लोकसभा: रविशंकर प्रसाद बोले- मैं मोदी सरकार का कानून मंत्री, राजीव गांधी का नहीं

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पीड़ित महिलाएं पुलिस के पास जाती थीं, लेकिन पुलिस के पास कार्रवाई का हक नहीं है. ऐसी महिलाओं को क्‍या सड़क पर छोड़ दें.

News18Hindi
Updated: July 25, 2019, 7:44 PM IST
लोकसभा: रविशंकर प्रसाद बोले- मैं मोदी सरकार का कानून मंत्री, राजीव गांधी का नहीं
कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पीड़ित महिलाएं पुलिस के पास जाती थीं, लेकिन पुलिस के पास कार्रवाई का हक नहीं है. ऐसी महिलाओं को क्‍या सड़क पर छोड़ दें.
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Updated: July 25, 2019, 7:44 PM IST
लोकसभा के मानसून सत्र में गुरुवार को ट्रिपल तलाक बिल दिन भर चली बहस के बाद पास हो गया. इस बिल के पक्ष में 303 और विपक्ष में 82 वोट पड़े. कांग्रेस, डीएमके, एनसीपी, टीडीपी और जेडीयू ने इस बिल का विरोध किया था. इस दौरान कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सदन के सभी सदस्‍यों का आभार जताया.

रविशंकर प्रसाद ने कहा, 'यह बिल महिलाओं के लिए लाया गया है. इसलिए महिला सदस्‍यों को विशेष आभार जताता हूं.' उन्‍होंने कहा कि यह बिल मुस्लिमों के लिए इसलिए लाया गया, क्‍योंकि तीन तलाक केवल वहीं है. कहीं और होता तो उनके लिए भी लाया जाता. सदन को इस बिल पर तीसरी बार चर्चा करनी पड़ रही है. उन्‍होंने कहा कि कुछ लोग कानून की निगरानी में नहीं, बल्कि कानून को रोकने के लिए यहां पर हैं.

रविशंकर प्रसाद बोले- मैं मोदी सरकार का कानून मंत्री

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पीड़ित महिलाएं पुलिस के पास जाती थीं, लेकिन पुलिस के पास कार्रवाई का हक नहीं है. ऐसी महिलाओं को क्‍या सड़क पर छोड़ दें. उन्‍होंने कहा कि मैं मोदी सरकार का कानून मंत्री हूं राजीव गांधी का कानून मंत्री नहीं.

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अगर 1986 में ही यह काम हो जाता तो आज इस बिल की जरुरत ही नहीं पड़ती. इसमें भी समझौते का विकल्‍प खुला हुआ है. हमनें हिंदुओं पर जब आपराधिक कानून बनाया तो किसी को दिक्‍कत क्‍यों नहीं हुई? दहेज और घरेलू हिंसा के लिए भी कानून है.



रविशंकर प्रसाद बोले- पैगम्‍बर साहब ने भी इसे गलत माना
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रविशंकर प्रसाद ने कहा कि पैगम्‍बर साहब ने भी तीन तलाक को गलत माना था. उन्‍होंने कहा कि ओवैसी साहब अगर पीड़ित महिलाओं के हक में बात करते तो अच्‍छा लगता. क्‍योंकि मैं उन्‍हें इस्‍लाम का जानकार मानता हूं.

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दो जजों ने तीन तलाक को गलत बताया और एक ने कहा कि अगर कुरान में गलत है तो कानून में कैसे सही माना जा सकता. संसद को किसी बिल पर कानून लाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देशे की जरुरत नहीं है. संसद कानून लाने में सक्षम है. मोदी सरकार तीन तलाक बिल की पीडि़त महिलाओं के साथ खड़ी रहेगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह फैसला किया है.

तीन तलाक पर कांग्रेस के पैर डगमगा रहे- प्रसाद

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस सदन में महिला अधिकारों से जुड़े कानून पहले भी पारित हो चुके हैं. दहेज कानून सभी धर्मों में लागू होते हैं, यह कानून कांग्रेस लेकर आई थी. उन्‍होंने कहा कि शाहबानों के मामले में कांग्रेस के कदम क्‍यों डबमगाने लगते हैं. जबकि 400 से ज्‍यादा का संख्‍याबल था.



प्रसाद ने कहा कि तीन तलाक को तो गलत बताते हैं, लेकिन, साथ ही वोट बैंक की चिंता भी करते हैं. तीन तलाक बिल पर फिर कांग्रेस के पांव हिल रहे हैं. शरिया वाले देशों ने भी तीन तलाक को बैन किया है, हम तो फिर भी संक्‍युलर हैं.

तीन तलाक से नहीं टूटेगी शादी

रविशंकर प्रसाद ने कहा कि इस बिल के अनुसार पत्‍नी को सुनने के बाद बेल पर फैसला इसलिए लिया जाएगा क्‍योंकि उससे समझौता का अवसर खुलेगा. अगर कोई उस वक्‍त तीन तलाक न देने की बात कबूलेगा तो उसे छोड़ दिया जाएगा. अगर वे अपने तीन तलाक पर कायम रहता है, तो जेल में रहेगा. उन्‍होंने कहा कि तीन तलाक पर शादी नहीं टूटती है, इसलिए जेल में सजा काटते हुए भी पति को गुजारा भत्‍ता देने का प्रावधान किया गया है.

रविशंकर प्रसाद- बदलाव का असर दिखेगा

कानून मंत्री ने कहा कि चुनाव में हमें मुस्लिमों का वोट कम ही मिलता है लेकिन जब जीतते हैं तो 'सबका साथ सबका विकास' की बात करते हैं. अपराध करने पर मुआवजा देने के प्रावधान पर सवाल उठाए गए, लेकिन जब मुस्लिम पति जेल जाता है, तो यह सवाल क्‍यों नहीं उठता है.



रविशंकर प्रसाद ने कहा कि हिंदू धर्म में भी ऐसे बदलाव किए गए, अब जिसका असर भी दिख रहा है. कुप्रथाएं बंद हो गई हैं. पीड़ित महिलाएं क्या स्टेक होल्डर नहीं हैं, सिर्फ उन्हें ही इसका हक है. मुस्लिम महिलाएं इस सदन की ओर आज बड़ी उम्‍मीद से देख रही हैं. इसलिए इस बिल को सभी मिलकर पारित करें.

प्रसाद ने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे बताएं कि मुस्लिम महिलाओं के लिए उन्‍होंने क्‍या किया है. बधाई देते हुए प्रसाद ने कहा कि इस कानून के बाद हमारी ईद और 15 अगस्‍त आज ही है. यह सवाल धर्म, वोट और पूजा का नहीं, बल्कि नारी न्‍याय, गरिमा और सम्‍मान का है.

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कानून मंत्री ने कहा कि ऐसा कौन सा धर्म है तो बेटियों के साथ नाइंसाफी करने के लिए कहता है. संविधान में हर धर्म के लिए कानून है फिर चाहते हिंदू हो या पारसी. अगर कोई कानूनी तौर पर तलाक देता है, तो इससे किसी को दिक्‍कत नहीं है. अगर लोग नियमों का पालन करेंगे तो उन्‍हें अपराधी नहीं कहा जाएगा.

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First published: July 25, 2019, 7:44 PM IST
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