ISI की 'अनुष्का चोपड़ा' के लिए भारतीय सेना की जासूसी कर रहे थे दो रक्षाकर्मी, 75 हजार रुपये भी लिए

भारतीय सेना की जानकारी देने वाले दो रक्षाकर्मी गिरफ्तार.
भारतीय सेना की जानकारी देने वाले दो रक्षाकर्मी गिरफ्तार.

लखनऊ स्थित मिलिट्री इंटेलिजेंस (Military intelligence) ने इस जासूसी कांड का पर्दाफाश किया. गिरफ्तार किए गए दो लोगों में सिविल डिफेंस कर्मचारी, 29 साल का विकास कुमार और बीकानेर के आर्मी महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में कांट्रेक्चुअल कर्मचारी 22 साल का चिमन लाल शामिल है.

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नई दिल्‍ली. पाकिस्तान उच्चायोग जासूसी कांड (Pakistan High Commission) के खुलासे के बाद खुफिया एजेंसियों को एक और बड़ी कामयाबी मिली है. मिलिट्री इंटेलिजेंस और राजस्थान पुलिस ने सोमवार को ISI के दो जासूसों को राजस्थान से गिरफ्तार किया है.

लखनऊ स्थित मिलिट्री इंटेलिजेंस ने इस जासूसी कांड का पर्दाफाश किया. गिरफ्तार किए गए दो लोगों में सिविल डिफेंस कर्मचारी, 29 साल का विकास कुमार और बीकानेर के आर्मी महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में कांट्रेक्चुअल कर्मचारी 22 साल का चिमन लाल शामिल है. विकास कुमार श्रीगंगानगर में सेना के गोला-बारूद डिपो में काम करता था. यह दोनों पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के लिए काम करते थे.

अगस्त 2019 में मिली थी जासूसी की जानकारी
अगस्त 2019 में लखनऊ स्थित मिलिट्री इंटेलिजेंस को श्रीगंगानगर में जासूसी गतिविधियों की जानकारी मिली थी. जानकारी मिली थी कि विकास कुमार नाम का व्यक्ति सैन्य जानकारी पाकिस्तान में अपने हैंडलर्स को दे रहा था. इस साल जनवरी में मिलिट्री इंटेलिजेंस लखनऊ ने यूपी एटीएस के साथ जानकारी साझा की और विकास की हरकतों पर साझा नज़र रखी जाने लगी. इस ऑपरेशन का नाम 'डेज़र्ट चेज़' रखा गया. चिमन लाल की मदद से विकास संवेदनशील जानकारी और तस्वीरें अपने हैंडलर्स तक पहुंचा रहा था. देश में लॉकडाउन की घोषणा के बाद इस मामले की रफ्तार धीमी पड़ गई, लेकिन यह दोनों जासूसी करते रहे.
मई के पहले हफ्ते में इस मामले की जानकारी राजस्थान पुलिस के साथ साझा की गई. राजस्थान पुलिस और मिलिट्री इंटेलिजेंस ने एक साझा टीम तैयार की और इन दोनों पर नज़र रखी जाने लगी. हाल ही में फिर से इस बात की जानकारी मिली कि सीमा पार से इन दोनों के पास जासूसी के लिए रुपये भेजे जा रहे हैं और साथ ही विकास और चिमन लाल की ओर से ख़ुफ़िया जानकारी साझा की जा रही है. दोनों की गिरफ्तारी के लिए योजना तैयार की गई और सोमवार को दोनों को जयपुर से गिरफ्तार किया गया.





फेसबुक पर 'अनुष्का चोपड़ा' से दोस्ती से हुई जासूसी की शुरुआत
पूछताछ के दौरान विकास कुमार ने बताया कि 'अनुष्का चोपड़ा' नाम की फेसबुक फ्रेंड से उसकी बातचीत मार्च 2019 में शुरू हुई थी. जब इस फेसबुक अकाउंट से उसके पास फ्रेंडशिप की रिक्वेस्ट आई. इस अकाउंट से पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी की एक एजेंट के साथ विकास लगातार संपर्क में रहा. धीरे-धीरे उनकी दोस्ती बढ़ने लगी और बाद में एक दूसरे को अपने वाट्सऐप नंबर भी साझा किए. वाट्सऐप पर दोनों एक दूसरे से चैटिंग करते रहे और वॉयस और वीडियो कॉल्स पर भी बातचीत होती रही. यह फेसबुक अकाउंट पाकिस्तान के मुल्तान से चलाया जा रहा था. अनुष्का चोपड़ा ने विकास से कहा था कि वह सीएसडी मुंबई में काम करती है, हालांकि उसका वाट्सऐप नंबर भारतीय ही था.

अनुष्का के कहने पर विकास कई वाट्सऐप ग्रुप में शामिल हुआ. फिर एक दिन अनुष्का ने विकास को अपने बॉस 'अमित कुमार सिंह' से मिलवाया जो खुद को मिलिट्री इंजीनियर सर्विस से बताता था, लेकिन असल में अमित कुमार भी पाक खुफिया एजेंसी का एजेंट था. अमित कुमार से मिलवाने के बाद अनुष्का ने विकास को फेसबुक और वाट्सऐप पर ब्लॉक कर दिया.

₹75,000 के लिए साझा की ख़ुफ़िया जानकारी
अमित कुमार सिंह ने विकास को पैसों के बदले सैनिक जानकारी देने के लिए तैयार किया. पिछले साल अप्रैल से ही विकास ने अपने हैंडलर के साथ जानकारी साझा करना शुरू किया. बीकानेर में एक वाटर डिस्ट्रीब्यूशन रजिस्टर में लिखी गई जानकारी विकास ने अपने हैंडलर को भेजी, जिसमें आर्मी नंबर, रैंक, नाम, यूनिट, कुल संख्या की जानकारी शामिल थी.

रक्षाकर्मी द्वारा आईएसआई को भेजी गई जानकारी.


विकास ने महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आर्मी यूनिट की जानकारी दी, सेना डिपो में आने वाले गोला बारूद की जानकारी भी समय-समय पर अपने हैंडलर दी. साथ ही गोला बारूद, हथियारों और मिलिट्री व्हीकल, टैंक की तस्वीरें भी अपने हैंडलर के साथ साझा की. खुफिया जानकारी साझा करने के लिए विकास कुमार को कुल ₹75000 मिले. यह रकम पाने के लिए वह अपना और अपने भाई हेमंत कुमार का बैंक अकाउंट इस्तेमाल किया करता था. इस रकम से ₹9000 उसने चिमन लाल को दिए हैं, जो बीकानेर से उसके लिए जासूसी करता रहा.

चेतावनी के बावजूद जारी रखी जासूसी
इस साल मार्च के महीने में एक वाट्सऐप ग्रुप में एक सदस्य ने उस ग्रुप की असलियत की जानकारी दी थी और चेतावनी दी थी कि यह पाकिस्तानी जासूसों का वाट्सऐप ग्रुप है. वहीं विकास को भी यह अंदाजा हो गया था कि अनुष्का चोपड़ा और अमित कुमार सिंह दुश्मन एजेंसीज के लिए काम करते हैं लेकिन इसके बावजूद पैसों की लालच में विकास कुमार खुफिया जानकारी साझा करता रहा. विकास और उसके हैंडल के बीच आखिरी बातचीत रविवार यानी 7 जून को हुई थी. हैरानी की बात यह है कि खुद विकास एक रिटायर्ड सेना के जवान का बेटा है.

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