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देश में इतने प्रकार के आरक्षण, पहली बार सवर्णों के लिए तय हुआ 10% कोटा

देश में इतने प्रकार के आरक्षण, पहली बार सवर्णों के लिए तय हुआ 10% कोटा

सांकेतिक तस्वीर

सांकेतिक तस्वीर

जब भी आरक्षण पर चर्चा होती है तो यह केवल जाति और आर्थिक आधार पर ही अधिक केंद्रित रहती है, जबकि आरक्षण के कई अन्य प्रकार भी हैं.

    मोदी सरकार ने सवर्णों के लिए सरकारी नौकरी में 10 प्रतिशत आरक्षण को मंजूरी दे दी है. सोमवार को केंद्रीय केबिनेट ने इस प्रस्ताव को पास किया. जिन लोगों की सालाना आय 8 लाख से कम है वह इसका फायदा उठा सकेंगे. यह पहली बार है जब देश में आर्थिक आधार पर आरक्षण दिया जा रहा है. काफी लंबे वक्त से इसा बात की मांग की जा रही थी कि आरक्षण को जाति के बजाय आर्थिक आधार पर दिया जाए. हालांकि जाति के आधार पर आरक्षण जारी रहेगा.

    जब भी आरक्षण पर चर्चा होती है तो यह केवल जाति और आर्थिक आधार पर ही अधिक केंद्रित रहती है, जबकि आरक्षण के कई अन्य प्रकार भी हैं. चलिए आपको बताते हैं कि भारत में आरक्षण किन-किन आधार पर दिया जाता है-

    जातिगत आधार

    इसके अंतर्गत केंद्र एवं राज्य सरकार द्वारा विभिन्न अनुपात में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़ी जातियों (मुख्यत: जन्मजात जाति के आधार पर) के लिए सीटें आरक्षित की जाती हैं. केंद्र सरकार द्वारा वित्त पोषित उच्च शिक्षा संस्थानों में उपलब्ध सीटों में से 22.5% अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (आदिवासी) के छात्रों के लिए आरक्षित हैं. ओबीसी के लिए अतिरिक्त 27% आरक्षण को शामिल करके आरक्षण का यह प्रतिशत 49.5% तक बढ़ा दिया गया है.

     

    लिंग के आधार पर

    भारत में शिक्षण संस्थानों और नौकरियों में महिलाओं को आरक्षण मिलता है. महिलाओं को ग्राम पंचायत और नगर निगम चुनाव में 33% आरक्षण प्राप्त है. संसद और विधानसभाओं तक इस आरक्षण का विस्तार करने की एक दीर्घावधि योजना है.

    ये भी पढ़ें: जानिए किस आय वर्ग के सवर्णों को मिलेगा आरक्षण, क्या है योग्यता?

    धर्म आधारित

    कई राज्यों ने धर्म के आधार पर आरक्षण की व्यवस्था की हुई है. तमिलनाडु सरकार ने मुसलमानों और ईसाइयों प्रत्येक के लिए 3.5% सीटें आवंटित की हैं. आंध्र प्रदेश प्रशासन ने मुसलमानों को 4% आरक्षण देने के लिए एक कानून बनाया है. केरल लोक सेवा आयोग ने मुसलमानों को 12% आरक्षण दे रखा है. धार्मिक अल्पसंख्यक का दर्जा प्राप्त शैक्षणिक संस्थानों के पास भी अपने विशेष धर्मों के लिए 50% आरक्षण है. केंद्र सरकार ने अनेक मुसलमान समुदायों को पिछड़े मुसलमानों में सूचीबद्ध कर रखा है, इससे वे आरक्षण के हकदार होते हैं.

    मैनेजमेंट कोटा

    यह आरक्षण शिक्षण संस्थानों में मिलता है. मैनेजमेंट कोटा का अर्थ है कि आपने एंट्रेस एग्जाम तो पास नहीं किया लेकिन आप पैसे देकर एडमिशन ले सकते हैं.

    इसके अलावा भी आरक्षण के कुछ अन्य प्रकार इस तरह हैं-

    स्वतंत्रता सेनानियों के बेटे/बेटियों/पोते/पोतियों के लिए

    शारीरिक रूप से विकलांगों के लिए

    खेल हस्तियों के लिए

    सैनिकों के बच्चों के लिए

    स्वदेश लौट आने वालों के लिए

    जो अंतर-जातीय विवाह से पैदा हुए हैं।

    सरकारी उपक्रमों/सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विशेष स्कूलों में उनके कर्मचारियों के बच्चों के लिए

    ये भी पढ़ें: चुनाव से पहले मोदी सरकार का बड़ा फैसला, गरीब सवर्णों को मिलेगा 10 प्रतिशत आरक्षण

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    Tags: Reservation, Trending news, Upper Caste Reservation, Women reservation

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