लॉकडाउन हटने के बाद तेजी से बढ़ सकता है कोरोना वायरस, जानें वजह

लॉकडाउन हटने के बाद तेजी से बढ़ सकता है कोरोना वायरस, जानें वजह
एपिडमियोलॉजिस्ट जीआर बाबू कहते हैं कि लॉकडाउन के बाद कोविड-19 तेजी से बढ़ सकता है.

एपिडमियोलॉजिस्ट जीआर बाबू कहते हैं कि लॉकडाउन के बाद (Post Lockdown) कोविड-19 दूसरी बार तेजी से फैल सकता है. भारत में कोरोना वायरस के चलते अब तक 934  लोगों की मौत हो चुकी है.

  • News18India
  • Last Updated: April 28, 2020, 12:37 PM IST
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नई दिल्ली. कोरोना वायरस (Coronavirus) के चलते भारत में मार्च से लॉकडाउन है, जो तीन मई तक लागू रहेगा. कोरोना इसके बावजूद बढ़ता ही जा रही है. इस कारण 3 मई के बाद भी लॉकडाउन (Lockdown) पूरी तरह से हटाए जाने की संभावना कम है. एपिडमियोलॉजिस्ट गिरधर आर बाबू (GR Babu ) सचेत करते हुए कहते हैं कि लॉकडाउन के बाद (Post Lockdown) गतिविधियां तेजी से बढ़ेंगी, जिससे देश में कोविड-19 दूसरी बार कहर मचा सकता है. भारत में कोरोना वायरस के चलते अब तक 934 लोगों की मौत हो चुकी है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक दिन पहले ही सभी मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक की. इसमें ज्यादातर मुख्यमंत्री लॉकडाउन बढ़ाए जाने के पक्ष में थे. कुछ ने उन इलाकों में छूट देने की बात कही, जहां कोविड-19 (Covid-19) का एक भी केस नहीं आया है.

डॉक्टर गिरधर आर बाबू, पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन में लाइफ कोर्स एपिडमियोलॉजी के प्रमुख हैं. वे एपिडमियोलॉजी एंड सर्विलांस रिसर्च ग्रुप के भी सदस्य हैं, जिसे इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) ने गठित किया है. वे कहते हैं कि इस समय हर्ड इम्युनिटी स्ट्रेटजी के बारे में सोचा भी नहीं जा सकता. वह भी तब, जब देश लंबे लॉकडाउन से बाहर आ रहा हो.



तो कोरोना दोबारा तेजी से फैलेगा
लॉकडाउन के बाद कौन सी चुनौतियां आने वाली हैं. क्या संक्रमण के मामले बढ़ेंगे? इन सवालों पर जीआर बाबू कहते हैं कि यह चुनौतियां अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग हो सकती हैं. जिन राज्यों ने अब तकतक मामला संभाल रखा है, वे बेहतर कर सकते हैं. लेकिन जब प्रवासी मजदूर शहरों से गांवों की ओर बढ़ेंगे, तो वे अपने साथ खतरा भी बढ़ाएंगे. ऐसे में एक्टिस सर्विलांस अहम होगा. ऐसे में पॉजिटिव केस की जल्दी पहचान करने की जरूरत होगी. जिन राज्यों का हेल्थ सिस्टम बेहतर है, वही ऐसा कर पाएंगे. जो ऐसा नहीं कर पाएंगे, वहां कोरोना दोबारा तेजी से फैलेगा. फैलने की एक वजह यह भी होगी कि लोग लॉकडाउन खत्म होने के बाद सड़कों पर होंगे या साथ काम कर रहे होंगे.

हर्ड इम्युनिटी स्ट्रेटजी भारत के लिए फायदेमंद नहीं
स्वीडन के चीफ एपिडमियोलॉजिस्ट ने कहा कि देश हर्ड इम्युनिटी की ओर बढ़ रहा है. क्या यह भारत के लिए फायदेमंद हो सकता है? जीआर बाबू इस स्ट्रेटजी को पूरी तरह खारिज कर देते हैं. उन्होंने कहा, यह सोचना ही गलत है कि हर्ड इम्युनिटी (सामूहिक प्रतिरक्षा) डेवलप करने के लिए अधिकतर लोगों को संक्रमित होने दिया जाए. खासकर तब, जबकि देश में लॉकडाउन खत्म ही हुआ हो. हर्ड इम्युनिटी तब कारगर होती है, कम जोखिम में ज्यादा लोगों को फायदा होने वाला हो. लेकिन कोरोना के मामले में यह उल्टा पड़ सकता है.

कोरोना के बाद देश के अस्पताल सुधर सकते हैं
जीआर बाबू यह भी कहते हैं कि कोरोना वायरस के बाद भारत की स्वास्थ्य प्रणाली में बदलाव आ सकता है. अभी सरकारी अस्पताल ही कोरोना संक्रमितों का इलाज कर रहे हैं. पूरा भार सरकारी अस्पतालों पर आ गया है. ऐसे में संभव है कि सरकारें कोरोना वायरस के बाद सरकारी अस्पताल को बेहतर बनाने की दिशा में आगे बढ़ें. लेकिन यह तभी संभव होगा जब सरकारें स्वास्थ्य विभाग के लिए बजट बढ़ाएं.

भारत ले सकता है ये सबक
भारत कोरोना वायरस से क्या सबक ले सकता है? इस सवाल के जवाब में जीआर बाबू कहते हैं कि कोराना ने हमें सबसे बड़ा सबक यह दिया है कि हम सार्वजनिक स्वाथ्य प्रणाली को सुधारें. हम पब्लिक हेल्थ सिस्टम को मेडिकल केयर से ज्यादा या बराबर महत्व दें. दवाइयां कम कीमत में और आसानी से उपलब्ध रहें. लोगों को सफाई के प्रति जागरूक करेंगे. यह मानना होगा कि सरकारी अस्पतालों के कारण ही हम कोरोना को नियंत्रति रख पाए हैं. इन्हें और मजबूत करना होगा.

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