सूरत अग्निकांड: कोचिंग में टायर पर बैठने को मजबूर थे बच्चे, आज आएगी रिपोर्ट

कमरे की ऊंचाई कम होने की वजह से ऐसे कमरे में कोई कुर्सी पर नहीं बैठ सकता था, इसलिए कोचिंग के मालिक ने छात्रों के बैठने के लिये कुर्सियों की जगह टायरों का इस्तेमाल किया था. इन्हीं टायरों ने सबसे तेज़ी से आग पकड़ ली.

News18Hindi
Updated: May 27, 2019, 12:31 PM IST
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Updated: May 27, 2019, 12:31 PM IST
सूरत के सरथाना में शुक्रवार को एक इमारत में आग लगने से 22 बच्चों की मौत हो गई. तक्षशिला कॉम्पलेक्स नाम की जिस बिल्डिंग में आग लगी वहां तीसरी मंजिल पर कोचिंग क्लासेज चल रही थीं, इसी मंजिल पर आग ने विकराल रूप धारण कर लिया था और बच्चों को नीचे आने का रास्ता नहीं मिला था. इसके बाद बच्चों ने तीसरी मंजिल से ही छलांग लगाना शुरू कर दिया. मरने वाले 22 बच्चों में से 16 लड़कियां थीं.

ऐसे भड़की आग



तक्षशिला कॉम्पलेक्स में लगी इस आग को भड़काने के लिए मौके पर कई ज्वलनशील पदार्थ, फ्लेक्स एवं टायर घटनास्थल पर मौजूद थे. इन्हीं के कारण आग ने विकराल रूप धारण कर लिया. दमकल की गाड़ियों के घटनास्थल से काफी दूर होने के कारण आग बुझाने के अभियान में रुकावट आई.

शुरुआती जांच में यह खुलासा हुआ कि तेज ज्वलनशील सामग्री के इस्तेमाल और कोचिंग की कक्षाओं में कुर्सी के रूप में टायरों के इस्तेमाल की वजह से आग तेजी से फैली. इतना ही नहीं संस्थान में छत के लिए फ्लेक्स जैसी उच्च ज्वलनशील सामग्री का इस्तेमाल किया गया था, जो सिर्फ पांच फुट ऊंची थी. कमरे की ऊंचाई कम होने की वजह से ऐसे कमरे में कोई कुर्सी पर नहीं बैठ सकता था, इसलिए कोचिंग के मालिक ने छात्रों के बैठने के लिये कुर्सियों की जगह टायरों का इस्तेमाल किया था.

आज आएगी पूरे मामले पर रिपोर्ट

बता दें शुक्रवार को हुए इस हादसे की पूरी रिपोर्ट सोमवार को आएगी. राज्य के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरी रिपोर्ट को पेश करेंगे. इसके बाद यह रिपोर्ट मुख्यमंत्री विजय रूपाणी को सौंपी जाएगी. बता दें 22 बच्चों की मौत के बाद मुख्यमंत्री ने जांच बैठाई थी. सीएम रूपाणी ने तीन दिन के भीतर जिम्मेवार लोगों की जानकारी के साथ पूरी रिपोर्ट मांगी थी.

इस पूरे अग्निकांड के बाद शनिवार को कोचिंग सेंटर संचालक भार्गव भूटानी को गिरफ्तार कर लिया गया था. हादसे के बाद शहर के सभी कोचिंग सेंटरों को बंद कर दिया गया है और सीएम विजय रूपाणी ने स्कूलों, कॉलेजों और कोचिंग सेंटरों की आग सुरक्षा ऑडिट का आदेश दिया है.
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अग्निकांड जांच की रिपोर्ट के प्रमुख बिंदु

सूरत के इस भयावह अग्निकांड में पेश की जाने वाली रिपोर्ट के कुछ अहम बिंदु सामने आए हैं. सूत्रों के अनुसार  तक्षशिला आर्केड को पहले ग्राउंड फ्लोर बनाने की ही अनुमति मिली थी, 2011 में इम्पैक्ट फी के कानून का फायदा उठाते हुए इसे कानूनी तौर पर वैधता दी गई. इम्पैक्ट फी के सामने 83 हजार फीस भरी गयी थी.

2013 में इसका नया प्लान पास किया गया और 2015 में सीओआर दिया गया. जैसे ही सीओआर मिला ग्राउंड फ्लोर के ऊपर बाकी की मंज़िलें बना दी गईं. सीओआर वीके परमार नाम के शख्स ने दिया था. परमार को निलंबित करने के आदेश दे दिए गए हैं. परमार ने बिना फायर सेफ्टी सिस्टम प्लान के ही इसे पास कर दिया था. इस लिए जिम्मेवार बिल्डर्स हरसुल वेकरिया, जिग्नेश पाघडाड की गिरफ्तारी की गई है.

हादसे में दमकल विभाग की भूमिका 

इस हादसे में दमकल विभाग की भूमिका की बात की जाए तो दमकल विभाग के कर्मियों को 4 बजकर 02 मिनट पर कॉल आया. कॉल मिलने के 6 मिनट के भीतर 24 कर्मी मौके पर पहुंच गए. घटना की गंभीरता को देखते ओएनजीसी में मौजूद सीआईएसएफ कंपनी को इसकी जानकारी दी गयी. क्रेन लेकर दमकल कर्मी मौके पर पहुंचे तो वहां लंबा जाम लगा हुआ था जिससे उन्हें पहुंचने में देरी हो गई. दमकल विभाग के दो अफसरों को निलंबित किया गया है.

सामने आया एक और वीडियो

शुक्रवार को हुई इस घटना की कई तस्वीरें और वीडियो अब भी सामने आ रहे हैं. इसी को लेकर एक वीडियो सामने आ रहा है जिसमें बच्चे एक खिड़कीनुमा रास्ते से सीढ़ी के सहारे से नीचे उतर रहे हैं. नीचे उनकी मदद करने के लिए कई लोग खड़े हैं तो उनको उतरने में मदद कर रहे हैं. कहा जा रहा है कि अगर ये तीसरी मंजिल से कूदने वाले बच्चों को भी ये रास्ता मालूम होता तो उन्हें इतनी ऊंचाई से कूदना नहीं पड़ता.

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