Home /News /nation /

शून्य नहीं होगा कोरोना के केस लेकिन महामारी के अंत की शुरुआत हो सकता है ओमिक्रॉन: एक्सपर्ट्स

शून्य नहीं होगा कोरोना के केस लेकिन महामारी के अंत की शुरुआत हो सकता है ओमिक्रॉन: एक्सपर्ट्स

बेकाबू रफ्तार से बढ़ रहा है. 
कोरोना (फाइल फोटो)

बेकाबू रफ्तार से बढ़ रहा है. कोरोना (फाइल फोटो)

Omicron variant could be beginning of end of pandemic: दुनिया के टॉप डॉक्टर्स का मानना है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट कोरोना महामारी के अंत की शुरुआत का कारण बन सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में महामारी रोग की विशेषज्ञ डॉ मोनिका गांधी ने कहा कि, हां, ऐसा लगता है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट की मदद से इस महामारी का अंत होगा. उन्होंने कहा कि यह वेरिएंट अति संक्रामक है जिसके कारण लोग वैक्सीन लेने के बावजूद दोबारा संक्रमित हो रहे हैं. हालांकि ओमिक्रॉन वेरिएंट वैक्सीन ना लेने वाले लोगों को भी ज्यादा प्रभावित नहीं कर रहा है. पुणे के इम्युनोलॉजिस्ट डॉ विनीता बल ने कहा कि, जब तक एक बड़ी आबादी के अंदर कोरोना वायरस से लड़ने के खिलाफ इम्युनिटी विकसित नहीं हो जाती तब तक यह वायरस हमारे बीच मौजूद रहेगा.

अधिक पढ़ें ...

नई दिल्ली: देश और दुनिया में ओमिक्रॉन वेरिएंट (Omicron Variant) के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं और रोजाना आने वाले कोरोना संक्रमण (Coronavirus) के केस रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि महामारी को लेकर नया साल 2022 कैसा रहने वाला है. हालांकि राहत की बात है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट से लोगों को ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा है और यह सिर्फ हल्के लक्षण का कारण ही बना है. अस्पताल में भर्ती होने और संक्रमण से होने वाले मौतों की कम दर से भी राहत मिली है. यह वेरिएंट श्वसन तंत्र के ऊपरी हिस्से को प्रभावित करता है और फेफड़ों को नुकसान नहीं पहुंचाता है. जिसकी वजह से लोगों को ऑक्सीजन सपोर्ट (Oxygen support) और आईसीयू में भर्ती करने की जरुरत नहीं होती है.

लेकिन ओमिक्रॉन वेरिएंट के कारण बड़ी संख्या में हेल्थ वर्कर्स संक्रमित हुए हैं जिसकी वजह से अस्पतालों में डॉक्टर्स, नर्स और मेडिकल स्टाफ की कमी से परेशान पैदा हो गई है. दिल्ली में कोविड टॉस्क फोर्स से जुड़े डॉ शमशेर द्विवेदी ने कहा है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के कारण अस्पतालों में कर्मचारियों की कमी हो गई है और डॉक्टर्स व मेडिकल स्टाफ के संक्रमित होने से मरीजों की देखभाल बड़ी चुनौती बन गई है.

साउथ अफ्रीका में ओमिक्रॉन वेरिएंट से जुड़े केसों में तेजी से वृद्धि हुई फिर पीक आने के बाद मामलों में बड़ी गिरावट देखने को मिली. इससे यह साफ हो जाता है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट ज्यादातर हल्के लक्षण का कारण बनता है इसलिए अब विश्लेषण करने की जरुरत है कि आगे क्या होगा…

क्या यह महामारी का अंत है?
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया में महामारी रोग की विशेषज्ञ डॉ मोनिका गांधी ने कहा कि, हां, ऐसा लगता है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट की मदद से इस महामारी का अंत होगा. उन्होंने कहा कि यह वेरिएंट अति संक्रामक है जिसके कारण लोग वैक्सीन लेने के बावजूद दोबारा संक्रमित हो रहे हैं. हालांकि ओमिक्रॉन वेरिएंट वैक्सीन ना लेने वाले लोगों को भी ज्यादा प्रभावित नहीं कर रहा है. क्योंकि यह फेफड़ों की कोशिकाओं को संक्रमित नहीं कर सकता है. कई अध्ययनों में इस बात का खुलासा हुआ है. ओमिक्रॉन वेरिएंट के कारण होने वाले संक्रमण से लोगों की इम्युनिटी और विकसित होगी व भविष्य में आने वाले अन्य वेरिएंट्स से भी लड़ने में मदद मिलेगी. डॉ मोनिका गांधी ने कहा कि हमें लगता है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट हमें इस महामारी से बाहर लेकर आएगा और इसका अंत होगा.

