देश में हो रहे अच्छे कामों को बदनाम करने के लिए बनाई गई है टूल किट: RSS के प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने News18 हिन्दी के साथ खास बातचीत की.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने News18 हिन्दी के साथ खास बातचीत की.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर (Sunil Ambekar) ने कोरोना की दूसरी लहर में संघ की भूमिका और सेवा कार्यों के साथ साथ टूल किट पर मचे हंगामे पर न्यूज18इंडिया के एसोसिएट एडिटर यतेंद्र शर्मा से खास बातचीत की.

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नई दिल्ली. राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर (Sunil Ambekar) ने कोरोना की दूसरी लहर में संघ की भूमिका और सेवा कार्यों के साथ साथ टूल किट पर मचे हंगामे पर न्यूज18इंडिया के एसोसिएट एडिटर यतेंद्र शर्मा से खास बातचीत की. संघ के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील अंबेकर ने कहा कि टूल किट दूसरे उद्देश्यों को पूरा करने के लिए बनाई गई है. आज देश में हो रहे अच्छे कामों को बदनाम करने के लिए ये टूल किट लाई गई है.

सवाल- पिछली बार संघ के स्वयंसेवक सड़कों पर ज़रूरतमंदों को भोजन, काढ़ा, मेडिसिन बांटते हुए दिखाई दे रहे थे, लेकिन इस बार पिछली बार की तुलना में संघ के स्वयंसेवक कोरोना पीड़ितों की सहायता के लिए दिखाई नहीं दिए...

अंबेकर- कोरोना की दूसरी लहर पिछली बार से ज़्यादा चितिंत करने वाली लहर है और पिछली बार की तुलना में इस बार पीड़ितों की संख्या बढ़ी है जिसके कारण संघ ने विभिन्न राज्यों में शासन और प्रशासन के साथ मिलकर आवश्यकतानुसार सेवा कार्य किये हैं. जहां पिछली लहर में भोजन, मेडिसिन की डिमांड ज़्यादा थी वहीं इस बार हॉस्पिटल, ऑक्सीजन, आइसोलेशन सेंटर की ज्यादा आवश्यकता महसूस की गई. इसलिए ज़्यादातर स्वयंसेवक इन सेंटर्स में सेवा कार्य कर रहे हैं. संघ से जुड़े हुए क़रीब साढ़े चार हज़ार डॉक्टर्स देशभर में हेल्पलाइन के माध्यम से सेवा दे रहे हैं. क़रीब 800 शहर/गांव में आइसोलेशन एवं कोविड केयर सेंटर संघ ने बनाये हैं, जिसमें क़रीब 17300 बेड्स संघ ने उपलब्ध करवाये हैं. 1256 रक्तदान शिविर लगाकर 44 हज़ार यूनिट्स रक्त दान किया गया है. वेक्सीनेशन जागरूकता अभियान में क़रीब 8 हज़ार स्थानों पर 22 हज़ार से ज़्यादा कार्यकर्ता लगे हैं. कुल मिलाकर 35 हज़ार से ज़्यादा स्वयंसेवक सेवा कार्यों में लगे हुए हैं.इसके अलावा अलग-अलग जगहों पर शव वाहिनी (एंबुलेंस) की व्यवस्था की गई हैं. श्मशानों में अंतिम संस्कार उचित विधि से हो इसके लिए भी स्वयं सेवक लगे हुए हैं. जहां जहां भोजन, काढ़ा, मेडिसिन की ज़रूरत है वहां भी संघ उसकी व्यवस्था करवा रहा है.

कई स्वयं सेवकों की मौत सेवा कार्य करते हुए इस दौरान हुई है. लेकिन इसके बावजूद स्वयं सेवकों के सेवा कार्य करने की गति में कोई रुकावट नही आई है.
सवाल- इस बार ग्रामीण इलाक़ों में भी कोरोना काफ़ी फैला है... वहां रोक थाम के लिए आपकी कोई योजना है?

अंबेकर- बिल्कुल ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सेवक लगातार काम कर रहे हैं. हमारा पूरा ज़ोर ग्रामीण इलाक़ों में जन जागरूकता को लेकर है. इसलिए वैक्सीन जागरूकता को लेकर 8 हज़ार स्थानों पर स्वयंसेवक काम कर रहे हैं. क्योंकि देखने में आया है कि कई जगहों पर वैक्सीन को लेकर डर हैं इसलिए इस डर को दूर करने के लिए जागरूकता बहुत ज़रूरी है. इसके अलावा ग्रामीण इलाक़ों में कोविड केयर सेंटर, मेडिसिन आदि की व्यवस्था स्वयं सेवक कर रहे हैं. कई जगह सरकारी कोविड सेंटर की व्यवस्था में भी स्वयं सेवक लगे हुए हैं.

सवाल- कुंभ जैसे बड़े आयोजन को भी कोरोना फैलने का कारण माना जा रहा है. क्या आपको लगता है कि कुंभ के कारण कोरोना फैला है?



अंबेकर- बड़े आयोजन इस समय होने नहीं चाहिए लेकिन जहां तक कुंभ का सवाल है तो अप्रैल में ही उसको ख़त्म करने की घोषणा कर दी गई थी. और कोरोना के केस तो बाद में आये. ये विश्लेषण का विषय है.

सवाल- लेकिन टूल किट में तो कुंभ का ज़िक्र है?

अंबेकर- टूल किट तो दूसरे उद्देश्य से बनाई गई. देश में अच्छी चीजों को बदनाम करने के लिए बनाई गई है. अच्छे कामों से कैसे ध्यान हटाया जाये, कैसे राजनीतिक फ़ायदा लिया जाये, ये टूल किट उसके लिए है लेकिन अभी समय राजनीति का नहीं है. अभी एकजुट होकर देश के लिये काम करने की ज़रूरत है.

सवाल- वैक्सीन की डिमांड जिस हिसाब से है, उससे आपूर्ति कम है. क्या आपको लगता है कि पेटेंट हटाकर दूसरी कंपनियों को भी वैक्सीन बनाने की अनुमति सरकार को देनी चाहिए?

अंबेकर- सवाल वैक्सीन की आपूर्ति का नहीं बल्कि सवाल ये है कि आज भी कई राज्यों में लोग वैक्सीन लगवाने के लिए आगे नहीं आ रहे है. इसलिये लोगों को वैक्सीन के लिये आगे आना चाहिए और परिस्थितियों को देखते हुए वैक्सीन का पेटेंट हटाना चाहिए, इससे दूसरी कंपनियों को देने से ज़्यादा वैक्सीन बनेंगी.

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