बंगाल चुनाव में BJP से कैसे लड़ेगी TMC? प्रशांत किशोर के कारण पार्टी में पड़ रही फूट

प्रशांत किशोर को लेकर तृणमूल कांग्रेस के विधायक और नेता ही विरोध कर रहे हैं. (File Photo)
West Bengal Elections: पश्चिम बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं. इन चुनावों के लिए सभी प्रमुख पार्टियां रणनीति बनाने पर काम कर रही हैं. ऐसे में टीएमसी की रणनीति बना रहे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को लेकर पार्टी के भीतर ही विरोधी स्वर मुखर हो रहे हैं.
- News18Hindi
- Last Updated: November 18, 2020, 6:51 PM IST
कोलकाता. पश्चिम बंगाल (West Bengal) में भारतीय जनता पार्टी (Bharatiya Janta Party) और वाम-कांग्रेस ने विधानसभा चुनावों (Assembly Elections) की रणनीति बनाने के लिए मंगलवार को अलग-अलग बैठकें कीं. पश्चिम बंगाल में 2021 में विधानसभा होने हैं जिसमें फिलहाल छह महीने से भी कम का समय बाकी है. राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (Trinamool Congress) के लिए विधानसभा चुनावों की रणनीति बनाने का काम चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर (Prashant Kishore) कर रहे हैं. पार्टी के कुछ विधायक उनके बारे में बातें कर रहे हैं, पिछले हफ्ते किशोर के असंतुष्ट तृणमूल नेता सुवेंदु अधिकारी से मिलने में असफल रहने के बाद ये आवाजें और जोर-शोर से उठने लगीं. अंतिम रिपोर्टों से पता चलता है कि तृणमूल आखिरकार सुवेंदु अधिकारी के करीब पहुंच रही है. माना जाता है कि पार्टी के एक अनाम सांसद ने सोमवार को तृणमूल मंत्री के साथ एक शीर्ष गुप्त बैठक की थी. रिपोर्टों से ऐसा पता चलता है कि फिर से एक उच्च-स्तरीय बैठक आयोजित की जा सकती है.
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिनभर, बीजेपी की मारक क्षमता का प्रदर्शन जारी रहा. दिल्ली से आए शीर्ष नेताओं ने बंगाल को पांच क्षेत्रों में विभाजित किया, जिसमें पार्टी के एक केंद्रीय नेता को प्रत्येक के प्रभारी के रूप में रखा गया. पार्टी के रणनीतिकार सुनील देवधर जिन्होंने लेफ्ट से त्रिपुरा की सत्ता छीन ली थी, ने कहा मैं आश्वस्त हूं कि हम बंगाल में दो-तिहाई बहुमत से जीतेंगे. देवधर को मेदिनीपुर का प्रभार सौंपा गया है. रणबंगा जोन की जिम्मेवारी बिनोद सरकार को दी गई है, उत्तर बंगा की जिम्मेदारी हरीश द्विवेदी, कोलकाता की दुष्यंत गौतम को और नबाद्वीप की जिम्मेवारी बिनोद तवाड़े को दी गई है.
ये जोन इंचार्ज 18,19 और 20 नवंबर को मुलाकात करेंगे और पार्टी के स्तर को देखेंगे. ये इंचार्ज इसकी रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपेगे जो कि पार्टी के मुख्य रणनीतिकार हैं.शाह एक महीने में दूसरी बार कर सकते हैं कोलकाता का दौरा
रिपोर्ट्स के मुताबिक शाह 30 नवंबर को एक बार फिर से कोलकाता आ सकते हैं. अगर वह आते हैं तो यह उनका एक महीने के भीतर दूसरा दौरा होगा. पिछली बार जब शाह कोलकाता आए थे तो उन्होंने बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 200 में जीत दर्ज करने की बात कही थी.
बीजेपी की आईटीसेल के प्रमुख अमित मालवीय जो कि बंगाल में को-ऑब्सर्वर हैं, वह भी इस लक्ष्य को कई बार दोहरा चुके हैं. मालवीय का कहना है कि बंगाल ने मन बना लिया है कि ममता बनर्जी को बाहर कर भाजपा को 200 सीटों पर जीत दिलानी है.
मालवीय के बंगाल आने के बारे में पूछे जाने पर राज्य भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने कहा कि कम से कम हम पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए किराये पर लोगों को नहीं रखते हैं. हमारे लोग पार्टी के कार्यकर्ता हैं जो कि बंगाल में चुनाव के लिए आ रहे हैं."
तृणमूल को पीके के विरोध की चिंता नहीं
तृणमूल को यह पता है कि बीजेपी के चुनाव रणनीतिकारों का इस पर ध्यान है लेकिन उनके नेता बेपरवाह दिखाई दे रहे हैं. तृणमूल के सौगत रॉय का कहना है कि "अमित शाह का लक्ष्य दिन में देखा जाने वाला सपना है जो कि कभी भी पूरा नहीं होगा. उनकी पार्टी जैसा कि वह कहते हैं बिल्कुल तोते जैसी है. उन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है. रॉय बढ़ती संख्या में विधायकों और पार्टी के अन्य नेताओं से प्रशांत किशोर के खिलाफ होने वाली रुकावटों से भी चिंतित नहीं हैं.
विधायक और वरिष्ठ नेता उठा रहे प्रशांत किशोर पर सवाल
मुर्शीदाबाद जिले के तृणमूल विधायक नियामत शेख ने रविवार को एक जनसभा में कहा था कि- क्या हमें प्रशांत किशोर से राजनीति समझने की जरूरत है? कौन हैं पीके? अगर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को नुकसान पहुंचता है तो यह पीके की गलती होगी.
