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Ukraine Crisis: पाबंदियों का जोखिम, आपूर्ति पर असर, भारत पर भी आएगी यूक्रेन संकट की आंच?

Ukraine Crisis: पाबंदियों का जोखिम, आपूर्ति पर असर, भारत पर भी आएगी यूक्रेन संकट की आंच?

S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का पहला बेड़ा पंजाब सेक्टर में होगा तैनात. फाइल फोटो

S-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम का पहला बेड़ा पंजाब सेक्टर में होगा तैनात. फाइल फोटो

Ukraine Crisis: पाबंदियों की धमकियों की बाद भी S400 की खरीद को लेकर भारत का मत बदला नहीं है. भारत को इस मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी होना बीते साल के अंत से शुरू हो गई हैं. CAATSA के तहत पाबंदियों को लेकर साल 2019 में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था भारत के 'कई देशों के साथ कई संबंध हैं. उनमें से कई की कुछ प्रतिष्ठा है, उनका इतिहास है. तो मुझे लगता है कि हम वह करेंगे, जो हमारे राष्ट्रीय हित में है और एक बार फिर कहता हूं, उस रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा वह क्षमता है, जिससे हर देश के दूसरे देश के राष्ट्रीय हित को प्रोत्साहित करे.'

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(माहा सिद्दीकी)
नई दिल्ली. यूक्रेन (Ukraine) संकट के बीच भारत की तरफ से की गई S400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम की खरीदी चर्चा का विषय बन गई है. दरअसल, भारत ने यह लेनदेन मॉस्को के साथ किया और यूक्रेन मुद्दे पर रूस और अमेरिका के बीच पहले ही तनाव जारी है. ऐसे में CAATSA के तहत पाबंदियों का जोखिम भी बना हुआ है. फिलहाल, भारत सीमा संबंधी मुद्दे से दूरी बनाने की कोशिश में है. वहीं, भारत ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि वह स्वतंत्र विदेश नीति बनाए रखता है, जिसकी झलक इस खरीद में देखी गई.

अब सवाल है कि CAATSA पाबंदियों की संभावनाएं और इस सौदे के चलते अमेरिका और भारत के द्विपक्षीय संबंधों पर क्या असर पड़ सकता है? इसके जवाब में अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस कहते हैं, ‘मुझे लगता है कि यह रूस की उस अस्थिर करने वाली भूमिका पर प्रकाश डालता है, जिसे वह क्षेत्र ही नहीं बल्कि संभावित रूप से उससे आगे भी निभा रहा है. जब CAATSA पाबंदियों की बात आती है, तो आपने मुझे कहते हुए सुना होगा कि हमने इस लेनदेन के संबंध में फैसला तैयार नहीं किया है, लेकिन यह ऐसा कुछ है, जिसे CAATSA के तहत इस खास लेनदेन पर पाबंदियों के जोखिम को देखते हुए हम भारत सरकार से चर्चा करना जारी रखेंगे. भारत हो या कोई अन्य देश हम लगातार रूसी हथियारों के नए लेनदेन से बचने की अपील कर रहे हैं.’

क्या है CAATSA
CAATSA का मतलब काउंटरिंग अमेरिकाज एडवर्सरीज थ्रू सैंक्शन एक्ट है. यह कानून राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल में साल 2017 में सामने आया था. ट्रंप ने ईरान, रूस औऱ उत्तर कोरिया पर दंड लगाने के लिए यह कानून बनाया था. अमेरिका की तरफ से यह कहा जाता रहा है कि CAATSA के तहत लगाई गई पाबंदियां विरोधियों के लिए हैं और इसका मतलब सहयोगियों और साझेदारों को दंडित करना नहीं है. हालांकि, जब तुर्की ने रूस के साथ S400 सौदा किया था, तो अमेरिका ने दिसंबर 2020 में उसके खिलाफ CAATSA की पाबंदियां लागू की थी.

