तीन तलाक कानून पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, मांगा जवाब

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Updated: August 23, 2019, 11:42 AM IST
तीन तलाक कानून पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस, मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. Triple Talaq Law के खिलाफ तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर हुई हैं.

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. Triple Talaq Law के खिलाफ तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर हुई हैं.

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मोदी सरकार (Modi Government)के दूसरे कार्यकाल के दौरान संसद (Parliament) के पहले सत्र में पास हुए ट्रिपल तलाक के कानून (Law On Triple Talaq) को सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में चुनौती दी गई है.

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. मुस्लिम समुदाय में तीन तलाक को दंडात्मक अपराध बनाने वाले कानून की वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर उच्चतम न्यायालय विचार करने के लिए सहमत हो गया है.

इस कानून के खिलाफ तीन अलग-अलग याचिकाएं दायर हुई हैं. शुक्रवार को जस्टिस एनवी रमण (Justice Nv Ramana) की कोर्ट ने तीन याचिकाओं पर सुनवाई के बाद केंद्र को नोटिस दिया, जिसमें 'द मुस्लिम वीमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज) एक्ट, 2019 (The Muslim Women (Protection of Rights on Marriage) Bill, 2019) (ट्रिपल तालक कानून) की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी गई थी, जो तत्काल ट्रिपल तलाक को  अपराध मानता है.

बेंच ने सलमान खुर्शीद से कहा- 

पीठ ने वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद (Salman Khurshid) से कहा, 'हम इसकी जांच करेंगे.' खुर्शीद ने पीठ को बताया कि इस प्रथा को दंडनीय अपराध बनाने और तीन साल तक की जेल की सजा सहित कई आयाम हैं, जिनकी शीर्ष अदालत द्वारा जांच की जानी जरूरी थी. कोर्ट ने याचिकाओं को स्वीकार करते हुए और सरकार और विभिन्न मंत्रालयों को नोटिस जारी करते हुए दहेज से निपटने वाले कानूनों का उदाहरण दिया.

गुरुवार इस कानून की वैधता को चुनौती देने वाली नयी याचिका जमीयत उलमा-ए-हिन्द (Jamiat Ulema-e-Hind) ने दायर की है. याचिका में कहा गया है कि इस कानून से संविधान के प्रावधानों का कथित रूप से उल्लंघन होता है. याचिका में मुस्लिम महिला (विवाह में अधिकारों का संरक्षण) कानून, 2019 को अंसवैधानिक घोषित करने का अनुरोध किया गया है.

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यह याचिकाएं भी दायर

वकील एजाज मकबूल के माध्यम से दायर इस याचिका में दावा किया गया है कि चूंकि मुस्लिम शौहर द्वारा बीवी को इस तरह से तलाक देने को पहले ही ‘अमान्य और गैरकानूनी’ घोषित किया जा चुका है, इसलिए इस कानून की कोई जरूरत नहीं है. इससे पहले, केरल में सुन्नी मुस्लिम विद्वानों और धार्मिक नेताओं के संगठन ‘समस्त केरल जमीयुल उलेमा’ ने इस कानून को असंवैधानिक घोषित करने का अनुरोध करते हुये इसकी संवैधानिकता को चुनौती दी थी.

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First published: August 23, 2019, 11:24 AM IST
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