उद्धव ने क्यों और कैसे घोंपा भाई राज ठाकरे की पीठ में खंजर?

दिनेश मौर्या | News18Hindi
Updated: October 13, 2017, 9:57 PM IST
उद्धव ने क्यों और कैसे घोंपा भाई राज ठाकरे की पीठ में खंजर?
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे
दिनेश मौर्या | News18Hindi
Updated: October 13, 2017, 9:57 PM IST
मुंबई की सियासत 360 डिग्री पर घूम गई है. जो कुछ भी आज हुआ उसकी उम्मीद किसी ने नहीं की थी. उद्धव ने बीएमसी में अपनी सत्ता बचाने के लिये किसी और को नहीं बल्कि अपने भाई राज ठाकरे को ही धोखा दे दिया. उनकी पार्टी के 6 पार्षदों को तोड़कर अपने पाले में ले लिया.

आखिर ऐसा हुआ क्यों?
दरअसल, बीएमसी में शिवेसना के 84 और बीजेपी के 82 पार्षद थे. मुंबई के भांडुप में हुए उपचुनाव को जीतकर बीजेपी का आंकड़ा 83 पर पहुंच गया. इस जीत के बाद किरीट सोमैया ने सरेआम दावा किया था कि आने वाले कुछ महीने में मुंबई में बीजेपी के पार्षदों की संख्या बढ़ जाएगी और शिवसेना की कम हो जाएगी. मतलब मुंबई में मेयर शिवसेना का होगा.

बीजेपी के जोड़-तोड़ कर सत्ता हासिल करने के इतिहास डरे हुए थे उद्धव

किरीट सोमैया के इस बयान के बाद उद्धव के कान खड़े हो गये. उद्धव को डर सता रहा था कि जैसे गोवा, मणिपुर सहित कुछ और जगहों पर बीजेपी ने सत्ता में आने के लिये जो जोड़-तोड़ का पैंतरा आजमाया था वो बीएमसी में भी कभी भी आजमा सकती है. एशिया की सबसे अमीर नगर निगम बीएमसी में शिवसेना की जान और पहचान बसती है. ऐसे में उद्धव बीएमसी खोने का खतरा नहीं उठा सकते थे.

सत्ता की लालसा के आगे रिश्ते-नातों का कोई मोल नहीं
सत्ता हासिल करने के लिये ही 2005 में राज ने बाल ठाकरे को छोड़कर अपनी नई पार्टी बना ली. राज ने कम वक्त में ऊंचाई हासिल की लेकिन फिर उनके पार्टी का पतन शुरू हो गया. बीएमसी में सिर्फ 7 पार्षद चुनकर आए. इन्हीं के भरोसा राज ठाकरे मुंबई में अपना अस्तित्व बचाये हुए थे.

किरीट की धमकी के बाद जब उद्धव ठाकरे को बीएमसी में शिवसेना का केसरिया झंडा कायम रखना था तो उनके सामने सबसे आसान रास्ता यही था कि वो दूसरे पार्टी के पार्षदों को तोड़ें और अपनी पार्टी में ले लें. इस काम के लिये राज ठाकरे की पार्टी के पार्षद ही सबसे सटीक बैठते थे. बीएमसी उपचुनाव में मिली हार के महज 24 घंटे के भीतर उद्धव ने एमएनएस के 7 पार्षदों से संपर्क किया और 6 को अपने पाले में लाने में कामयाब रहे.

सदमे में हैं राज ठाकरे
पहले से ही अपने पार्टी का अस्तित्व बचाने की कोशिश कर रहे राज ठाकरे उद्धव के इस कदम के बाद सदमे में हैं. उद्धव उनके साथ ऐसा कर सकता हैं, अब भी इसका भरोसा राज को नहीं हो रहा है क्योंकि राज और उद्धव का दुश्मन अब कांग्रेस नहीं बल्कि बीजेपी है. और बीजेपी को हराने के लिये दोनों के साथ आने की कोशिशें भी चल रही थीं. लेकिन इसी बीच उद्धव के इस कदम ने राज ठाकरे को स्तब्ध कर दिया है.

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First published: October 13, 2017
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