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जेटली ने कहा, ज्यादा न्यायिक हस्तक्षेप ठीक नहीं

आईएएनएस
Updated: June 19, 2015, 4:57 PM IST
जेटली ने कहा, ज्यादा न्यायिक हस्तक्षेप ठीक नहीं
India's Finance Minister Arun Jaitley looks on before he rings the closing bell for the trading session at the New York Stock Exchange in New York on June 17, 2015. Wall Street stocks rose early ahead of a Federal Reserve policy statement that could offer clues on when the US central bank will begin lifting interest rates. AFP PHOTO/ KENA BENTACUR (Photo credit should read KENA BETANCUR/AFP/Getty Images)

वाणिज्यिक मध्यस्थता में अत्यधिक न्यायिक हस्तक्षेप निवेशकों के लिए ठीक नहीं है, क्योंकि इससे भारतीय कंपनियों पर लागत बढ़ती है और मंत्रिमंडल इससे निपटने के लिए कानून में बदलाव पर विचार कर रहा है।

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न्यूयॉर्क। वाणिज्यिक मध्यस्थता में अत्यधिक न्यायिक हस्तक्षेप निवेशकों के लिए ठीक नहीं है, क्योंकि इससे भारतीय कंपनियों पर लागत बढ़ती है और मंत्रिमंडल इससे निपटने के लिए कानून में बदलाव पर विचार कर रहा है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने यह बात कही।

जेटली ने कहा कि जब भारत ने वैश्विक अनुकूलता, अंतर्राष्ट्रीय वाणिज्यिक मध्यस्थता के लिए विवाद निवारण कानून बनाए तो न्यायालय ने इसकी व्याख्या की कि हमारे अधिकार-क्षेत्र समाप्त नहीं हुए है, हम हस्तक्षेप कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि इस दृष्टिकोण के कारण भारतीय पक्षों के लिए यह काफी महंगा साबित हुआ, क्योंकि उसके बाद सभी करारों का एक महत्वपूर्ण अवयव यानी विवाद निपटान स्थल भारत के बाहर होगा और बुनियादी व प्रक्रियागत कानून भी भारत के बाहर होंगे।



जेटली ने कहा कि यह भारतीय पक्षों के लिए बहुत महंगा साबित हुआ है। इसलिए अत्यधिक हस्तक्षेप या अत्यधिक न्यायिक हस्तक्षेप की प्रवृत्ति निवेशकों के हित में नहीं है।



अमेरिका के पूर्व वित्त मंत्री टिमोथी गीथनर की अध्यक्षता में आयोजित एक चर्चा सत्र में भाग लेते हुए जेटली अर्थव्यवस्था और बुनियादी ढांचागत विकास एजेंडे पर न्यायपालिका के प्रभाव के बारे में उपस्थित लोगों के प्रश्नों के जवाब दे रहे थे।

उन्होंने कहा कि भारत में सरकार और विधि आयोग ने न्यायालयों के कुछ हस्तक्षेपवादी फैसलों की जांच की और अपने खुद के विवाद निपटान कानून में बदलाव का सुझाव दिया है। ये बदलाव अब मंत्रिमंडल के समक्ष हैं और हम उन निर्णयों के प्रभावों को निष्प्रभावी करेंगे ताकि घरेलू न्यायाधिकरण अपनी शर्तो पर काम कर सकें।

अदालतों में होने वाली देरी पर जेटली ने कहा कि भारत की न्यायिक प्रणाली स्वतंत्र है, लेकिन धीमी है, क्योंकि यह अत्यंत स्वतंत्र है। इसकी गति बढ़ाने की सरकार की क्षमता सीमित है। स्वतंत्र प्रणाली में अपनी स्वयं की तेजी और गति के सहारे ही सुधार आता है।

इस सत्र का केंद्रबिंदु भारत में आर्थिक सुधार था। गीथनर ने कहा कि आज भारत में संसद में सशक्त बहुमत और स्पष्ट जनादेश के साथ सशक्त प्रधानमंत्री के चुनाव और एक उत्कृष्ट वित्त मंत्री, यह सब देखकर लगता है कि भारत में दशकों में यह सुधारों की सबसे उम्दा अवधि है।

जेटली ने कहा कि वह नहीं चाहते कि आर्थिक एजेंडे के क्रियान्वयन में संसद बाधा बने, यहां तक कि भाजपा राज्यसभा में बहुमत में भी नहीं है।

भूमि अधिग्रहण विधेयक पर उन्होंने कहा कि ऊपरी सदन में कुछ बाधा आई है, लेकिन यह बाधा अधिक समय तक नहीं रहेगी। अबतक हमारी सरकार के किसी भी विधेयक को नकारा नहीं गया है। इनमें से दो को बाधित किया गया है। यानी समितियों में उन पर चर्चा की जा रही है। जेटली का मानना है कि उच्च विकास दर हासिल करने के लिए अगले दो या तीन साल बहुत महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि इस दौरान आर्थिक सुधार क्रियान्वित होंगे।

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First published: June 19, 2015, 4:30 PM IST
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