खेत जुताई के पैसे नहीं थे तो किसान ने इजाद की नई तरकीब

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Updated: August 31, 2019, 3:56 PM IST
खेत जुताई के पैसे नहीं थे तो किसान ने इजाद की नई तरकीब
खेत जुताई के पैसे नहीं थे तो किसान ने इजाद की नई तरकीब.

किराए की भुगतान करने की असमर्थता ने बोलम मुथैया (Bollam Muthayya) की एक नई तरकीब खोजने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने अपने पुराने साइकिल (Bicycle) के आगे वाले पहिए और हैंडल के साथ लकड़ी के तख्त और रस्सियों का इस्तेमाल कर उन्होंने एक नए प्रकार के हल की खोज कर डाली.

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तेलंगाना (Telangana) के अंदरूनी इलाके के एक किसान ने अपने खेत को जोतने के तरीके ने उसे रातों-रात गांव के ही 2000 लोगों के बीच मशहूर बना दिया है. 32 साल के बोलम मुथैया तेलंगाना के नलगोंडा (Nalgonda) जिले के एक सुदूर गांव चारला गौराराम के रहने वाले है, और पेशे से किसान हैं. उन्होंने खेत को जोतने के लिए अपनी पुरानी साइकिल का इस्तेमाल कर एक स्वयं निर्मित डिवाइस बनाया. ऐसा ट्रैक्टर से जुताई का पैसा नहीं होने के कारण किया. उनका ये कारनामा पूरे इलाके के लिए मिशाल बन चुका है. इस इलाके के के अधिकांश गांवों में ट्रैक्टर वाला हल किराए पर लेना एक आम बात है.

उन्होंने बताया, "मेरे पास चार एकड़ जमीन है, जिसमें से मैं एक एकड़ में कपास के बीज बोता हूं. बुवाई के लिए खेत की जुताई जरूरी है. उसके लिए अपने खेत को कम से कम तीन बार गिरवी रखना होगा, जिसकी लागत 6,000 रुपये होगी. मेरे पास अपने जुताई के हल नहीं हैं, यही वजह है कि मुझे मजदूरों को रखने की जरूरत पड़ती है."

कैसे बनाया इस डिवाइस को

किराए की भुगतान करने की असमर्थता ने मुथैया की एक नई तरकीब खोजने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने अपने पुराने साइकिल के आगे वाले पहिए और हैंडल के साथ लकड़ी के तख्त और रस्सियों का इस्तेमाल कर उन्होंने एक नए प्रकार के हल की खोज कर डाली. उन्होंने पहिए के परिधि में रस्सी की परतों को बांधा, जिससे इस नए डिवाइस को आगे खींचने में मदद मिली. इस किसान के पास एक भी मवेशी नहीं है, कि उसका इस्तेमाल कर वो पारंपरिक तरीकों से अपने खेत को जोत सकता है.

पत्नी रेणुका भी देती हैं साथ

इस नए तकनीक के संचालन में उनकी पत्नी रेणुका भी उनका खूब साथ निभाती हैं. मवेशी के जगह ये खुद ही हल को खिंचने का काम करता हैं. रेणुका मुथैया को रस्सियों का इस्तेमाल करके हल खींचकर मिट्टी की ऊपरी परत को मोड़ने में मदद करती है. दूसरे छोर पर, मुथैया डिवाइस को धक्का देकर पहिए को संभालता है. मिट्टी की परत को हटाने के लिए जमीन पर पड़े स्टील प्लेटों को पहिए से रफ्तार मिलती है.

गांव के बाकी लोग रोज उनसे मिलने आते हैं
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हाल के दिनों में मिली अपनी इस शोहरत का आनंद लेते हुए मुथैया ने कहा कि जब वे अपने इस सफल प्रयोग की मदद से खेत पर काम कर रहे होते हैं तो गांव के बाकी लोग उनसे मिलने आते हैं. मुथैया ने कहा, "हम जिन लोगों को खेत की जुताई करने के लिए काम पर रखते हैं, वे समय पर नहीं आते हैं और हमें इंतजार करना पड़ता है. इसलिए हमने इसे खुद करने का फैसला किया. ये शारीरिक मेहनत वाला काम है, लेकिन इससे हम थोड़ा सा पैसा बचा पा रहे हैं, इसका हमें फायदा हो रहा है."

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First published: August 31, 2019, 3:56 PM IST
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