मेरठ में ब्लैक फंगस दो की मौत, कोरोना पीड़ित और शुगर के मरीजों पर संक्रमण का ज्यादा खतरा

(प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

(प्रतीकात्मक तस्वीर: shutterstock)

सीएमओ ने कहा कि जिन लोगों को कोविड के दौरान स्टेरॉयड दिए जाते हैं, उससे इंसान की इम्यूनिटी पर असर पड़ता है. जिन लोगों की डायबिटीज अनकंट्रोल रही है. लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रखा गया है या लंबे समय तक स्टेरॉयड चले हैं. उन्हीं लोगों में ब्लैक फंगस हुआ है.

  • Share this:

मेरठ. उत्तर प्रदेश ( Uttar Pradesh) के मेरठ ( Meerut) में ब्लैक फंगल ( Black Fungal) का कहर जारी है. यहां इस बीमारी से अब तक दो मरीजों की मौत हो चुकी है, जबकि दस लोग अलग अलग अस्पतालों में भर्ती हैं. सीएमओ ने ब्लैक फंगस को लेकर बताया कि जिन लोगों को कोविड के दौरान स्टेरॉयड दिए जाते हैं, उससे इंसान की इम्यूनिटी पर असर पड़ता है. उन्होंने बताया कि जिन लोगों को डायबेटिक अनकंट्रोल रही है. लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रखा गया है या लंबे समय तक स्टेरॉयड चले हैं. उन्हीं लोगों में ब्लैक फंगस हुआ है. सीएमओ ने बताया कि आंख के अंदर दिक्कत होती है. और धीरे धीरे ब्रेन तक पहुंच जाता है. सीएमओ डॉक्टर अखिलेश मोहन ने बताया कि ये फंगस ख़तरनाक है. इसमें एक ही दवाई है. इंजेक्शन लिमिटेड हैं. इस इंजेक्शन को मार्केट में उपलब्ध कराने के लिए सरकार कोशिश कर रही है.

मेरठ के जिलाधिकारी के बालाजी का कहना है कि ब्लैक फंगस को लेकर मेडिकल कॉलेज में अलग वार्ड बनाया जाएगा. उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज और एक निजी अस्पताल में ब्लैक फंगस के मरीज भर्ती हैं. डीएम ने कहा कि ब्लैक फंगस मरीजोंं की नियमित सूचनाओं को लेकर सीएमओ को निर्देशित किया गया है. इस बीमारी को लेकर जो भी आवश्यक दवाईयां उनको उपलब्ध कराया जा रहा है. आगे और भी पेशेंट्स को चिन्हित करने का कार्य किया जाएगा.

वहीं, निजी अस्पताल के डॉक्टर संदीप गर्ग का कहना है कि ये बीमारी ज्यादातर कोरोना मरीजों को हो रही है. लंबे समय से जो कोरोना मरीज अस्पताल में भर्ती हंै उनको ये ज्यादा प्रभावित कर रहा है. उन्होंने बताया कि उनके अस्पताल में भी ब्लैक फंगस से पीडित एक मरीज़ की मौत हो चुकी है. बाकी पांच अन्य मरीजों का उनके अस्पताल में इलाज चल रहा है.

डाक्टरों ने बताया कि ब्लैक फंगस यानी म्यूकरमाइकोसिस नामक बीमारी नान कोविड में मिलती रही है. लेकिन कोविड में पहली बार ये बीमारी दिखी है. यह बीमारी म्यूकर नामक फंगस से होती है, जो वातावरण में रहते हैं. नाक और आंख से होता हुआ संक्रमण दिमाग तक पहुंचता है. इसमें मरीज के दिमाग का अगला हिस्सा अंदर से सूज जाता है. आंखें काली पड़ जाती हैं. डाक्टरों का कहना है कि यह फंगस कई मरीजों के साइनस में रहता है. लेकिन एक्टिव नहीं हो पाता है. नाक में एक विशेष उपकरण डालकर साइनस को साफ भी करते हैं. कोरोना में प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर बाद में यह फंगस दूसरे अंगों तक पहुंच जाता है.
कोरोना मरीजों को स्टेरायड देने से शुगर भी बढ़ जाती है. फंगस ग्लूकोज खाकर बढ़ता है. शुगर के पुराने रोगियों में ब्लैक फंगस का खतरा मिल रहा है. यह जानलेवा साबित हो रहा है. फंगस नाक के जरिए बलगम में मिलकर दिमाग तक पहुंचता है. इस मर्ज में शुगर को काबू में रखना बेहद जरूरी है. डॉक्टरों की सलाह है कि कोरोना से ठीक होने पर शुगर को रोजाना नापते रहें. धूल और प्रदूषण से भी बचें. नाक के अंदर काले व भूरे रंग की पपड़ी जमना, नाक बंद होना, ऊपर के होठों का सुन्न होना व आंखों का लाल होना इसके लक्षण है. डॉक्टर संदीप गर्ग का कहना है कि इस मर्ज में स्ट्रांग एंटीफंगल दवाएं देनी पड़ती हैं.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज