कोरोना वायरस: CARUNA की अनूठी पहल, राहत काम में जुटे देश भर के आला अधिकारी

24 केंद्रीय अखिल भारतीय सेवा संघ और राज्य के संघ करुणा से जुड़ चुके हैं
24 केंद्रीय अखिल भारतीय सेवा संघ और राज्य के संघ करुणा से जुड़ चुके हैं

CARUNA एक समर्पित अधिकारियों का समूह है जो अपनी सरकारी जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद भी सहयोग जारी

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 12, 2020, 1:17 PM IST
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नई दिल्ली. पीएम नरेंद्र मोदी (PM Modi) के आह्वान पर पूरा देश एकजुट होकर कोरोना वायरस (Coronavirus) के खिलाफ जंग लड़ रहा है और हर शख्स और संगठन अपने तरीके से राहत के काम में लगा हुआ है, ऐसे में करुणा (CARUNA) से जुड़ कर ऑल इंडिया सर्विसेज के अधिकारी भी अपनी सरकारी ड्यूटी के साथ ही देश भर में एक दूसरे का हाथ थाम कर राहत के काम को आगे बढ़ा रहे हैं. करुणा एक समर्पित अधिकारियों का समूह है जो अपनी सरकारी जिम्मेदारियां पूरी करने के बाद भी सहयोग जारी रखता है और राहत पहुंचाने के रास्ते में आने वाली तमाम अड़चनों को चुटकी में दूर कर राहत पहुंचाना सुनिश्चित करता है.

CARUNA यानी सिविल सर्विसेज एसोसिएशन रीच टू सपोर्ट इन नेचुरल डिसास्टर्स की कहानी बड़ी अनूठी है. लॉकडाउन के ऐलान के बाद 30 मार्च को ज़ूम पर लगभग 12 एसोसिएशन के अधिकारी एक दूसरे से जुड़े और एक कॉंसेप्ट नोट तैयार हुआ. इस बैठक की अध्यक्षता लाल बहादुर शास्त्री अकादमी के निदेशक संजीव चोपड़ा ने की. और धीरे धीरे कारवां बढ़ता चला गया. खास बात ये की फिलहाल सभी घरों से काम कर रहे हैं.

>24 केंद्रीय अखिल भारतीय सेवा संघ और राज्य के संघ करुणा से जुड़ चुके हैं. इनमे आईएएस, आईपीएस, फॉरेस्ट, समेत 14 सिविल सर्विसेज एसोसिएशन है .
सभी राज्यों में ये कोरोना राहत पहुंच रहे हैं
>इस मंच में अभी लगभग 100 सदस्य हैं जो व्हाट्स एप्प से एक दूसरे से जुड़े हैं और प्रभावी क्षेत्र में आने वाली बाधाओं को दूर कर रहे हैं


>7 त्वरित कार्य समूहों में बांट कर 11 दिन का एक्शन प्लान तैयार किया है
>राशन, वेंटीलेटर खरीद, प्रवासी श्रमिकों के रहने की व्यवस्था, सेफ्टी किट का वितरण जैसा काम लगातार चल रहा है
>बड़े अधिकरियों का काम सरकार को सपोर्ट और सप्लीमेंट करने का है.

टीम ने अपने हर अधिकारी को क्षेत्र सेवक का नाम दिया है और टीम भावना ऐसी की किसी क्षेत्र सेवक के चलते किसी को दिक्कत की खबर आई तो उसे तुरंत करुणा से निष्कासित करने का प्रावधान भी है.

ये ग्रुप एक स्थायी प्लेटफार्म रहेगा जो सरकार के साथ ही रहेगा लेकिन अगर कोई भी ऐसी आपदा आये तो तुरंत सक्रिय हो जाएगा. इस लिए ये कहा जा सकता है कि अंग्रेजों का स्टील फ्रेम कहा जाने वाला सिविल सर्विसेज अब पिघल गया है और सेवा को समर्पित भी होने लगा है. यही कल्पना पीएम मोदी की भी है.

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