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भारत से विदेशों में जा रहे हैं 2 लाख रुपये किलो के चिप्स, इंटरपोल हुआ अलर्ट

यूपी से कछुए और चिप्स बंगाल तक पहुंचाए जाते हैं और उसके बाद विदेश में खासतौर से तीनों में सप्लाई कर दिए जाते हैं. (File Photo)
यूपी से कछुए और चिप्स बंगाल तक पहुंचाए जाते हैं और उसके बाद विदेश में खासतौर से तीनों में सप्लाई कर दिए जाते हैं. (File Photo)

वाइल्ड लाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो (WLCCB) भी इसके खिलाफ ऑपरेशन “कुर्मा” चला रहा है. सूत्रों की मानें तो अब इन चिप्स पर इंटरपोल (Interpol) की निगाह पड़ चुकी है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 10, 2021, 7:59 AM IST
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नई दिल्ली. इंटरनेशनल मार्केट की डिमांड में रहने वाले ज्ञानपुरी-बंसरी के चिप्स (Chips) भारत के कुछ हिस्सों में 5 हज़ार रुपये किलो तक बिक रहे हैं. लेकिन भारतीय सीमा (Indian Border) को पार करते ही इनका दाम 2 लाख रुपये किलो तक हो जाता है. यूपी एसटीएफ (UP STF) चिप्स बनाने वालों की तलाश में लगी हुई है. कछुआ तस्करों के पीछे लगी टीम की मानें तो अब इस मामले में इंटरपोल भी सक्रिय हो गई है. गौरतलब रहे यूपी के इटावा और पश्चिम बंगाल (West Bengal) के 24 परगना में यह खास चिप्स तैयार किए जा रहे हैं. ज्ञानपुरी-बंसरी एक जगह है, इसी के नाम पर कछुओं की तीन खास प्रजाति को ज्ञानपुर-बंसरी कहा जाता है. यह सबसे ज़्यादा इटावा (Etawah) में पाई जाती है. यह इलाका राष्ट्रीय चंबल (Chambal) सेंचूरी में आता है. बावजूद इसके यहां से बड़ी संख्या में कछुओं की तस्करी हो रही है.

पर्यावरणविद और गंगा अभियान से जुड़े रहे राजीव चौहान ने इस तस्करी का खुलासा करते हुए बताया, चंबल नदी से लगे आगरा के पिनहाट और इटावा के ज्ञानपुरी और बंसरी में निलसोनिया गैंगटिस और चित्रा इंडिका तीन ऐसी प्रजाति हैं जिनका इस्तेमाल चिप्स बनाने में किया जाता है. कछुए के पेट की स्किन को प्लैस्ट्रान कहा जाता है. इसी प्लैस्ट्रान के चिप्स बनाए जाते हैं.

प्लैस्ट्रान को काटकर अलग कर लिया जाता है. फिर इसे उबालकर सुखाया जाता है. इसके बाद इसे बंगाल के रास्ते विदेशों में भेज दिया जाता है. गर्मी में प्लैस्ट्रान के चिप्स बनाए जाते हैं तो सर्दियों में जिंदा कछुओं की तस्करी की जाती है. क्योंकि सर्दियों में तस्करी करने में कोई परेशानी नहीं आती है.



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थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर 2 लाख रुपये किलो बिकते हैं चिप्स

राजीव चौहान के अनुसार स्थानीय तस्करों से मिली जानकरी के मुताबिक कछुओं को पकड़ने और उनके चिप्स बनाने वाले 5 हज़ार रुपये किलो के हिसाब से ज्ञानपुरी और बंसरी में पकड़े गए निलसोनिया गैंगटिस और चित्रा इंडिका कछुओं के चिप्स बेचते हैं. इटावा-पिनहाट से यह चिप्स 24 परगना पहुंचाए जाते हैं. जहां से यह थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर को तस्करी कर दिए जाते हैं.

तस्करों के अनुसार इन तीन देशों में पहुंचते ही चिप्स 2 लाख रुपये किलो तक बिकने लगता है. एक किलो वजन के कछुए में से 250 ग्राम तक चिप्स निकाल आते हैं. भारत जिस तरह से सख्ती बरती जा रही है, उससे अब तस्करी पर कुछ लगाम लगी है. और उसी के चलते ही अब इंटरनेशनल माकेर्ट में चिप्स के रेट 2 लाख से भी ज्य़ादा हो गए हैं.

चिप्स खाने और सूप पीने के पीछे यह हैं धारणा

राजीव चौहान ने बताया कि जब तस्करों से कछुओं के इस तरह इस्तेमाल करने की मंशा जानी तो उन्होंने बताया कि थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर समेत कई दूसरे देशों में इसे सैक्स पावर बढ़ाने के लिए खाया और पिया जाता है. इसके चिप्स को चिप्स पापड़ की तरह से भी इस्तेमाल किया जाता है और उबालकर सूप भी बनाया जाता है. वहीं इसका मांस पश्चिम बंगाल में ही 400 रुपये किलो तक बिकता है.
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