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हाईकोर्ट में कर्नाटक पुलिस ने कहा- 'आध्यात्मिक टूर' पर हैं नित्यानंद इसलिए नहीं भेजा नोटिस

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Updated: February 4, 2020, 12:02 AM IST
हाईकोर्ट में कर्नाटक पुलिस ने कहा- 'आध्यात्मिक टूर' पर हैं नित्यानंद इसलिए नहीं भेजा नोटिस
अदालत को सौंपे गए अपने हलफनामे में पुलिस ने कहा कि वह नित्यानंद को व्यक्तिगत रूप से नोटिस जारी करने में असमर्थ थी.

डिप्टी सुप्रिटेंडेंट (सीआईडी) बलराज बी ने एक बयान में अदालत को बताया कि उसने बिदादी आश्रम में किसी कुमारी अर्चनानंद को नोटिस दी थी. अर्चनानंद ने दावा किया कि उसे नित्यानंद के ठिकानों के बारे में जानकारी नहीं थी.

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  • Last Updated: February 4, 2020, 12:02 AM IST
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बेंगलुरु. कर्नाटक पुलिस (Karnataka Police) ने सोमवार को हाईकोर्ट (High Court) को जानकारी दी कि वह रेप आरोपी नित्यानंद (Rape Accused Nityanand) को नोटिस नहीं भेज सकते हैं. पुलिस ने कहा कि उनका मानना है कि नित्यानंद 'आध्यात्मिक दौरे' पर हैं. अदालत को सौंपे गए अपने हलफनामे में पुलिस ने कहा कि वह नित्यानंद को व्यक्तिगत रूप से नोटिस जारी करने में असमर्थ थे.

डिप्टी सुप्रिटेंडेंट (सीआईडी) बलराज बी ने एक बयान में अदालत को बताया कि उसने बिदादी आश्रम में किसी कुमारी अर्चनानंद को नोटिस दी थीं, अर्चनानंद ने दावा किया कि उसे नित्यानंद के ठिकानों के बारे में जानकारी नहीं थी. अर्चनानंद ने एक हलफनामा भी दायर किया जिसमें कहा गया कि उसे 31 जनवरी को जारी नोटिस को स्वीकार करने के लिए मजबूर किया गया था.

कोर्ट ने उठाए ये सवाल
इसके बाद जस्टिस जॉन माइकल कुन्हा ने पुलिस की खिंचाई करते हुए कहा कि क्या यह पहली बार था जब वे समन जारी कर रहे थे. उन्होंने अभियोजन पक्ष से पूछा कि क्या इससे मामले में देरी हो रही है. न्यायाधीश ने पब्लिक प्रॉसिक्यूटर से यह भी सवाल किया कि क्या जांच के इस मोड़ पर आरोपी की उपस्थिति आवश्यक थी, जिस पर बाद में जवाब दिया गया कि नित्यानंद की अदालत में मौजूदगी की आवश्यकता नहीं थी.

अभियोजक ने फिर शिकायतकर्ता लेनिन द्वारा बनाई गई अनुपस्थिति और बयान से पलटने पर ध्यान केंद्रित किया, जो मामले में मुख्य गवाह भी है, उसे मुकदमे में देरी के लिए दोषी ठहराया.

'नित्यानंद के पास हो सकते हैं दो पासपोर्ट'
लेकिन शिकायतकर्ता के वकील अश्विन वैश्य ने तर्क दिया कि ट्रायल से बचने के लिए नित्यानंद देश छोड़कर भाग गए थे. जबकि अभियुक्त को पहले ही ट्रायल अदालतों में अपनी याचिका के माध्यम से कई छूट मिल चुकी थी, उच्च न्यायालय ने खुद ही उसे जमानत दे दी थी.वैश्य ने समाचार एजेंसी एएनआई का हवाला देते हुए यह भी उल्लेख किया कि आरोपी ने इक्वाडोर में शरण मांगी थी, जिसे अस्वीकार कर दिया गया था, और उनके पास दो पासपोर्ट हो सकते हैं.

विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अदालत ने मामले को 5 फरवरी तक के लिए सुरक्षित रख लिया.

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First published: February 3, 2020, 11:52 PM IST
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