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'अनाप-शनाप बयानों के बाद अब बिप्लब देब को चाहिए मन की शांति'

News18Hindi
Updated: May 14, 2018, 11:49 PM IST
'अनाप-शनाप बयानों के बाद अब बिप्लब देब को चाहिए मन की शांति'
त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब देब

बिप्लब कुमार देब ने निंदकों और ट्रॉल से बचते हुए अपनी साख को बेहतर बनाने का फैसला लिया है. उन्होंने कहा, "अगर आप सकारात्मक अंदाज में सोचते हैं तो अपने आप आपकी ओर से किए गए काम सकारात्मक होते हैं.

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सुजीत नाथ

पिछले दिनों अनाप-शनाप बयानों को लेकर सुर्खियों में रहे त्रिपुरा के मुख्यमंत्री बिप्लब कुमार देब अब अपने मन की शांति की तलाश में हैं. उनका कहना है कि वह सकारात्मक ऊर्जा पाने के लिए ध्यान लगाने की योजना बना रहे हैं. फोन पर न्यूज18 से बातचीत करते हुए देब ने कहा, "मैं हर रोज सुबह ध्यान लगाने की योजना बना रहा हूं. इससे सकारात्मक ऊर्जा उत्पन्न होगी जिससे मुझे बेहतर तरीके से सेवा करने में मदद मिलेगी.” गौरतलब है कि बिप्लब देब पिछले एक महीने से अपने बयानों को लेकर सुर्खियों में हैं. उन्होंने इस दौरान डायना हेडन के मिस वर्ल्ड खिताब पर सवाल उठाने के साथ महाभारत काल में इंटरनेट की मौजूदगी का दावा किया और इस तरह से वह सुर्खियों में छाए रहे.

बीजेपी मुख्यमंत्री ने निंदकों और ट्रॉल से बचते हुए अपनी साख को बेहतर बनाने का फैसला लिया है. उन्होंने कहा, "अगर आप सकारात्मक अंदाज में सोचते हैं तो अपने आप आपकी ओर से किए गए काम सकारात्मक होते हैं. मैं हाल ही में प्रजापिता ब्रम्हाकुमारी की ओर से आयोजित किए गए कार्यक्रम में शामिल हुआ और उसके बाद ही मैंने हर दिन योग और ध्यान लगाने का फैसला लिया ताकि मैं अपने भीतर ऊर्जा, शांति और अंदरूनी शक्ति प्राप्त कर सकूं."

उन्होंने दावा किया कि इसका मकसद लोगों की भलाई है, देब ने कहा, "मुझे त्रिपुरा के लोगों ने चुना है और अब यह मेरी जिम्मेदारी है कि मैं उनकी सेवा बेहतर तरीके से करूं."



प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सेहतमंद जीवनशैली का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, "हमारे प्रधानमंत्री सिर्फ चार घंटे सोते हैं और बाकी समय में वह भारत के लिए कठिन मेहनत करते हैं. यह सिर्फ ध्यान और योग के कारण ही संभव है. जिस तरह की सकारात्मक ऊर्जा उनमें है वह प्रशंसा योग्य है. हम इस बात को लेकर खुश हैं कि वह योग को सिर्फ भारत में ही नहीं बल्कि दुनिया के कोने-कोने में प्रचारित कर रहे हैं. बहरहाल, मैंने योग को अपने राज्य के सारे स्कूलों में शामिल करने का निश्चिय किया है."

अपनी विकास की योजना और सामने मौजूद चुनौतियों को लेकर देब ने कहा, "मेरा सपना है नए त्रिपुरा के साथ एक शांत समाज का निर्माण. ड्रग्स, शराब और महिलाओं के खिलाफ अत्याचार त्रिपुरा की सबसे बड़ी समस्याए हैं और मैंने इनका सफाया करने के लिए चुनौती को स्वीकार कर लिया है."

उन्होंने आगे कहा, "मैंने त्रिपुरा में बीपीओ और आईटी हब बनाने का निश्चय किया है और मैं इसके लिए अपने यूनियन मिनिस्टर रवि शंकर प्रसाद का शुक्रगुजार हूं जो हमें इस प्रोजेक्ट के लिए हर संभव मदद दे रहे हैं. यही नहीं बल्कि हम 24 एकल विद्यालयों को बनाने की भी योजना बना रहे हैं और ऐसे ही 16 विद्यालयों को आदिवासी क्षेत्रों में बनवाने की भी योजना बना रहे हैं. ये बोर्डिंग स्कूल होंगे और हर स्कूल को बनवाने में 1 करोड़ रुपये खर्च होंगे."

मुख्यमंत्री ने कहा, "दूसरी चुनौती है उन युवाओं को वापस प्रदेश में लाना जो विकास और नौकरी के मौके न होने के कारण बाहर चले गए. जनता दरबार में, एक युवा जो चेन्नई में एक आईटी कंपनी में (1 लाख रुपये सैलरी के साथ) काम कर रहा था, उसने मुझे कहा कि वह अपने घर लौटना चाहता है और अगर उसे वहां 25 हज़ार से कम की सैलरी भी मिले तो मंजूर होगी. मुझे यह रवैया बहुत पसंद आया. उसके जैसे कई हैं जो वापस लौटना चाहते हैं, इसलिए यह मेरी जिम्मेदारी है कि उन्हें यहां नौकरी मुहैया कराई जाए."

देब ने इस ओर इशारा किया कि वह भविष्य में शायद शराब पर बैन लगा सकते हैं. उन्होंने कहा, "मैं त्रिपुरा को नशा मुक्त बनाना चाहता हूं." जब उनसे अलग त्रिपुरालैंड बनाने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा, "मैं इन बातों पर विश्वास नहीं करता. अलग से त्रिपुरालैंड कभी नहीं बनेगा. हम पहले से ही स्वदेशी समुदायों के लिए  सामाजिक-आर्थिक, शैक्षिक, भाषाई और राजनीतिक विकास के आधार पर न्यूनतम साझा कार्यक्रम की योजना बना चुके हैं. हम अलग से राज्य बनाने के बजाय आदिवासी इलाकों में विकास पर ज्यादा ध्यान दे रहे हैं."

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First published: May 14, 2018, 11:26 PM IST
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