राम माधव: हमारी असली लड़ाई त्रिपुरा में है, माणिक सरकार ने अपनी झूठी छवि बनाई है

राम माधव ने बताया कि उनकी पार्टी त्रिपुरा में माणिक सरकार के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश में है.

News18Hindi
Updated: February 15, 2018, 1:35 PM IST
राम माधव: हमारी असली लड़ाई त्रिपुरा में है, माणिक सरकार ने अपनी झूठी छवि बनाई है
राम माधव ने बताया कि उनकी पार्टी त्रिपुरा में माणिक सरकार के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश में है.
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Updated: February 15, 2018, 1:35 PM IST
((सुहास मुंशी))

त्रिपुरा, मेघालय और नगालैंड में इसी महीने विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. उत्तर-पूर्व के इन चुनावों में पहली बार बीजेपी अपनी पैठ जमाने की कोशिश में है. इन राज्यों  में होने वाले चुनाव पर बीजेपी के महासचिव राम माधव ने न्यूज़ 18 से खास बातचीत की. राम माधव ने बताया कि उनकी पार्टी त्रिपुरा में माणिक सरकार के गढ़ में सेंध लगाने की कोशिश में है. साथ ही राम माधव ने कहा कि बीजेपी 'कांग्रेस मुक्त' अभियान में लगातार आगे बढ़ रही है. पेश है इस बातचीत के कुछ खास अंश

उत्तर पूर्व के ज्यादातर हिस्सों में आपलोगों का मुद्दा भ्रष्टाचार है. क्या आपको लगता है कि त्रिपुरा जैसे राज्य में जहां माणिक सरकार की छवी एक ईमानदार मुख्यमंत्री के तौर पर है ऐसे में क्या वहां आप लोग एक अलग रणनीति के साथ चुनाव लड़ेंगे ?

त्रिपुरा में CPI (M) ने अपनी एक झूठी छवि बनाई है. मुख्यमंत्री माणिक सरकार सिर्फ एक मुखौटा है. वास्तव में वहां माणिक सरकार 'हिंसाचारी', अत्याचार (दमनकारी) और भ्रष्टाचारी सरकार चला रहे हैं. पिछले कुछ सालों से त्रिपुरा के लोगों ने हिंसक राजनीति, दमनकारी और बड़े पैमाने पर भ्रष्ट प्रशासन को झेला है. इसलिए हमने लोगों को हिंसाचारी, अत्याचारी और भ्रष्टाचारी सरकार से मुक्त करने का वादा किया है. हमलोग इस क्षेत्र में शांति और विकास ले कर आएंगे.

नगालैंड में शुरूआत में बीजेपी ने मतदान का बहिष्कार किया था. लेकिन आपलोगों ने ही सबसे पहले बायकॉट को खत्म किया. क्या आपको लगता है कि बायकॉट का फैसला काफी हद तक अलोकप्रिय और अप्रभावी था?

देखिए नगालैंड में मतदान का बहिष्कार नगा लोगों के हित में था. वे नगा समस्या का हल चाहते थे. बीजेपी नगा समस्या के समाधान के लिए एनएससीएन (आईएम) के साथ सरकार द्वारा उठाए गए पहल का पूरी तरह से समर्थन करती है. हम नगा समस्या के समाधान के पक्ष में हैं, लेकिन इसे चुनावों से जोड़ा नहीं जा सकता है. चुनाव एक संवैधानिक प्रक्रिया है राज्य और केंद्र सरकार इसके लिए बाध्य है.

आप लोग नॉर्थ-ईस्ट को 'कांग्रेस मुक्त' देखना चाहते हैं. तो इस चुनाव के बाद आपलोग इस लक्ष्य के कितने करीब पहुंच जाएंगे ?

कांग्रेस सिर्फ मेघालय में है. जबकि त्रिपुरा और नागालैंड में कांग्रेस का कोई वजूद नहीं है. हमें पूरी उम्मीद है कि नागालैंड में हमारी वापसी होगी. त्रिपुरा में हम सीपीआई (एम) के लगातार जीत के रिकॉर्ड पर भी लगाम लगाना चाहते हैं. इस बार हम वहां अपने सहयोगी दल आईपीएफटी की मदद से सरकार बनाने में सक्षम होंगे. और जहां तक मेघालय की बात है निश्चित रूप से वहां एक गैर-कांग्रेसी सरकार होगी.

नगालैंड में दोनों एनडीपीपी और एनपीएफ आपके साथ मिलकर चुनाव लड़ना चाहती थी. आखिरकार आपने एनडीपीपी के साथ क्यों हाथ मिलाया ? जबकि बाक़ी पुराने दलों को आपने छोड़ दिया ?

देखिए सीटों का बंटवारा जरुरी था. एनपीएफ के साथ हमारे संबंध पुराने थे. लेकिन सीटों को लेकर हमारी बातचीत किसी नतीजे पर नहीं पहुंची. नतीजा हमें दूसरी क्षेत्रीय पार्टी के साथ गठबंधन करना पड़ा.

नॉर्थ-ईस्ट के तीनों राज्यों में सबसे ज्यादा मुश्किल मुकाबला कहां होने वाला है ?

देखिए हमारी सबसे बड़ी लड़ाई तो त्रिपुरा में है. ये एक ऐसा राज्य है जहां मार्क्सवादी पार्टी का राज पिछले 25 सालों से रहा है. साथ ही मार्क्सवादियों ने चुनावों में हेर-फेर करने की कला में महारत हासिल कर ली है. उनके कार्यकर्ता पुलिस स्टेशन में भी हैं.

त्रिपुरा में आपका साथी, आईपीएफटी, एक अलग राज्य की मांग कर रहा है. क्या आप उनके मांग से सहमत हैं? क्या इस मुद्दे पर दोनों पार्टियों के बीच एक स्पष्टता है? क्या आपको लगता है कि ये एक मुद्दा हो सकता है ?

जब हम एक साथ मिलकर चुनाव लड़ रहे हैं तो हमारे मुद्दे भी एक हैं. हम दोनों एक साथ एकजुट हो कर प्रगतिशील त्रिपुरा के लिए काम करेंगे राज्य के किसी भी विभाजन का कोई सवाल ही नहीं है. त्रिपुरा की क्षेत्रीय अखंडता हम दोनों के लिए सबसे महत्वपूर्ण है. हमने त्रिपुरा के आदिवासियों को आश्वासन दिया है कि उनकी सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक समस्याओं का पूरा ध्यान रखा जाएगा.
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