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इन दो खामियों की वजह से लेट हो गई ट्रेन-18 की लॉन्चिंग

भारत की सबसे आधुनिक ट्रेन टी-18 के अंदर की फोटो
भारत की सबसे आधुनिक ट्रेन टी-18 के अंदर की फोटो

दरअसल, इस ट्रेन में खानपान की वस्तुओं को रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है. जिसपर आईआरसीटीसी ने आपत्ति दर्ज़ की है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 10, 2019, 9:46 PM IST
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भारत की सबसे आधुनिक ट्रेन टी-18 अब तक पटरियों पर नहीं उतर पाई है. ट्रेन ने ट्रायल के दौरान 180 किलोमीटर प्रति/घंटे की रफ़्तार दिखाकर हर किसी को चौंका दिया है. लेकिन, ट्रेन के इलेक्ट्रिक सर्किट से लेकर खानपान की सुविधाओं के लिए जगह के अभाव में यह ट्रेन आज तक चल नहीं पाई है. पहले 25 दिसंबर, फिर 29 दिसंबर और अब मकर संक्रांति पर ट्रेन-18 के शुरू होने की ख़बर भी पूरी होती नहीं दिख रही है.

दरअसल, इस ट्रेन में खानपान की वस्तुओं को रखने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है. जिसपर IRCTC ने आपत्ति दर्ज़ की है. IRCTC ही ट्रेनों में खानपान की व्यवस्था करता है. ट्रेन 18 को शताब्दी एक्सप्रेस के तौर पर दिल्ली से बनारस के बीच चलाया जाना है. लेकिन खान पान की वस्तुओं को रखने के लिए इसमें शताब्दी के मुकाबले महज़ 25% जगह है. ऐसे में खानपान की वस्तुओं को टॉयलेट के पास रखना बड़ी मज़बूरी हो सकती है.

सूत्रों की मानें तो आईआरसीटीसी ने खाने के सामान को टॉयलेट के पास रखने से मुसाफिरों की नाराज़गी के मुद्दे को उठाया है. रेलमंत्री पीयूष गोयल का कहना है, 'किसी ने सुझाव दिया है और यह सुझाव बेहतरी के लिए है तो हम उसका स्वागत करते हैं.' अब समाधान के तौर पर इसके हर कोच से दो सीट्स हटाकर वहीं खानपान की वस्तुओं को रखने के लिए जगह बनाने का सुझाव है. या फिर खानपान की वस्तुओं को ट्राली पर रखकर उसे सर्व करने का विकल्प भी रेलवे के पास है.




ट्रेन-18 के साथ एक और मसला इसका इलेक्ट्रिक सर्किट है. रोलिंग स्टॉक या चलती हुई ट्रेन के इलेक्ट्रिक सर्किट को लेकर रेलवे के कुछ नियम हैं और सूत्रों की माने तो टी-18 इस मामले में पूरी तरह फिट नहीं है. इसलिए फिलहाल इसके इलेक्ट्रिक सर्किट को भी ठीक करने का काम चल रहा है. भारतीय रेल इस ट्रेन को दिल्ली से बनारस के बीच चलाने का प्लान कर चुका है और इसे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी हरी झंडी दिखाने वाले हैं.

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यूरोपीयन लुक, सबसे तेज़ रफ़्तार ट्रेन, बुलेट ट्रेन का भारतीय रूप और न जाने कितने नामो और तमगो से नवाज़ा गया ट्रेन-18 को. इस ट्रेन ने 180 किलोमीटर प्रति/घंटे की रफ़्तार पकड़कर यह भी दिखा दिया कि भारत में ट्रेन सफर का अनुभव बदलने वाला है. लेकिन, रेलवे फिलहाल इसपर उठे सारे सवालों का समाधान ढूंढने में लगा है. तब तक ट्रेन 18 पटरियों पर आने का इंतजार करती रहेगी और मुसाफिर ट्रेन 18 में सफर का.



हालांकि इन सबका फायदा भी भारतीय रेल को मिल रहा है. दरअसल, इस ट्रेन को दिल्ली से बनारस के बीच 110 किलोमीटर की स्पीड से चलाने को मंज़ूरी दी गई है. लेकिन मौजूदा समय में कुहरे को ध्यान में रखकर रेलवे कई तरह के स्पीड रिस्ट्रिक्शन्स रखता है और ऐसे में टी-18 का 8 घंटे में दिल्ली से बनारस पहुंचना संभव नहीं होगा. संभव है जबतक ट्रेन 18 चलने के लिए पूरी तरह फिट हो तब तक कोहरे का असर कम या ख़त्म हो जाए और ट्रेन-18 अबने सफर को समय पर पूरा कर ले.

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