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स्टूडेंट्स की गिरफ्तारी के बाद BHU के प्रोफेसरों ने किया CAA का विरोध, बोले- 'गांधी-टैगोर की भूमि पर यह स्वीकार नहीं'

बीएचयू के बाहर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी. (फोटो- PTI)

बीएचयू के बाहर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान भारी पुलिस बल की तैनाती की गई थी. (फोटो- PTI)

अपने पत्र में प्रोफेसरों (Professors) ने देश की वर्तमान स्थिति पर अपने दुख को जाहिर किया है. उन्‍होंने कहा है कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटिजंस (NRC) को लागू करने का प्रस्ताव समाज को सांप्रदायिक आधार पर बांटने का प्रयास है.

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    नई दिल्ली. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) के 51 प्रोफेसरों ने नेशनल रजिस्‍टर ऑफ सिटिजंस (NRC) और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ बुधवार को एक हस्ताक्षर अभियान की शुरुआत की. अपने पत्र में इन प्रोफेसरों ने नए पास हुए नागरिकता संशोधन कानून की आलोचना की गई है, क्योंकि यह धार्मिक आधार पर नागरिकता देता है. BHU में व्यापक प्रदर्शन 19 दिसंबर को कई स्टूडेंट्स की गिरफ्तारी (Arrest) के बाद शुरू हुए थे. नागरिकता कानून के खिलाफ वामपंथी संगठनों (Left Organisations) के बुलाए प्रदर्शनों के दौरान कई छात्रों को गिरफ्तार कर लिया गया था. उनके ऊपर दंगों से संबंधित धाराओं के अंतर्गत मुकदमे दर्ज किए गए थे.

    'CAA-NRC बहुलतावादी लोकतंत्र की आत्मा के खिलाफ'
    इस पत्र में बनारस हिंंदू विश्वविद्यालय (BHU), आईआईटी बीएचयू (IIT-BHU) और संबद्ध कॉलेजों के प्रोफेसरों ने लिखा है, 'हम बीएचयू, आईआईटी बीएचयू और संबद्ध कॉलेजों के अध्यापक हाल में संसद से पारित नागरिकता संशोधन विधेयक और उसके बाद राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (NRC) लागू किए जाने को लेकर बहुत दुखी और चिंतित हैं. यह सब पूरी तरह आजादी की लड़ाई और हमारे बहुलतावादी लोकतंंत्र की आत्मा के खिलाफ है.

    डॉ. भीमराव आंबेडकर, महात्‍मा गांधी (Mahatma Gandhi) और रबींद्रनाथ टैगोर की धरती पर इसे स्वीकार नहीं किया जा सकता. साफ-साफ यह समाज को सांप्रदायिक आधार पर बांटने की कोशिश है ताकि आम जन-जीवन के वास्तविक मुद्दे पीछे धकेले जा सकें.'

    'यह पिछड़ी नीति, समाज और इतिहास की समझ से शून्य'
    पत्र में आगे लिखा गया है, 'दुनिया भर में प्रगतिशील मूल्यों के अगुवा होने का दावा करने वाला और विश्वगुरु का लक्ष्य रखने वाला हमारा आधुनिक राष्ट्र-राज्य (Modern Nation-State) ऐसी पिछड़ी नीति लेकर आया है, जो समाज और इतिहास की समझ से शून्य है. यह नीति समावेश की भारतीय दार्शनिक रवायत के खिलाफ है. यह देखना दुखद है कि भारत के समावेश की महान परंपरा अब ऐसी जगह पहुंच चुकी है, जहां अपने ही मुल्क में हमारे अपने ही भाइयों को नागरिकता से खारिज किया जा रहा है.

    हम सरकार से इस कानून के दूरगामी परिणामों के बारे में सोचने की अपील करते हैं. साथ ही उम्मीद करते हैं कि पार्टी हित के ऊपर राष्ट्रहित का ख्याल रखा जाएगा. हम प्रतिरोध करने वालों से भी अपील करते हैं कि वे बिना हिंसा में फंसे लोकतांंत्रिक और शांतिपूर्ण तरीके से प्रतिरोध दर्ज करें. हम जामिया मिलिया इस्लामिया, BHU जैसे विश्वविद्यालयों में विद्यार्थियों के दमन की भी निंदा करते हैं.'

    डिग्री लौटाने वाले छात्र ने कही शिक्षकों-छात्रों के साथ आने की बात
    बीएचयू के कला संकाय में मास्टर्स के स्टूडेंट और हाल में हुए दीक्षांत समारोह में अपनी डिग्री लौटाने वाले  रजत सिंह ने कहा, 'यह पहली बार है, जब मैं बीएचयू के शिक्षकों को सरकार की नीतियों के खिलाफ प्रदर्शन करते देख रहा हूं. CAA-NRC के खिलाफ शिक्षकों का विरोध बहुत अच्छा कदम है. प्रदर्शनकारी छात्रों की झूठी गिरफ्तारी के खिलाफ स्टूडेंट्स लड़ रहे हैं. हम देखेंगे कि कैसे शिक्षक और छात्र, स्टूडेंट्स पर हुए अत्याचारों और CAA-NRC के खिलाफ साथ आ सकते हैं.'

    यह भी पढ़ें: जादवपुर यूनिवर्सिटी के छात्रों ने राज्यपाल को चांसलर के तौर पर निष्कासित किया

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