UK पैनल ने चीन पर उठाए सवाल, WHO में ड्रैगन के हस्तक्षेप पर फिर छिड़ी बहस

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग. (रॉयटर्स फाइल फोटो)

यूनाइटेड किंगडम (UK) की संसदीय समिति ने कहा, 'हमने देखा है कि चीन (China) जैसे देश ने महत्वपूर्ण संगठनों पर रणनीति के तहत कब्जा करने की कोशिश की और इन संगठनों के मूलभूत सिद्धांतों में बदलाव किया.'

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    नई दिल्ली. यूनाइटेड किंगडम (UK) के एक पैनल ने विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय संगठनों में चीनी हस्तक्षेप पर सवाल उठाए हैं. पैनल के इस वक्तव्य के बाद अब एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय संगठनों में सुधार को लेकर बहस छिड़ गई है. यूनाइटेड किंगडम की संसदीय समिति ने कहा, "हमने देखा है कि चीन जैसे देश ने महत्वपूर्ण संगठनों पर रणनीति के तहत कब्जा करने की कोशिश की और इन संगठनों के मूलभूत सिद्धांतों में बदलाव किया.''

    रिपोर्ट में कहा गया है कि उदार लोकतांत्रिक देशों द्वारा अंतरराष्ट्रीय मुद्दों को लेकर तन्मयता न दिखाए जाने का फायदा तानाशाही देशों ने उठाया है. अंतरराष्ट्रीय संगठनों पर चीन के कब्जे के विरोध में यूनाइटेड किंगडम के प्रयासों को लेकर इस रिपोर्ट ने कहा, 'चीन द्वारा कब्जे के प्रयासों को रोकने के लिए पूरी तरीके से कोशिश नहीं की गई.'

    विश्व स्वास्थ्य संगठन में हालत और खराब
    विश्व स्वास्थ्य संगठन के संदर्भ में तो रिपोर्ट में और भी ज्यादा चेतावनी वाली बातें कही गई हैं. कहा गया है कि वर्ल्ड हेल्थ असेंबली और सेक्रटेरियट के चुनाव में राजनीतिक प्रभाव के इस्तेमाल का भी खतरा है. सांसद टॉम टुगेन्ढाट की अगुआई वाले पैनल का कहना, 'हमारे सामने ये स्पष्ट है कि चीनी सरकार विश्व स्वास्थ्य संगठन में अपने प्रभाव को महत्वपूर्ण रणनीतिक लक्ष्य के तौर पर रखती है.' माना जाता है कि चीनी सरकार का WHO में इस वक्त अत्यधिक प्रभाव है.

    फंडिंग का रोल बेहद महत्वपूर्ण
    पैनल ने ये भी इशारा किया है कि फंडिंग के लिहाज से ज्यादा प्रभाव हासिल करने के मामले में WHO एक कमजोर संगठन है. स्वैच्छिक फंडिंग को लेकर संगठन के भीतर झुकाव बढ़ रहा है. इसके जरिए संगठन का एजेंडा प्रभावित किया जा सकता है. और योजनाओं को लागू करने में सेक्रेटरियट की संप्रभुता भी प्रभावित होती है.

    इसके अलावा चीन के संगठन में बढ़ते प्रभाव के लिए अमेरिका के डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन को भी एक कारण माना गया है. यही वो दौर था जब चीन ने अपना प्रभाव WHO में बढ़ाया. मई 2020 में ट्रंप ने संगठन को सभी फंडिंग रोक दी थी और यहां तक कि वो इससे बाहर निकल गए थे. (MAHA SIDDIQUI की रिपोर्ट)

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