भारत अपनी बात पर अटल
पाबंदियों की धमकियों की बाद भी S400 की खरीद को लेकर भारत का मत बदला नहीं है. भारत को इस मिसाइल सिस्टम की डिलीवरी होना बीते साल के अंत से शुरू हो गई हैं. CAATSA के तहत पाबंदियों को लेकर साल 2019 में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था भारत के ‘कई देशों के साथ कई संबंध हैं. उनमें से कई की कुछ प्रतिष्ठा है, उनका इतिहास है. तो मुझे लगता है कि हम वह करेंगे, जो हमारे राष्ट्रीय हित में है और एक बार फिर कहता हूं, उस रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा वह क्षमता है, जिससे हर देश के दूसरे देश के राष्ट्रीय हित को प्रोत्साहित करे.’

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नेड प्राइस के बयान के बाद विदेश मंत्रालय ने भी यही बात दोहराई. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि भारत स्वतंत्र विदेश नीति का पालन करता है, जो रक्षा खरीद में भी नजर आ रहा है. उन्होंने कहा कि इसमें शामिल सभी गतिविधियां भारत के राष्ट्रीय हित और सुरक्षा से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने जानकारी दी कि वे यूक्रेन से संबंधी सभी घटनाक्रमों पर करीब से नजर बनाए हुए हैं. साथ ही बागची ने यह जानकारी भी दी कि कीव में हमारा दूतावास भी स्थानीय घटनाक्रमों को देख रहा है. विदेश मंत्रालय ने कूटनीतिक प्रयासों के जरिए शांतिपूर्ण समाधान का आह्वान किया है.

ये हो सकता है असर
सात सालों में पहली बार ब्रेंट की कीमतें गुरुवार को बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल हो गई है. प्रमुख रूप से इसका कारण यूक्रेन के बढ़ते संकट और पश्चिम एशिया में हूती और संयुक्त अरब अमीरात के बीच जारी तनाव हो सकता है. इन दोनों क्षेत्रों में आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने के चलते कीमतें और बढ़ सकती हैं. ऐसे में पहले ही घरेलू ईंधन की बढ़ी कीमतों का सामना कर रहे भारतीयों के लिए मुश्किल हो सकती हैं. सवाल है कि अगर क्रूड ऑयल की कीमतें बढ़ती या बदलती हैं, तो क्या केंद्र और राज्य फिर ज्यादा टैक्स का रास्ता अपनाएंगे? क्या कह अगले सप्ताह संसद में पेश होने जा रहे बजट को भी प्रभावित कर सकता है.

फिलहाल, सभी की नजरें 2 फरवरी को होने वाली OPEC बैठक पर हैं, जिसमें रूस की अगुवाई वाले सहयोगी भी शामिल हैं. न्यूज18 को पता चला है कि यूक्रेन संकट को लेकर ईयू भारत के साथ विचार साझा कर रहा है. खास बात है कि यूक्रेन दूसरा सबसे बड़ा यूरोपीय देश है और इसे मान्यता देने वाले पहले देशों में भारत का नाम भी शामिल है. MEA की वेबसाइट के अनुसार, यूक्रेन में करीब 18 हजार भारतीय छात्र शिक्षा हासिल कर रहे हैं. इनमें से ज्यादातर मेडिसिन से जुड़े हैं. वहीं, फार्मा, आईटी, इंजीनियरिंग और शिक्षा में भी भारतीय शामिल हैं. खास बात है कि अगर तनाव बढ़ता है, तो भारतीयों की वापसी भी जरूरी मुद्दा बन जाएगा. अमेरिका पहले ही अपने राजनयिकों को कीव से निकाल चुका है. इधर, भले ही हम दूरी के चलते इस संकट से खुद को सुरक्षित महसूस करें, लेकिन भारत के लिए भी इस संबंध में काफी कुछ दांव पर है.

Tags: Russia, Ukraine

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