CAA : नए कानून का काम आखिरी चरण में, नागरिकता पाने के लिए लोगों को देना होगा धर्म का सबूत

CAA : नए कानून का काम आखिरी चरण में, नागरिकता पाने के लिए लोगों को देना होगा धर्म का सबूत
सूत्रों ने News18 को जानकारी दी कि नए कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए प्रताड़ित व्यक्ति को नागरिकता पाने के लिए अपने धार्मिक विश्‍वास का सबूत देना जरूरी होगा.

सूत्रों ने News18 को जानकारी दी कि नए कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए प्रताड़ित व्यक्ति को नागरिकता पाने के लिए अपने धार्मिक विश्‍वास का सबूत देना जरूरी होगा.

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  • Last Updated: January 28, 2020, 11:32 AM IST
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नई दिल्ली. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ एक ओर जहां देश भर में प्रदर्शन हो रहे हैं वहीं सरकार के सूत्रों ने जानकारी दी कि इस नए कानून के लिए नियम बनाने का काम आखिरी चरण में है. सूत्रों ने CAA के प्रावधानों की News18 को जानकारी दी कि नए कानून के तहत पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से आए प्रताड़ित व्यक्ति को नागरिकता पाने के लिए अपने धार्मिक विश्‍वास का सबूत देना जरूरी होगा.

सूत्र ने बताया कि सरकार सीएए के तहत नागरिकता आवेदन के लिए अलग विंडो की असम सरकार की मांग को भी स्वीकार कर सकती है. राज्य ने गृह मंत्रालय से अनुरोध किया था कि यह विंडो कुछ समय के लिए ही खुले. यह समयसीमा कम से कम तीन महीने की हो सकती है, ताकि अवैध अप्रवासी नागरिकता के लिए अप्लाई कर सकें.

गौरतलब है कि भारत और विदेशों में रहने वाले नागरिकों और राज्य सरकारों ने संशोधित कानून को 'भेदभावपूर्ण' बताते हुए विरोध किया है. सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार ने विधानसभा में सीएए के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया, जो ऐसा करने वाला चौथा राज्य बन गया. इससे पहले केरल, राजस्थान और पंजाब ने प्रस्ताव पारित किया था.



EU की संसद में होगी बहस
वहीं ईयू संसद सीएए के खिलाफ कुछ सदस्यों द्वारा पेश किए गए प्रस्ताव पर बहस और मतदान करेगी. संसद में इस सप्ताह की शुरुआत में यूरोपियन यूनाइटेड लेफ्ट/नॉर्डिक ग्रीन लेफ्ट (जीयूई/एनजीएल) समूह ने प्रस्ताव पेश किया था जिस पर बुधवार को बहस होगी और इसके एक दिन बाद मतदान होगा. प्रस्ताव में कहा गया है, ‘सीएए भारत में नागरिकता तय करने के तरीके में खतरनाक बदलाव करेगा. इससे नागरिकताविहीन लोगों के संबंध में बड़ा संकट विश्व में पैदा हो सकता है और यह बड़ी मानव पीड़ा का कारण बन सकता है.’

बता दें कि सीएए भारत में पिछले साल दिसंबर में लागू किया गया था जिसे लेकर देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं. भारत सरकार का कहना है कि नया कानून किसी की नागरिकता नहीं छीनता है बल्कि इसे पड़ोसी देशों में उत्पीड़न का शिकार हुए अल्पसंख्यकों की रक्षा करने और उन्हें नागरिकता देने के लिए लाया गया है.

(अरुणिमा के इनपुट के साथ)

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