कूच बिहार के विधायक मिहिर गोस्वामी ने भी प्रशांत किशोर को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी और पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से छह हफ्ते पहले इस्तीफा दे दिया था. गोस्वामी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर कई सवाल पोस्ट किए, जिसमें से एक था कि- क्या तृणमूल वाकई अभी भी ममता बनर्जी की पार्टी है?
उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि पार्टी को किसी कॉन्ट्रैक्टर को दे दिया गया है. आईपैक जैसी एक कॉरपोरेट कंपनी पार्टी के संगठनात्मक मामलों पर आदेश देगी और मेरे जैसा वरिष्ठ राजनेता उसे माने, ये काफी दर्दभरा है.

मंगलवार को भी कूच बिहार के सितई के एक और विधायक ने ऐसा ही सवाल उठाया.
एनडीटीवी की एक रिपोर्ट के मुताबिक दिनभर, बीजेपी की मारक क्षमता का प्रदर्शन जारी रहा. दिल्ली से आए शीर्ष नेताओं ने बंगाल को पांच क्षेत्रों में विभाजित किया, जिसमें पार्टी के एक केंद्रीय नेता को प्रत्येक के प्रभारी के रूप में रखा गया. पार्टी के रणनीतिकार सुनील देवधर जिन्होंने लेफ्ट से त्रिपुरा की सत्ता छीन ली थी, ने कहा मैं आश्वस्त हूं कि हम बंगाल में दो-तिहाई बहुमत से जीतेंगे. देवधर को मेदिनीपुर का प्रभार सौंपा गया है. रणबंगा जोन की जिम्मेवारी बिनोद सरकार को दी गई है, उत्तर बंगा की जिम्मेदारी हरीश द्विवेदी, कोलकाता की दुष्यंत गौतम को और नबाद्वीप की जिम्मेवारी बिनोद तवाड़े को दी गई है.
ये जोन इंचार्ज 18,19 और 20 नवंबर को मुलाकात करेंगे और पार्टी के स्तर को देखेंगे. ये इंचार्ज इसकी रिपोर्ट केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को सौंपेगे जो कि पार्टी के मुख्य रणनीतिकार हैं.शाह एक महीने में दूसरी बार कर सकते हैं कोलकाता का दौरा
रिपोर्ट्स के मुताबिक शाह 30 नवंबर को एक बार फिर से कोलकाता आ सकते हैं. अगर वह आते हैं तो यह उनका एक महीने के भीतर दूसरा दौरा होगा. पिछली बार जब शाह कोलकाता आए थे तो उन्होंने बंगाल की 294 विधानसभा सीटों में से 200 में जीत दर्ज करने की बात कही थी.
बीजेपी की आईटीसेल के प्रमुख अमित मालवीय जो कि बंगाल में को-ऑब्सर्वर हैं, वह भी इस लक्ष्य को कई बार दोहरा चुके हैं. मालवीय का कहना है कि बंगाल ने मन बना लिया है कि ममता बनर्जी को बाहर कर भाजपा को 200 सीटों पर जीत दिलानी है.
मालवीय के बंगाल आने के बारे में पूछे जाने पर राज्य भाजपा प्रमुख दिलीप घोष ने कहा कि कम से कम हम पार्टी को आगे बढ़ाने के लिए किराये पर लोगों को नहीं रखते हैं. हमारे लोग पार्टी के कार्यकर्ता हैं जो कि बंगाल में चुनाव के लिए आ रहे हैं."
तृणमूल को पीके के विरोध की चिंता नहीं
तृणमूल को यह पता है कि बीजेपी के चुनाव रणनीतिकारों का इस पर ध्यान है लेकिन उनके नेता बेपरवाह दिखाई दे रहे हैं. तृणमूल के सौगत रॉय का कहना है कि "अमित शाह का लक्ष्य दिन में देखा जाने वाला सपना है जो कि कभी भी पूरा नहीं होगा. उनकी पार्टी जैसा कि वह कहते हैं बिल्कुल तोते जैसी है. उन्हें गंभीरता से लेने की जरूरत नहीं है. रॉय बढ़ती संख्या में विधायकों और पार्टी के अन्य नेताओं से प्रशांत किशोर के खिलाफ होने वाली रुकावटों से भी चिंतित नहीं हैं.
विधायक और वरिष्ठ नेता उठा रहे प्रशांत किशोर पर सवाल
मुर्शीदाबाद जिले के तृणमूल विधायक नियामत शेख ने रविवार को एक जनसभा में कहा था कि- क्या हमें प्रशांत किशोर से राजनीति समझने की जरूरत है? कौन हैं पीके? अगर बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को नुकसान पहुंचता है तो यह पीके की गलती होगी.
कूच बिहार के विधायक मिहिर गोस्वामी ने भी प्रशांत किशोर को लेकर आपत्ति दर्ज कराई थी और पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से छह हफ्ते पहले इस्तीफा दे दिया था. गोस्वामी ने मंगलवार को सोशल मीडिया पर कई सवाल पोस्ट किए, जिसमें से एक था कि- क्या तृणमूल वाकई अभी भी ममता बनर्जी की पार्टी है?
उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है कि पार्टी को किसी कॉन्ट्रैक्टर को दे दिया गया है. आईपैक जैसी एक कॉरपोरेट कंपनी पार्टी के संगठनात्मक मामलों पर आदेश देगी और मेरे जैसा वरिष्ठ राजनेता उसे माने, ये काफी दर्दभरा है.
मंगलवार को भी कूच बिहार के सितई के एक और विधायक ने ऐसा ही सवाल उठाया.