‘राष्ट्रवादी रुख’ वाले कंटेंट को मनमाने ढंग से नियंत्रित कर रहे हैं ट्विटर, फेसबुक: तेजस्वी सूर्या

सूर्या ने कहा कि कई मौकों पर ट्विटर, फेसबुक और उनसे संबंधित इकाइयों के खिलाफ ‘प्रामाणिक’ आरोप लगाए गए हैं
सूर्या ने कहा कि कई मौकों पर ट्विटर, फेसबुक और उनसे संबंधित इकाइयों के खिलाफ ‘प्रामाणिक’ आरोप लगाए गए हैं

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या (BJP MP Tejasvi Surya) ने कहा, ‘‘यह न सिर्फ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of expression) को अतार्किक ढंग से नियंत्रित करने के आधार पर संवैधानिक चुनौती (Constitutional challenge) है, बल्कि चुनावों के दौरान गैरकानूनी दखल (Illegal interference) के समान भी है.’’

  • भाषा
  • Last Updated: September 23, 2020, 10:25 PM IST
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नई दिल्ली. भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या (BJP MP Tejasvi Surya) ने बुधवार को लोकसभा (Lok Sabha) में कहा कि ट्विटर और फेसबुक (Twitter and Facebook) जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म (Social Media Platform) ‘राष्ट्रवादी रुख’ वाली सामग्रियों को कथित रूप से मनमाने ढंग से नियंत्रित कर रहे हैं और इसमें सरकार (Government) को दखल देना चाहिए. सदन में शून्यकाल (Zero Hour) के दौरान सूर्या ने कहा कि कई मौकों पर ट्विटर, फेसबुक और उनसे संबंधित इकाइयों के खिलाफ ‘प्रामाणिक’ आरोप लगाए गए हैं कि वे उपयोगकर्ता (users) की ओर से पोस्ट की जाने वाली सामग्री को, खासतौर पर ‘राष्ट्रवादी रुख’ (Nationalist stance) की सामग्री को मनमाने ढंग से विनियमित और नियंत्रित कर रही हैं. उन्होंने कहा, ‘‘यह न सिर्फ अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता (Freedom of expression) को अतार्किक ढंग से नियंत्रित करने के आधार पर संवैधानिक चुनौती (Constitutional challenge) है, बल्कि चुनावों के दौरान गैरकानूनी दखल (Illegal interference) के समान भी है.’’

भाजपा सांसद (BJP MP) ने कहा कि फेसबुक, ट्विटर और समान तरह के प्लेटफॉर्म खुद को सूचना प्रौद्योगिकी कानून, 2000 (Information Technology Act, 2000) के तहत मध्यवर्ती संस्थाओं के दायरे में बताते हैं. उन्होंने कहा कि इस परिभाषा के हिसाब से मध्यवर्ती संस्थाओं की भूमिका किसी भी तीसरे पक्ष के उपयोगकर्ता (Third party users) के डेटा के प्रसंस्करण, संग्रहण और प्रसारण या पारेषण (Transmission) तक सीमित होती है तथा वे सामग्री को लेकर दखल नहीं दे सकतीं. सूर्या ने कहा कि सोशल मीडिया मंचों (Social media forums) के संदर्भ में नए दिशानिर्देश जारी किए जाने चाहिए.

फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष पर 15 अक्टूबर तक दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाए: SC
वहीं एक अन्य मामले में उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को दिल्ली विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति को निर्देश दिया कि फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक अजित मोहन को उत्तर पूर्वी दिल्ली के दंगों के बारे में गवाही देने के लिये जारी सम्मन के सिलसिले में उनके खिलाफ 15 अक्टूबर तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाये.
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विधानसभा की शांति और सद्भाव समिति ने फेसबुक इंडिया के उपाध्यक्ष और प्रबंध निदेशक को इस सोशल मीडिया मंच के खिलाफ शिकायतों के सिलसिले में नोटिस जारी किया था. इस शिकायत में आरोप लगाया गया था कि फेसबुक ने अपने मंच पर नुकसान पहुंचाने वाली सामग्री पर अंकुश लगाने के लिये जानबूझ कर कोई कार्रवाई नहीं की थी.
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