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टूलकिट मामला: बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने शांतनु को दी 10 दिन की ट्रांजिट बेल

कुछ आलोचकों का कहना है कि ‘टूलकिट’ भारत में प्रदर्शनों को हवा देने की उनकी साजिश का ‘‘सबूत’’ हैं.
कुछ आलोचकों का कहना है कि ‘टूलकिट’ भारत में प्रदर्शनों को हवा देने की उनकी साजिश का ‘‘सबूत’’ हैं.

Toolkit Case: केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली से लगी सीमाओं पर किसानों के प्रदर्शन को समर्थन देते हुए जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने यह ‘टूलकिट’ साझा की थी. ‘टूलकिट’ में ट्विटर के जरिये किसी अभियान को ट्रेंड कराने से संबंधित दिशानिर्देश और सामग्री होती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 16, 2021, 6:18 PM IST
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मुंबई. जलवायु कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग (Climate Activist Greta Thunberg) द्वारा सोशल मीडिया (Social Media) पर किसानों के प्रदर्शन से जुड़ी ‘टूलकिट’ साझा किये जाने के मामले (Toolkit Case) में दिल्ली पुलिस द्वारा दर्ज मामले में आरोपी पर्यावरण कार्यकर्ता शांतनु मुलुक को 10 दिन की ट्रांजिट रिलीफ मिल गई है. वहीं वकील निकिता जैकब की जमानत याचिका पर बुधवार को फैसला होगा. मुलुक और जैकब ने ट्रांजिट अग्रिम जमानत के लिए सोमवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय का रुख किया था. शांतनु को बॉम्बे हाईकोर्ट की औरंगाबाद बेंच ने 10 दिन की ट्रांजिट रिलीफ दी. कोर्ट ने निकिता के वकील को कल शांतनु के मामले में औरंगाबाद बेंच द्वारा दिए गए आदेश की कॉपी लाने को कहा है.

इससे पहले दिल्ली की एक अदालत ने इस मामले में दोनों के खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी किया था. दोनों ने अदालत में अलग-अलग याचिकाएं दायर कीं. जिसकी सुनवाई मंगलवार को हुई. दिल्ली पुलिस के अनुसार, दोनों पर दस्तावेज तैयार करने और ‘‘खालिस्तान-समर्थक तत्वों’’ के सीधे संपर्क में होने का आरोप है. जैकब ने सोमवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय के न्यायाधीश पीडी नाइक की एकल पीठ से याचिका पर तत्काल सुनवाई का अनुरोध किया.

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जैकब ने चार सप्ताह के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत की मांग की है, ताकि वह दिल्ली में अग्रिम जमानत याचिका दायर करने के लिए संबंधित अदालत का रुख कर सकें. मध्य महाराष्ट्र के बीड जिले के निवासी मुलुक ने अपनी याचिका उच्च न्यायालय की औरंगाबाद पीठ में दायर की. याचिका में कहा, ‘‘आवेदक (जैकब) को डर है कि उन्हें राजनीतिक प्रतिशोध और ‘मीडिया ट्रायल’ के कारण गिरफ्तार किया जा सकता है.’’
याचिका में प्राथमिकी को बताया गया गलत और निराधार
याचिका में कहा गया कि मामले में दर्ज प्राथमिकी ‘‘गलत एवं निराधार है’’ और जैकब ने अभी तक दिल्ली पुलिस के साइबर प्रकोष्ठ के साथ सहयोग किया है तथा बयान भी दर्ज कराया है. याचिका में कहा, "‘लीगल राइट्स आर्ब्जवेटरी’ नाम की एक संस्था ने दिल्ली पुलिस के समक्ष गलत और निराधार शिकायत दर्ज कराई है और 26 जनवरी 2021 को हुई हिंसा का दोष आवेदक पर लगाने की कोशिश की है."

याचिका के अनुसार, 11 फरवरी को दिल्ली पुलिस जैकब के मुंबई के गोरेगांव इलाके में स्थित घर पर तलाशी वारंट के साथ पहुंची थी और उसने कुछ दस्तावेज तथा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए थे. उसके अनुसार, ‘‘ आवेदक का जागरूकता फैलाने या हिंसा, दंगे भड़काने या किसी को शारीरिक नुकसान पहुंचाने के लिए संचार पैक/ टूलकिट पर शोध, चर्चा करने, उसका संपादन करने का कोई धार्मिक, राजनीतिक या वित्तीय उद्देश्य या एजेंडा नहीं है.’’ उसने कहा कि जैकब बॉम्बे उच्च न्यायालय में वकील हैं और पर्यावरण संबंधी मामले के लिए स्वेच्छा से काम करती हैं.

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ग्रेटा थनबर्ग ने साझा की थी टूलकिट
आवेदन में कहा, ‘‘आवेदक हाल ही में पारित हुए कृषि कानूनों को लेकर और किसानों को खलनायक के तौर पर पेश करने को लेकर बेहद चिंतित हैं.’’

उसके अनुसार, जैकब की निजी जानकारियां सोशल मीडिया पर वायरल की जा रही हैं.

आवेदन में कहा गया है कि उनका आम आदमी पार्टी (आप) जैसे राजनीतिक दलों के साथ संबंध होने का दावा करके जैकब के खिलाफ नफरत एवं हिंसा भड़काने के लिए झूठ फैलाया जा रहा है.

केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली से लगी सीमाओं पर किसानों के प्रदर्शन को समर्थन देते हुए जलवायु परिवर्तन कार्यकर्ता ग्रेटा थनबर्ग ने यह ‘टूलकिट’ साझा की थी. ‘टूलकिट’ में ट्विटर के जरिये किसी अभियान को ट्रेंड कराने से संबंधित दिशानिर्देश और सामग्री होती है.

कुछ आलोचकों का कहना है कि ‘टूलकिट’ भारत में प्रदर्शनों को हवा देने की उनकी साजिश का ‘‘सबूत’’ हैं.
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