ISRO प्रमुख सिवन को गले लगाने को लेकर PM मोदी की ट्विटर पर खूब हो रही तारीफ

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Updated: September 7, 2019, 10:25 PM IST
ISRO प्रमुख सिवन को गले लगाने को लेकर PM मोदी की ट्विटर पर खूब हो रही तारीफ
ISRO प्रमुख सिवन को गले लगाने को लेकर PM मोदी की ट्विटर पर खूब हो रही तारीफ.

वायरल हो रहे इस वीडियो में पीएम नरेंद्र मोदी को (PM Narendra Modi) इसरो (ISRO) प्रमुख से हाथ मिलाते हुए देखा जा सकता हैं, उसके बाद वो सिवन को गले लगाते हैं और पीठ थपथपाकर उनका हौसला बढ़ाते हैं.

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  • Last Updated: September 7, 2019, 10:25 PM IST
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने आज सुबह इसरो प्रमुख के सिवन से मुलाकात की. लैंडर जब चंद्रमा (moon) की सतह के नजदीक जा रहा था तभी निर्धारित सॉफ्ट लैंडिंग से चंद मिनटों पहले अपना रास्ता भटक गया. उसका इसरो के नियंत्रण केंद्र से सपंर्क टूट गया. इस घटना के बाद इस मिशन के लिए दिन रात एक करने वाले इसरो के वैज्ञानिक भावुक थे. प्रधानमंत्री, जिन्होंने बेंगलुरु में कंट्रोल रूम से पूरे घटनाक्रम को देखा था, उन्होंने इसरो प्रमुख की हौसला अफजाई की और उनको गले लगाया. उससे पहले उन्होंने सभी वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाते हुए कहा था कि जीवन में उतार-चढ़ाव आते रहते हैं. पीएम का इसरो प्रमुख के सिवन को गले लगाने वाले वीडियो को लेकर पूरी दुनिया में खूब तारीफ हो रही है.

 



समाचार एजेंसी एएनआई द्वारा भी शेयर किए गए लगभग एक मिनट के वीडियो में पीएम मोदी को इसरो प्रमुख से हाथ मिलाते हुए देखा जा सकता है, उसके बाद वो सिवन को गले लगाते हैं और पीठ थपथपाकर उनका हौसला बढ़ाते नजर आ रहे हैं, फिर इसरो के कंट्रोल रूम से निकलने लगते हैं. इस दौरान सिवन बहुत भावुक हो जाते हैं.
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भारत और श्रीलंका के पूर्व इजरायली राजदूत डैनियल कार्मोन ने भी पीएम मोदी की खूब प्रशंसा की है.

 



बेंगलुरु के पुलिस कमिश्नर भास्कर राव ने कहा कि पीएम मोदी का इसरो प्रमुख को गले लगाना शानदार नेतृत्व की निशानी है.



एक ट्विटर यूजर ने इसे बेहतर इंसानी स्वभाव बताया.







ट्विटर यूजर तान्या ने पीएम मोदी की खूब तारीफ की और कहा कि वो इसरो के साथ खड़ी हैं.



इस हौसला अफजाई के लिए प्रधानमंत्री की सोशल मीडिया पर जमकर तारीफ हो रही है. चंद्रयान-2 की अगर 'सॉफ्ट लैंडिंग' हो जाती तो भारत दुनिया में ऐसा करने वाला पहला देश होता. रूस, अमेरिका और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला दुनिया का चौथा तथा चांद के दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र में पहुंचने वाला दुनिया का पहला देश बन जाता. चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर का जीवनकाल एक साल का बताया जा रहा था. इस दौरान यह चंद्रमा की लगातार परिक्रमा कर हर जानकारी पृथ्वी पर मौजूद इसरो के वैज्ञानिकों को भेजता. लेकिन अभी भी लोगों को इस मिशन से बहुत उम्मीदों हैं और ये मिशन अब भी 75 फीसदी सफल है.

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First published: September 7, 2019, 3:50 PM IST
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