चिदंबरम जैसे हालात में फंसते नजर आ रहे हैं कांग्रेस के पूर्व मंत्री डीके शिवकुमार

News18Hindi
Updated: August 30, 2019, 5:08 PM IST
चिदंबरम जैसे हालात में फंसते नजर आ रहे हैं कांग्रेस के पूर्व मंत्री डीके शिवकुमार
कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम की ही तरह कर्नाटक कांग्रेस में संकटमोचक की भूमिका में रहने वाले डीके शिवकुमार भी अपने सियासी जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं.

कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और कर्नाटक सरकार के पूर्व मंत्री डीकेएस को अगर मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार किया जाता है तो उन्‍हें कुछ दिन जेल में रहना पड़ सकता है. वहीं, कर्नाटक में उनका सियासी करियर अस्‍थायी तौर पर कुछ समय के लिए खतरे में पड़ सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 30, 2019, 5:08 PM IST
  • Share this:
(डीपी सतीश)

कांग्रेस (Congress) के लिए दिल्‍ली में डीके शिवकुमार (DK Shivakumar) की हैसियत पी. चिदंबरम (P. Chidambaram) जैसी नहीं है, लेकिन कर्नाटक (Karnataka) में उनका कद पार्टी में बहुत बड़ा है. कांग्रेस के कद्दावर नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम की ही तरह कर्नाटक कांग्रेस में संकटमोचक की भूमिका में रहने वाले शिवकुमार भी अपने सियासी जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहे हैं. प्रवर्तन निदेशालय (ED) बार-बार उनके दरवाजे पर दस्‍तक दे रहा है. वहीं, कर्नाटक हाईकोर्ट (Karnataka High Court) ने शिवकुमार की ओर से दायर उस याचिका को भी खारिज कर दिया है, जिसमें उन्‍होंने ईडी के समन को खारिज करने की मांग की थी.

खतरे में पड़ सकता है शिवकुमार का सियासी करियर
शिवकुमार ईडी के समक्ष पेश होने के लिए नई दिल्‍ली में मौजूद हैं. अगर शिवकुमार को कथित मनी लॉन्ड्रिंग (Money Laundering) के मामले में गिरफ्तार किया जाता है तो उन्‍हें कुछ समय जेल में ही रहना होगा. वहीं, कर्नाटक में उनका सियासी करियर अस्‍थायी तौर पर खतरे में पड़ सकता है. साथ ही सोमवार को पड़ने वाली गणेश चतुर्थी उनके और उनके परविार के लिए कड़वे अनुभव ला सकती है. दिल्‍ली के लिए रवाना होने से पहले डीकेएस ने कहा कि न तो उन्‍होंने किसी का रेप किया है और न ही किसी से घूस ली है. ये पैसों से जुड़ा छोटा सा मामला है.

गौड़ा परिवार से सियासी टकराव के सुनाए जाते हैं किस्‍से
कर्नाटक के मुख्‍यमंत्री बनने की चाहत रखने वाले शिवकुमार सूबे की सियासत में अलग ही रुतबा रखते हैं. वह महज 27 साल की उम्र में ठीक 30 साल पहले चुनाव जीतकर पहली बार कर्नाटक विधानसभा में पहुंचे थे. उन्‍हें कर्नाटक के राजनीतिक गलियारों में डीकेएस के नाम से भी पहचाना जाता है. वह गौड़ा परिवार (Gowda Family) से टक्‍कर लेकर सूबे की सियासत में शीर्ष तक पहुंचे हैं. राज्‍य में गौड़ा परिवार से उनके सियासी टकराव के किस्‍से सुनाए जाते हैं.

एचडी देवगौड़ा को हराकर पहली बार विधानसभा पहुंचे थे
Loading...

वोक्‍कालिगा समुदाय के शिवकुमार 1989 में कनकपुरा तालुका की सतनूर विधानसभा सीट से कर्नाटक की सियासत के दिग्‍गज एचडी देवगौड़ा को हराकर विधानसभा पहुंचे थे. जब एस. बंगारप्‍पा 1990 में सूबे के सीएम बने तो उन्‍होंने शिवकुमार को जेल व होमगार्ड का जूनियर मंत्री बनाया. हालांकि, दोनों ही मंत्रालय कुछ खास नहीं थे, लेकिन अपने नेतृत्‍व कौशल और साहसिक फैसलों के कारण शिवकुमार पार्टी आलाकमान की नजर में आ गए. उस दौरान वह महज 29 साल के थे.

एचडी देवगौड़ा के प्रधानमंत्री बनने के बाद भी शिवकुमार गौड़ा परिवार के खिलाफ सियासी जंग लड़ते रहे.


एचडी देवगौड़ा को हरवाकर अपनी हार का लिया बदला
जब 1994 में जनता दल सूबे की सत्‍ता पर काबिज हुआ तब शिवकुमार उन चुनिंदा लोगों में शामिल थे जो देवगौड़ा की आंधी में भी खड़े रहे. एचडी देवगौड़ा के प्रधानमंत्री बनने के बाद भी वह गौड़ा परिवार के खिलाफ सियासी जंग लड़ते रहे. इसके बाद 1999 में जब वोक्‍कालिगा समुदाय के ही एसएम कृष्‍णा मुख्‍यमंत्री बने तो उन्‍होंने शिवकुमार को शहरी विकास मंत्री बनाया. वहीं, 2002 में हुए लोकसभा उपचुनाव में वह कनकपुर सीट पर देवगौड़ा के खिलाफ मैदान में उतरे और हार गए. उन्‍होंने 2004 में इसी लोकसभा सीट पर देवगौड़ा के खिलाफ एक पत्रकार तेजस्‍वनी को उतार दिया, जिन्‍होंने शानदार जीत दर्ज कर शिवकुमार की हार का बदला लिया.

मंत्रिमंडल में वापसी के लिए करना पड़ा था लंबा इंतजार
इसी दौरान हुए विधानसभा चुनाव में कृष्‍णा सरकार हार गई. इसके बाद कांग्रेस और जेडीएस गठबंधन ने सरकार बनाई. इस बार शिवकुमार को सरकार से बाहर रखा गया. इसके बाद उन्‍हें कर्नाटक मंत्रिमंडल में वापसी के लिए जनवरी, 2014 तक इंतजार करना पड़ा. येडियुरप्‍पा सरकार के दौरान उन्‍होंने कर्नाटक प्रदेश कांग्रेस कमेटी के कार्यकारी अध्‍यक्ष पद की जिम्‍मेदारी संभाली. हालांकि, राज्‍य में कांग्रेस मुखिया के तौर पर वह कोई प्रभाव नहीं छोड़ पाए. जब 2013 में सिद्धारमैया के नेतृत्‍व में कांग्रेस फिर सूबे की सत्‍ता में लौटी तो शिवकुमार को भ्रष्‍टाचार के आरोपों के चलते बाहर रखा गया. उन्‍होंने न तो पार्टी छोड़ी और न ही आलाकमान के खिलाफ कुछ बोले. इसके बाद जनवरी, 2014 में उन्‍हें ऊर्जा मंत्री बनाया गया.

खराब तालमेल के बाद भी सिद्धारमैया के साथ किया काम
सिद्धारमैया और शिवकुमार के बीच अच्‍छा तालमेल नहीं था. बावजूद इसके दोनों अपने एक ही सियासी शत्रु गौड़ा परिवार के कारण साथ जुड़े रहे. दोनों में कभी-कभी मनमुटाव की स्थिति पैा हो जाती थी, लेकिन दोनों ने साथ काम किया. अगस्‍त, 2017 में जब बीजेपी सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल को गुजरात राज्‍यसभ चुनाव में हराने की कोशिश में जुटी थी, तब शिवकुमार ने गुजरात कांग्रेस के विधायकों को शरण दी थी. इसके बाद आयकर विभाग ने उनके ठिकानों पर छापेमारी भी की. अहमद पटेल चुाव में जीते. इसके बाद शिवकुमार के सियासी जीवन में मुश्किलों का दौर शुरू हो गया. बाद में शिवकुमार ने बीजेपी को राज्‍य की सत्‍ता से बाहर रखने के लिए देवगौड़ा परिवार के साथ हाथ भी मिलाया.

ये भी पढ़ें: 

PM मोदी ने कहा, अलग विचारों के बावजूद समाज में एकदूसरे को सुनने लायक सभ्‍यता रहनी चाहिए

कांग्रेस के पूर्व मंत्री शिवकुमार ने कहा- मैंने किसी का रेप नहीं किया और न ही कोई रकम ली है

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 30, 2019, 5:08 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...