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भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच एनआईए से कराने को तैयार हुई महाराष्‍ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार

News18Hindi
Updated: February 13, 2020, 3:18 PM IST
भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच एनआईए से कराने को तैयार हुई महाराष्‍ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार
भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच एनआईए को सौंपे जाने के बाद से ही केंद्र और महाराष्‍ट्र सरकार के बीच टकराव की स्थिति पैदा हो गई थी.

महाराष्‍ट्र की उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) सरकार अब तक भीमा कोरेगांव मामले (Bhima Koregaon Violence Case) की जांच एनआईए (NIA) को सौंपने पर नाराजगी जताती रही थी. आज महाराष्‍ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने एनआईए जांच पर सहमति जताई तो मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) ने कहा कि राज्‍य सरकार भी अपने स्‍तर पर अलग जांच कराएगी.

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  • Last Updated: February 13, 2020, 3:18 PM IST
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मुंबई. भीमा कोरेगांव हिंसा मामले (Bhima Koregaon Violence Case) की जांच राष्‍ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराने के मामले में महाराष्‍ट्र सरकार ने यू-टर्न ले लिया है. अब महाराष्‍ट्र की उद्धव ठाकरे (Uddhav Thackeray) सरकार ने मामले की जांच एनआईए से कराने पर सहमति जता दी है. इससे पहले महाराष्‍ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने जांच एनआईए को सौंपे जाने को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथ लिया था. महाराष्‍ट्र के गृह मंत्री अनिल देशमुख (Anil Deshmukh) ने कहा कि एनआईए से जांच कराने का का मामला मुख्यमंत्री कार्यालय (CM Office) पहुंच गया है. सीएम ऑफिस इस मामले को ओवर रूल कर सकता है.

बीजेपी ने कहा- कोर्ट के फैसले से पहले ही डर गई ठाकरे सरकार
एनसीपी से मंत्री नवाब मलिक (Nawab Malik) ने भी कहा है कि राज्य सरकार एनआईए के साथ ही अपनी ओर से भी मामले की जांच कराएगी. महाराष्‍ट्र सरकार की सहमति पर बीजेपी (BJP) ने कहा कि ठाकरे सरकार पुणे कोर्ट (Pune Court) का फैसला आने से पहले ही डर गई है. इस फैसले से केंद्र और महाराष्‍ट्र सरकार के बीच जांच को लेकर बने टकराव के खत्म होने की उम्मीद है. बता दें कि पुणे कोर्ट ने भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच एनआईए से कराने को लेकर दायर याचिका पर फैसला सुरक्षित रखा हुआ है.

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महाराष्‍ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार ने पुणे की एक अदालत में एनआईए जांच पर रोक लगाने की याचिका दायर की थी.


महाराष्‍ट्र सरकार ने पुणे की अदालत में दायर की हुई है याचिका
महाराष्ट्र की उद्धव ठाकरे सरकार 2018 में भीमा कोरेगांव हिंसा मामले की जांच एनआईए को सौंपे जाने से नाराज थी. यहां तक कि राज्‍य सरकार ने एनआईए की जांच पर रोक लगाने के लिए एडवोकेट जनरल से भी कानूनी सलाह ली थी. इसके बाद महाराष्‍ट्र सरकार ने पुणे की एक अदालत (Pune Court) में एनआईए जांच पर रोक लगाने की याचिका दायर की. कोर्ट ने सुनवाई के बाद 7 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था. पुणे कोर्ट 14 फरवरी को फैसला सुनाने वाली है. इससे पहले ही ठाकरे सरकार मामले की एनआईए जांच को राजी हो गई है.

राज्‍य पुलिस ने एनआईए को सहयोग देने से किया था इनकार केंद्र ने दो साल पहले हुई भीमा कोरेगांव हिंसा की जांच 24 जनवरी को एनआईए को सौंप दी थी. तभी से इस मामले पर राज्य और केंद्र सरकार के बीच खींचतान चल रही है. इस बीच महाराष्ट्र पुलिस (Maharashtra Police) ने एनआईए को भीमा-कोरेगांव हिंसा से जुड़े सबूत देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद राज्य के गृह मंत्री अनिल देशमुख ने कहा था कि जब तक केंद्र से इस मामले में कोई औपचारिक बात नहीं होती, तब तक पुलिस एनआईए की मदद नहीं करेगी. देशमुख ने कहा था कि केंद्र सरकार की तरफ से कोई आधिकारिक सूचना नहीं दी गई है. ऐसे में केंद्रीय जांच एजेंसी के साथ सहयोग करना संभव नहीं है.

महाराष्‍ट्र सरकार ने समीक्षा बैठक कर मामले में कुछ केस वापस लेने और जांच एसआईटी से कराए जाने पर चर्चा की थी.


समीक्षा बैठक में कुछ केस वापस लेने पर की गई थी चर्चा
महाराष्ट्र सरकार ने 23 जनवरी को भीमा-कोरेगांव मामले की समीक्षा की थी. इसके अगले ही दिन केंद्र ने जांच एनआईए को सौंप दी. अनिल देशमुख ने बताया था कि समीक्षा बैठक में मामले में कुछ केस वापस लेने और जांच एसआईटी से कराए जाने पर चर्चा हुई थी, लेकिन इस तरह बिना बताए मामले की जांच एनआईए को सौंपना संविधान के खिलाफ है. ये मामला 2018 का है. हर साल जब 1 जनवरी को दुनिया भर में नए साल का जश्न मनाया जाता है उस वक्त दलित समुदाय के लोग पुणे के पास भीमा कोरेगांव में जमा होते है. वे यहां 'विजय स्तम्भ' के सामने अपना सम्मान प्रकट करते हैं. ये विजय स्तम्भ ईस्ट इंडिया कंपनी ने उस युद्ध में शामिल होने वाले लोगों की याद में बनाया था.

मामले की जांच में देशभर से कई लोगों को किया था गिरफ्तार
इस स्तम्भ पर 1818 के युद्ध में शामिल होने वाले महार योद्दाओं के नाम अंकित हैं. ये वो योद्धा हैं, जिन्हें पेशवा के खिलाफ जीत मिली थी. साल 2018 इस युद्ध का 200वां साल था. ऐसे में इस बार यहां भारी संख्या में दलित समुदाय के लोग जमा हुए थे. इस मौके पर कई बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भाषण भी दिए थे. इसी दौरान अचानक हिंसा भड़क उठी. इस घटना में एक शख्स की मौत हो गई, जबकि कई लोग घायल हो गए थे. जांच के दौरान एजेंसियों ने देशभर में छापेमारी की और नक्‍सली संबंधों के आधार पर कई लोगों को गिरफ्तार किया. (रिपोर्ट- अभिषेक)

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First published: February 13, 2020, 3:18 PM IST
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