यौन उत्पीड़न की शिकायत के बाद कोलकाता के अस्पताल से दो डॉक्टरों का तबादला

यौन उत्‍पीड़न करने के दोषी डॉक्‍टर्स का तबादला हुआ. ( प्रतीकात्‍मक चित्र )

पश्चिम बंगाल सरकार ने एक पोस्ट-डॉक्टरेट छात्रा द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायत के बाद आंतरिक समिति द्वारा दोषी पाए जाने पर कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के दो डॉक्टरों का तबादला कर दिया. यह मामला पहली बार फरवरी 2020 में सामने आया था लेकिन कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी थी. महिला ने पिछले साल फरवरी में भवानीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि यह घटना उस वक्त शुरू हुई जब वह सहायक प्रोफेसर और सघन चिकित्सा कक्ष के प्रमुख के साथ चिकित्सा सम्मेलन में हिस्सा लेने हैदराबाद गयी थी.

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    कोलकाता . पश्चिम बंगाल सरकार ने एक पोस्ट-डॉक्टरेट छात्रा द्वारा यौन उत्पीड़न की शिकायत के बाद आंतरिक समिति द्वारा दोषी पाए जाने पर कोलकाता के सरकारी एसएसकेएम अस्पताल के दो डॉक्टरों का तबादला कर दिया. एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी. स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (आईपीजीएमई एंड आर) परिसर में घटना को लेकर भारी हंगामे के बाद राज्य के स्वास्थ्य विभाग ने तबादले का आदेश जारी किया है. यह मामला पहली बार फरवरी 2020 में सामने आया था लेकिन उसके बाद से कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी थी.

    अधिकारी ने बताया कि मामले में मुख्य आरोपी का कलकत्ता मेडिकल कॉलेज और अस्पताल तबादला कर दिया गया. सुखलाल करनानी मेमोरियल (एसएसकेएम) अस्पताल के गहन चिकित्सा कक्ष के प्रमुख को नील रतन सरकार (एनआरएस) मेडिकल कॉलेज और अस्पताल स्थानांतरित कर दिया गया है. महिला ने पिछले साल फरवरी में भवानीपुर थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया था कि यह घटना उस वक्त शुरू हुई जब वह सहायक प्रोफेसर और सघन चिकित्सा कक्ष के प्रमुख के साथ चिकित्सा सम्मेलन में हिस्सा लेने हैदराबाद गयी थी.



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    पुलिस ने बताया कि मामला अस्पताल प्रशासन को भेजा गया था. अस्पताल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस साल मार्च में, विशाखा दिशानिर्देशों के अनुसार एक आंतरिक समिति का गठन किया गया था और इसने दो डॉक्टरों को दोषी पाया. उन्होंने कहा, ‘‘पीड़िता को लिखित रूप में समिति के निष्कर्ष की जानकारी दी गयी लेकिन दोनों डॉक्टरों के खिलाफ कोई कदम नहीं उठाया गया.’’

    जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी कार्रवाई नहीं हो रही थी 

    यह मामला पहली बार फरवरी 2020 में सामने आया था, उस समय उम्‍मीद जागी थी कि प्रशासन तत्‍काल कार्रवाई करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. इसके बाद जांच की लंबी प्रक्रिया चली और आरोपी अपने पदों पर बनेे रहे. जांच समिति में आरोपी डॉक्‍टरों के दोषी पाए जाने के बाद भी कथित तौर पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी थी. इसके बाद पोस्ट-डॉक्टरेट छात्रा के समर्थन में प्रदर्शन हुआ. बृहस्पतिवार को परिसर में नाराज छात्र-छात्राओं के प्रदर्शन के बाद दोनों डॉक्टरों के स्थानांतरण का आदेश जारी किया गया.

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