कोरोना वायरस: 12 अगस्त तक सभी सामान्य रेल सेवाएं बंद, सिर्फ स्पेशल ट्रेनें चलेंगी

रेलवे ने सभी सामान्य ट्रेनों पर 12 अगस्त तक रोक लगा दी है.

भारतीय रेलवे (Indian Railways) की ओर से बताया गया है कि स्पेशल राजधानी/मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें जो कि 12 मई से 1 जून के बीच चल रही थीं वह चलती रहेंगी.

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    नई दिल्ली. देश में लगातार बढ़ते कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामलों के चलते 12 अगस्त तक सभी सामान्य रेल सेवाओं (Train Services) को बंद कर दिया गया है. भारतीय रेलवे (Indian Railways) की ओर से गुरुवार को एक आदेश जारी कर इसकी जानकारी दी गई. आदेश में कहा गया कि सभी सामान्य पैसेंजर सर्विस ट्रेनें जिसमें मेल और एक्सप्रेस ट्रेनें शामिल हैं वह 12 अगस्त तक बंद की जा रही हैं. टिकट की कैंसिलेशन से जुड़े आदेश पहले जारी किए गए हैं उसी के अनुसार सामान्य समय सारणी के हिसाब से 30 जून 2020 तक बुक किये गए सभी टिकट्स के रीफंड किए जाएंगे. वहीं 01-07-2020 से 12-08-2020 तक के सभी टिकट कैंसिल किए जाएंगे और आदेश के मुताबिक इन सभी का फुल रीफंड किया जाएगा.रेलवे की ओर से बताया गया है कि स्पेशल राजधानी/मेल/एक्सप्रेस ट्रेनें (Special Rajdhani/Mail/Express Trains) जो कि 12 मई से 1 जून के बीच चल रही थीं वह चलती रहेंगी.

    बता दें कोविड-19 (Covid-19) के कारण लगाए गए लॉकडाउन (Lockdown) के चलते देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे लोगों को घर पहुंचने की सुविधा देने के लिए 12 मई से 15 जोड़ी राजधानी ट्रेनों की शुरुआत की थीं. ये ट्रेनें राज्यों की राजधानियों या फिर बड़े स्टेशनों के लिए चलाई गई थीं. ट्रेनों की शुरुआत करने से पहले रेलवे की ओर से एसओपी जारी की गई थी जिसके हिसाब से सिर्फ बिना लक्षण वाले यात्रियों को ही यात्रा करने की छूट दी जा रही थी. इसके बाद रेलवे ने अन्य यात्रियों को सुविधा देने के लिए एक जून से 100 जोड़ी नॉन एसी ट्रेनें चलाना शुरू की थीं. जिसे रेलवे ने 12 अगस्त तक बंद करने का फैसला किया है.

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    प्रवासी मजदूरों के लिए चलाई गईं ट्रेनें
    बता दें भारतीय रेलवे ने देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूरों (Migrant Labourers) के लिए स्पेशल श्रमिक ट्रेनों की शुरुआत की थी. आखिरी अपडेट तक रेलवे एक मई से लेकर अब तक 4,436 श्रमिक स्पेशल ट्रेन चला चुका है और 62 लाख से अधिक प्रवासी मजदूरों को उनके घर पहुंचा चुका है.

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    रेलवे ने इसे लेकर जानकारी दी थी कि श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में यात्रा करने वाले लोगों का औसतन प्रति व्यक्ति 600 रुपये किराया है और संकेत दिया था कि एक मई से 60 लाख प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाकर रेलवे ने लगभग 360 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है. इसने यह भी कहा था कि रेलवे ने श्रमिक स्पेशल ट्रेनों में प्रति यात्री 3,400 रुपये खर्च किए और इन ट्रेनों को चलाने में लगभग 2,040 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. इन ट्रेनों को चलाने का खर्च केंद्र और राज्यों द्वारा क्रमश: 85-15 प्रतिशत फॉर्मूले के आधार पर वहन किया जा रहा है.

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