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TRAI चीफ आर एस शर्मा ने कहा- बेवजह आरोप संस्थान की गरिमा गिराते हैं

ट्राई चीफ आरएस शर्मा (File Photo)

ट्राई चीफ आरएस शर्मा (File Photo)

शर्मा नौ अगस्त को ट्राई प्रमुख के पद से रिटायर हो रहे हैं. एक इंटरव्यू में शर्मा ने दूरसंचार उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर तो बातचीत की लेकिन पिछले हफ्ते आधार संख्या को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने के विवाद पर उन्होंने चुप्पी साधे रखी

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ट्राई के चेयरमैन आर एस शर्मा ने मंगलवार को कहा कि दूरसंचार उद्योग ने उनकी जो ‘उचित आलोचना’ की वह उन्हें स्वीकार है लेकिन बिना किसी सबूत के लगाए गए पक्षपात के आरोप उन्हें परेशान करते हैं. इससे संस्थान की गरिमा भी कम होती है.

शर्मा नौ अगस्त को ट्राई प्रमुख के पद से रिटायर हो रहे हैं. एक इंटरव्यू में शर्मा ने दूरसंचार उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर तो बातचीत की लेकिन पिछले हफ्ते आधार संख्या को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने के विवाद पर उन्होंने चुप्पी साधे रखी.

उल्लेखनीय है कि बीते शनिवार को शर्मा ने अपनी आधार संख्या जारी कर हैकरों को उन्हें नुकसान पहुंचाने की चुनौती दी थी. इसके बाद कई लोगों ने उनसे जुड़ी जानकारियां साझा की और कईयों ने उन्हें ट्रोल किया. हालांकि, शर्मा इस विवाद में खुद को एक ‘विजेता’ के तौर पर देखते हैं।



उनके कुछ फैसलों को लेकर दूरसंचार उद्योग से की गई ‘उचित आलोचना’ को वह अपनी तरक्की के तौर पर देखते हैं.
गौरतलब है कि दूसरे नेटवर्क पर कॉल जुड़ने की दर में कमी, पॉइंट ऑफ इंटरकनेक्ट की संख्या, नई कंपनी जियो के मुफ्त कॉल की शुरुआती पेशकश को अनुमति देने और बाजार बिगाड़ू मूल्य निर्धारण नियम से जुड़े अपने फैसलों को लेकर शर्मा को दूरसंचार उद्योग की काफी आलोचना का सामना करना पड़ा था.

शर्मा ने कहा, ‘‘पक्षपात का निराधार आरोप लगाना अच्छी बात नहीं है. हां उचित आलोचना सही है. लेकिन पक्षपाती होने के बेसिरपैर के आरोप सही नहीं है.’’

ट्राई के चेयरमैन ने कहा कि यदि किसी पक्ष को नियामक के निर्णय सही नहीं लगते हैं तो वह कानूनी रास्ता अख्तियार कर सकता है. इसलिए उनका मानना है कि आलोचना करने और आरोप लगाकर उसे प्रचार का मुद्दा बनाने से बेहतर है कि सही कानूनी मंच पर वह पक्ष अपनी बात रखे. कई पक्ष बहुत से मसलों पर अपनी चिंताओं को लेकर अदालत गए और अदालत ने उन पर अपना फैसला दिया.

आरोपों से विचलित होने के प्रश्न पर शर्मा ने कहा कि निश्चित तौर पर यह परेशान करते हैं. साथ ही निराधार आरोप संस्थान की गरिमा को भी ठेस पहुंचाते हैं.

शर्मा ने कहा कि ग्राहक हित के प्रति ट्राई के ज्यादा दृढ़ रहने का यह मतलब कतई नहीं कि वह उद्योग के खिलाफ काम कर रहा है. संस्थान एक ढांचे के तहत काम करता है और हम उसे बहुत ज्यादा खींच नहीं सकते.

उल्लेखनीय है कि इस महीने की शुरुआत में दूरसंचार सेवाप्रदाता कंपनियों के संगठन सीओएआई ने मौजूदा दूरसंचार नियामक से नाराजगी जताते हुए कहा था कि नया ट्राई प्रमुख और नियामक ऐसा होना चाहिए जो अपने अधिकार क्षेत्र और सीमाओं को समझता हो. उन्हें उद्योग और ग्राहक कल्याण के बीच संतुलन रखना चाहिए.
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