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    देश के 66% गांव और करीब 40 फीसदी शहरों में रोज होती है बिजली गुल: सर्वे 

    CEEW की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है.
    CEEW की रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है.

    काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवॉयरमेंट एंड वॉटर (Council on Energy, Environment and Water-CEEW) ने अपनी ताजा रिपोर्ट स्टेट ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एक्सेस इन इंडिया में खुलासा किया है कि देश के दो तिहाई गांवों और 40 फीसदी शहरों के घरों में दिन में कम से कम एक बार जरूर बिजली गुल होती है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: October 14, 2020, 10:35 AM IST
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    अनिल कुमार
    नई दिल्ली.
    देश के आजादी के 72 सालों के बाद भी लोगों को 24 घंटे बिजली (Uninterrupted Power Supply) मुनासिब नहीं हो पा रही है. जर्जर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन, डिस्कॉम कंपनियों के घाटे और बिजली चोरी जैसे तमाम कारण हो सकते हैं जिसकी वजह से लोगों को निर्बाध बिजली नहीं मिल पाती है. काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवॉयरमेंट एंड वॉटर (Council on Energy, Environment and Water-CEEW) ने अपनी ताजा रिपोर्ट स्टेट ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एक्सेस इन इंडिया में खुलासा किया है कि देश के दो तिहाई गांवों और 40 फीसदी शहरों के घरों में दिन में कम से कम एक बार जरूर बिजली गुल होती है.

    बिजली कटौती की सबसे अधिक समस्या उत्तर प्रदेश में
    सर्वे में खुलासा हुआ है कि अधिकांश लोगों ने बिजली कटौती की समस्याओं का सामना किया है. सर्वे में भाग लिए करीब 76 फीसदी लोगों ने माना कि उनके घरों में अक्सर बिजली गुल हो जाती है. अधिक देरी तक और बार-बार बिजली गुल होने के मामले में उत्तर प्रदेश पहले पायदान पर है. उसके बाद झारखंड, असम, बिहार और हरियाणा वे प्रदेश हैं, जहां अधिक देरी तक और बार-बार बिजली गुल होने की समस्याएं देखने को मिलती है.
    करीब एक तिहाई आबादी को बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता से समझौता करना पड़ता है. वोल्टेज कम अधिक होने की समस्या से ब्लैक ऑउट्स, कम रोशनी और घरों में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों के खराब होने की स्थिति से रूबरू होना पड़ता है. उपभोक्ताओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता की कमी की वजह से महज 6 फीसदी लोगों ने ही बिजली आपूर्ति से जुड़े मामलों की शिकायत संबंधित अथॉरिटी से की है.



    सर्वे में ये महत्त्वपूर्ण जानकारियों का भी हुआ खुलासा
    आंकड़ों पर गौर करे तो भारत, दुनिया में तीसरा सबसे अधिक बिजली पैदा करने वाला और तीसरा सबसे अधिक बिजली खपत वाला देश है. सरकारों और राजनीतिक पार्टियों की तरफ से सभी को 24*7 सस्ती बिजली आपूर्ति का वादा या आश्वासनक हमेशा दिया जाता है,लेकिन इसके बावजूद देश की बड़ी आबादी को कई घंटों तक अंधेरे में जीवन बिताना पड़ता है. सर्वे में खुलासा किया गया है कि उत्तर और केंद्रीय भारत राज्यों मसलन यूपी, एमपी, राजस्थान और बिहार में करीब 2.4 फीसदी घरों में बिजली पहुंची ही नहीं है. जिनके घरों में बिजली नहीं पहुंची है उनमें से अधिकांश लोगों ने माना कि इसका सबसे बड़ा कारण है ग्रिड कनेक्शन वाली बिजली खर्च वे वहन नहीं कर सकते हैं. बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और भरोसा अभी भी देखने को नहीं मिल पाया है.



    उपभोक्ताओं को मिलने वाले बिजली बिल में भी झोल देखने को मिलता है
    उपभोक्ताओं से बिजली बिलों की रकम को समय से नहीं वसूले जाने की वजह से भी डिस्कॉम पिछले कई सालों से घाटे में चल रही है. सर्वे में खुलासा हुआ है कि 4 फीसदी ग्रिड यूजर्स अनियमित बिल प्राप्त करते हैं. जबकि 5 फीसदी ग्रिड यूजर्स ने माना कि उन्होंने कभी भी बिजली बिल नहीं देखे हैं.

    ग्रिड यूजर्स को नियमित रूप से बिजली बिल मिलने के मामले में झारखंड में सबसे कम हिस्सेदारी 55 फीसदी देखी गई है. उसके बाद बिहार में यह आंकड़ा 64 फीसदी के आस-पास है. असम , उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश वे राज्य है जहां बिजली बिल की अनियमितता के मामले सबसे अधिक देखने को मिलते हैं. इनिसिएटिव फॉर सस्टेनेबल एनर्जी पॉलिसी यानि आईएसईपी के साथ मिलकर सीईईडब्ल्यू ने देश के 21 राज्यों के 152 जिलों के 15000 घरों में रहने वाले लोगों का सर्वे किया.

    12 अक्टूबर को मुंबई में कई घंटों तक बिजली हुई थी गुल
    12 अक्टूबर को देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में पॉवर ग्रिड फेल होने की वजह से घंटों बिजली गुल हो गई थी. मुंबई और आस-पास के इलाकों में रहने वालों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. मुंबई की लाइफलाइन मानी जाने वाली उपनगरीय ट्रेनों का परिचालन बाधित हो गया था. ऑनलाइन परीक्षा दे रहे छात्रों को भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा था.
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