कोरोनाः विपक्ष के 12 नेताओं का पीएम को पत्र, सेंट्रल विस्टा सहित 9 प्वाइंट्स पर दिए कई सुझाव

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी. (File Photo)

कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी. (File Photo)

Opposition parties letter to PM Modi: 12 विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि लाखों ‘अन्नदाताओं’ को महामारी की चपेट में आने से बचाने के लिए नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की भी मांग की है.

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नई दिल्ली. कोरोना वायरस संक्रमण के खिलाफ लड़ाई में विपक्ष की 12 पार्टियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सुझावों के साथ पत्र लिखा है. पीएम को लिखे पत्र में विपक्षी नेताओं ने अपने पत्र में नि:शुल्क कोरोना टीकाकरण करने और सेंट्रल विस्टा परियोजना को रोकने की मांग की. साथ ही सभी बेरोजगार लोगों को छह हजार रुपये प्रति महीने देने और जरूरतमंदों को नि:शुल्क अनाज उपलब्ध कराने की भी मांग की गई है. 12 विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा है कि

लाखों ‘अन्नदाताओं’ को महामारी की चपेट में आने से बचाने के लिए नए कृषि कानूनों को निरस्त करने की भी मांग की है.

पत्र लिखने वालों में कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री और जेडीएस नेता देवेगौड़ा, एनसीपी प्रमुख शरद पवार, शिवसेना नेता और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे, टीएमसी सुप्रीमो और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, डीएमके नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन, जेएमएम नेता और झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन, जेकेपीए नेता फारुख अब्दुल्ला, समाजवादी पार्टी के नेता और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव, सीपीआई के नेता डी. राजा और सीपीआईएम नेता सीताराम येचुरी शामिल हैं.

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बता दें कि कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने हफ्ते भर पहले भी पीएम मोदी को पत्र लिखा था. उन्होंने अपने पत्र में चिंता प्रकट करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से आग्रह किया कि वह इस नीति को बदलें और पूरे देश में टीकों की एक समान कीमत सुनिश्चित करें. उन्होंने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर यह आरोप भी लगाया कि केंद्र सरकार ने 18 से 45 साल आयुवर्ग के लोगों को मुफ्त टीका उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया है.

सोनिया ने कहा, ‘‘यह हैरान करने वाली बात है कि पिछले साल के कड़वे अनुभवों और लोगों को हुई तकलीफ के बावजूद सरकार लगातार मनमानी और भेदभावपूर्ण नीति पर अमल कर रही है." उन्होंने दावा किया कि नयी नीति के तहत सरकार 18 से 45 साल आयुवर्ग के लोगों को मुफ्त टीका उपलब्ध कराने की अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ चुकी है और यह, युवाओं के प्रति उसका अपने उत्तरदायित्व से पूरी तरह पल्ला झाड़ना भी है.

सोनिया के मुताबिक, देश के नागरिकों को टीके लिए ज्यादा कीमत चुकानी होगी और राज्य सरकारों के खजाने पर भी बोझ पड़ेगा. उन्होंने सवाल किया, ‘‘इस मुश्किल समय में कोई सरकार लोगों की पीड़ा से मुनाफाखोरी करने की खूली छूट कैसे दे सकती है?’’ कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से कहा, ‘‘कांग्रेस ने पहले ही इसकी मांग की है कि इस नीति का पुनर्मूल्यांकन किया जाए. निश्चित तौर पर कोई भी तार्किक व्यक्ति टीकाकरण की एक समान कीमत से होने वाले लाभ से सहमत होगा.’’




उन्होंने आग्रह किया, ‘‘इस मामले में दखल दीजिए और इस गलत निर्णय को बदलिए. देश का लक्ष्य यही होना चाहिए कि 18 साल से अधिक आयु के लोगों को टीका लगे, चाहे उनकी आर्थिक हालत कुछ भी हो.’’

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