सूचना अधिकारी ने पेश की पारदर्शिता की मिसाल, RTI मामले पर सुनवाई का कर दिया लाइव प्रसारण

राहुल सिंह पिछले साल मध्य प्रदेश सूचना आयोग में नियुक्त किए गए एक सूचना आयुक्त हैं

राहुल सिंह, पिछले साल मध्य प्रदेश सूचना आयोग (Madhya Pradesh information commission) में नियुक्त किए गए एक सूचना आयुक्त (IC) हैं. इससे पहले वे दो दशकों तक प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पत्रकारिता (Journalism) कर चुके हैं. वे अब आरटीआई कानून (RTI Act) से जुड़ी रूढ़ियों को तोड़ रहे हैं.

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    (विवेक त्रिवेदी)

    भोपाल. पारदर्शिता (Transparency) कागज के टुकड़ों पर टिकी रहने वाली चीज है और माना जाता है कि उनके चारों ओर लिपटा हुआ लाल फीता (Red Tape) अब अतीत की बात हो चुका है. और इसका महत्वपूर्ण श्रेय मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के पत्रकार से एक सूचना आयुक्त (information commissioner) बने एक अधिकारी को जाना चाहिए जिन्होंने बुधवार को एक अपील की सुनवाई को लाइव-स्ट्रीमिंग करके आरटीआई कानून (RTI Act) में पारदर्शिता के एक नए आयाम को जोड़ा. यह पहला उदाहरण था जब किसी सूचना आयुक्त ने पारदर्शिता को बढ़ावा देने के लिए सुनवाई के दौरान की कार्यवाही का लाइव प्रसारण (live streaming) किया.

    राहुल सिंह, पिछले साल मध्य प्रदेश सूचना आयोग (Madhya Pradesh information commission) में नियुक्त किए गए एक सूचना आयुक्त (IC) हैं. इससे पहले वे दो दशकों तक प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में पत्रकारिता (Journalism) कर चुके हैं. वे अब आरटीआई कानून से जुड़ी रूढ़ियों को तोड़ रहे हैं. बुधवार को उन्होंने कथित 300 करोड़ रुपये के पंचायत कराधान घोटाले (panchayat taxation scam) के सिलसिले में रीवा के चार सार्वजनिक सूचना अधिकारियों (PIO) को कारण बताओ नोटिस पर सुनवाई की लाइव-स्ट्रीमिंग की.

    इससे पहले वॉट्सऐप कॉल पर सुनवाई कर लगा चुके हैं जुर्माना
    इस मामले में जो सूचना मांगी गई थी, उसे अभी तक नहीं दिया गया है क्योंकि इसके लिए डाली गई आरटीआई (RTI) कई महीनों से जिला पंचायत कार्यालय और जिले की विभिन्न जनपद पंचायत कार्यालयों के बीच चक्कर काट रही है.

    सूचना आयुक्त ने पहले ही 17 अगस्त को वॉट्सऐप कॉल पर सुनवाई की थी और मामले में 4 पीआईओ को 25,000 रुपये के कारण बताओ नोटिस जारी किया था और उन्हें बुधवार को अपना पक्ष प्रस्तुत करने का मौका दिया था.

    "कोविड के दौर में सामाजिक दूरी की जरूरत समझ ऐसा करना जरूरी"
    News18 से बात करते हुए, सिंह ने कहा कि लाइव-स्ट्रीमिंग आरटीआई को अधिक पारदर्शी बनाने के उनके प्रयासों का हिस्सा थी. सिंह ने कहा, "कई बार, आवेदकों का दावा होता है कि उनके विवाद की सुनवाई पर ध्यान नहीं दिया गया. और दूसरी ओर सरकारी अधिकारियों का कहना होता है कि उनके तर्कों को ठीक से नहीं लिया और इस वजह से उन्हें दंडित किया गया." लंबे समय से आरटीआई को वॉट्सऐप और ट्विटर स्वीकार करते आ रहे सिंह ने कहा, खासकर कोविड-19 संकट के दौरान जब सामाजिक दूरी समय की जरूरत है, ऐसा किया जाना चाहिए.

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    वॉट्सऐप पर नोटिस जारी करने वाले और संबंधित अधिकारियों को ईमेल पर प्रतियां भेजने वाले सिंह ने कहा कि लाइव-स्ट्रीमिंग हितधारकों की अपील-संबंधी शिकायतों को दूर करने का एक जरिया हो सकता है. सिंह ट्विटर पर बहुत सक्रिय हैं और उन्होंने इसे आरटीआई आवेदकों के प्रश्नों और समस्याओं पर जवाब देने के लिए एक जरिया बनाया हुआ है.

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