लेकिन हर डॉक्टर इस बात से इत्तेफाक नहीं रखता है. पुणे के इम्युनोलॉजिस्ट डॉ विनीता बल ने कहा कि, जब तक एक बड़ी आबादी के अंदर कोरोना वायरस से लड़ने के खिलाफ इम्युनिटी विकसित नहीं हो जाती तब तक यह वायरस हमारे बीच मौजूद रहेगा. दुनियाभर में बच्चों को अब भी वैक्सीन नहीं लगी है. इसलिए यह कहने में जल्दबाजी होगी आने वाले दिनों में महामारी का अंत हो जाएगा.

यह भी पढ़ें: कोरोना से बढ़ी परेशानी, 17 अस्पतालों में 1200 डॉक्‍टरों समेत 2000 से अधिक स्वास्थ्य कर्मी संक्रमित- सूत्र

मास्क क्यों जरूरी है?
डॉ द्विवेदी ने कहा कि, भले ही युवाओं में ओमिक्रॉन हल्के लक्षण का कारण बनता हो लेकिन उन्हें मास्क पहनना चाहिए. इससे उन लोगों का बचाव होगा जिनकी इम्युनिटी कमजोर है. क्योंकि यह अति संक्रामक वेरिएंट है और लोगों को बड़ी संख्या में संक्रमित करेगा. इसलिए मास्क की मदद से केसों में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं होगी.

क्या वैक्सीन ओमिक्रॉन वेरिएंट और अन्य नए वेरिएंट्स के खिलाफ प्रभावी होगी?
इस सवाल के जवाब में डॉ मोनिका गांधी ने कहा कि, हां, वैक्सीन सभी वेरिएंट्स के खिलाफ काम करेगी. वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा गंभीर बीमारियों से हमारा बचाव करेगी. डॉ गांधी के अनुसार, वायरस के नए वेरिएंट्स आएंगे लेकिन टी सेल इम्युनिटी की मदद से हमें पर्याप्त सुरक्षा मिलेगी. इसलिए मौजूदा वैक्सीन प्रभावी हैं और हमें हर समय नई वैक्सीन की आवश्यकता नहीं है.

वहीं डॉ विनीता बल ने कहा कि पूर्व में मौजूद इम्युनिटी से, चाहे वह संक्रमण से विकसित हुई हो या वैक्सीनेशन से, इसके माध्यम से हमें नये वेरिएंट्स से पर्याप्त सुरक्षा मिलेगी.

लॉकडाउन कितने प्रभावी होंगे?
डॉ द्विवेदी ने कहा कि ओमिक्रॉन वेरिएंट के संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या आने वाले दिनों में बढ़ सकती है. उन्होंने कहा कि लॉकडउन को लेकर कोई वैज्ञानिक तर्क नहीं है लेकिन संक्रमण की दर को कम करने या रोकने के लिए लॉकडाउन से मदद मिलेगी. क्योंकि अगर संक्रमित मरीजों की संख्या अगर बढ़ती है तो इसका सीधा बोझ स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ेगा.

दुनियाभर में कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए स्थानीय सरकारें कोविड-19 रणनीतियों पर काम कर रही हैं. डॉ मोनिका गांधी का कहना है कि कोविड-19 संक्रमण के कई कारण हो सकते हैं इनमें संक्रमण की लंबी अवधि, वैक्सीन का प्रभावी नहीं होना और यह मानकर चलना कि कोविड-19 श्वसन तंत्र से संबंधित सिन्ड्रोम है. इसलिए कोविड का पूर्ण रुप से अंत संभव नहीं है. हालांकि हम कोरोना संक्रमण पर नियंत्रण पाने के बेहद करीब है. इसके लिए जरूरी है कि पात्र आबादी का वैक्सीनेशन किया जाए, साथ ही बच्चों का भी कोरोना टीकाकरण पूर्ण हो.

Tags: Corona vaccination, Coronavirus, Omicron

विज्ञापन

राशिभविष्य

मेष

वृषभ

मिथुन

कर्क

सिंह

कन्या

तुला

वृश्चिक

धनु

मकर

कुंभ

मीन

प्रश्न पूछ सकते हैं या अपनी कुंडली बनवा सकते हैं ।
और भी पढ़ें
विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर