तूतीकोरिन: स्टरलाइट के CEO बोले- लोगों को बहकाया गया, अब चाहते हैं दोबारा शुरू हो प्लांट

स्टरलाइट कॉपर प्लांट के चीफ एग्जिक्यूटिव ऑफिसर (सीईओ) पी. रामनाथ का कहना है कि इस यूनिट के खिलाफ लोगों को बहकाया गया था. उन्होंने खुद ये बात कबूल की है. अब ये लोग चाहते हैं कि प्लांट दोबारा शुरू किया जाए.

News18Hindi
Updated: July 14, 2018, 3:04 PM IST
तूतीकोरिन: स्टरलाइट के CEO बोले- लोगों को बहकाया गया, अब चाहते हैं दोबारा शुरू हो प्लांट
2013 के बाद वेदांता ग्रुप को तूतीकोरिन यूनिट के रूप में अब तक का सबसे लंबा शटडाउन झेलना पड़ रहा है.
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Updated: July 14, 2018, 3:04 PM IST
तमिलनाडु के तूतीकोरिन में लोगों के विरोध प्रदर्शन और उस दौरान हुई फायरिंग में 13 लोगों की मौत के बाद यहां स्टरलाइट कॉपर प्लांट को बंद कर दिया गया. मल्टीनेशनल कंपनी 'वेदांता ग्रुप' के लिए यह अब तक का सबसे बड़ा झटका था. दरअसल यहां के स्थानीय लोग कॉपर प्लांट के केमिकल और गैसों की वजह से प्रदूषण को लेकर प्लांट को बंद कराने की महीनों से मांग कर रहे थे. ऐसे ही एक दिन उनका विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसे काबू में करने के लिए पुलिस को फायरिंग करनी पड़ी. मामला बढ़ने पर मद्रास हाईकोर्ट की मदुरै बेंच ने स्टरलाइट इंडस्ट्रीज के नए कॉपर स्मेल्टर के कंस्ट्रक्शन पर रोक लगा दी.

इस पूर मामले पर स्टरलाइट कॉपर प्लांट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) पी. रामनाथ का कहना है कि इस यूनिट के खिलाफ लोगों को बहकाया गया था. उन्होंने खुद ये बात कबूल की है. अब ये लोग चाहते हैं कि प्लांट दोबारा शुरू किया जाए.

'CNN-News18' के साथ खास बातचीत में सीईओ पी. रामनाथ ने ये बातें कही. उन्होंने कहा, 'प्लांट शट डाउन करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का एक मौका दिया जाना चाहिए था. क्योंकि, हिंसक प्रदर्शन में जो लोग शामिल थे, उन्हें कंपनी के खिलाफ गुमराह किया गया था.'

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पी. रामनाथ के मुताबिक, शट डाउन का असर पूरे बिजनेस पर पड़ा है. तूतीकोरिन यूनिट में कॉपर, सल्फ्यूरिक एसिड, फॉस्फोरिक एसिड, स्लग और जिप्सम का प्रोडक्शन होता था. ज्यादातर कस्टमर हमपर निर्भर थे. प्लांट के शटडाउन होने से सप्लाई रुक गई है. इससे इस प्रोडक्ट्स की डिमांड बढ़ गई और इनके दाम भी बढ़ गए हैं.


इस प्लांट में 850-900 कर्मचारी काम कर रहे थे.


कंपनी के सीईओ के मुताबिक, इस प्लांट में 850-900 कर्मचारी काम कर रहे थे. उनमें से कई लोगों को दूसरी यूनिट्स में शिफ्ट किया गया है. इससे कंपनी का कॉस्ट बढ़ा है. उन्हें भी अपने परिवार से दूर रहना पड़ रहा है. लिहाजा वो वापस आना चाहते हैं. वो लोग चाहते हैं कि ये प्लांट दोबारा शुरू हो.

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पी. रामनाथ ने कहा, "22 मई को जो हआ, वो गलत था. हमने किसी तरह की हिंसा की उम्मीद नहीं की थी. सोशल मीडिया के जरिये लोगों को कंपनी के खिलाफ बहकाया और भड़काया गया. यकीन है कि सरकार इस ओर ध्यान देगी. हम भी चाहते हैं कि प्लांट दोबारा से शुरू हो, ताकि लोगों को फिर से रोजगार मिले.'
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