) विधेयक-2020 और कृषक (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) कीमत आश्वासन समझौता और कृषि सेवा पर करार विधेयक-2020 को मंजूरी दे दी.



राज्यसभा में रविवार को कांग्रेस नीत विभिन्न विपक्षी दलों ने कृषि संबंधी संबंधी दो विधेयकों की तीखी आलोचना करते हुए कहा कि वे किसानों के ‘डेथ वारंट’ पर हस्ताक्षर नहीं करेंगे. कई दलों ने दोनों विधेयकों को प्रवर समिति में भेजे जाने की मांग की. विभिन्न विपक्षी दलों ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) समाप्त करने और कार्पोरेट जगत को फायदा पहुंचाने के लिए दोनों कृषि विधेयक लेकर आयी है. हालांकि सरकार ने इसका खंडन करते हुए कहा कि किसानों को बाजार का विकल्प और उनकी फसलों को बेहतर कीमत दिलाने के उद्देश्य से ये विधेयक लाए गए हैं. (भाषा के इनपुट सहित)
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