FD की तरह है भूमिगत जल, विशेष हालातों में ही हो उपयोग की इजाजत: संसदीय समिति

समिति ने यह सुझाव पेयजल की बढ़ती मांग तथा भूमिगत जल के बिगड़ते स्तर को ध्यान में रखते हुए दिया है.

भाषा
Updated: August 12, 2018, 11:32 PM IST
FD की तरह है भूमिगत जल, विशेष हालातों में ही हो उपयोग की इजाजत: संसदीय समिति
जैसलमेर में पानी के लिए मशक्कत करती महिलाएं. (Photo– Getty images)
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Updated: August 12, 2018, 11:32 PM IST
संसद की एक समिति ने भूमिगत जल को बैंकों में जमा की जाने वाली ‘सावधि जमा(एफडी)’ की तरह बताया है. उसने कहा है कि इस पानी के इस्तेमाल की अनुमति केवल असाधारण परिस्थितियों में ही दी जानी चाहिये, वह भी केवल सीमित मात्रा में. समिति ने यह सुझाव पेयजल की बढ़ती मांग तथा भूमिगत जल के बिगड़ते स्तर को ध्यान में रखते हुए दिया है.

उसने कहा कि सरकार को सार्वजनिक -निजी भागीदारी मॉडल पर आधारित जल पैकेजिंग उद्योग को प्रोत्साहित करना चाहिए. जल संसाधन पर गठित संसद की स्थायी समिति ने ‘उद्योगों द्वारा पानी के व्यावसायिक दोहन के सामाजिक-आर्थिक प्रभाव’ पर एक हालिया रिपोर्ट में कहा कि जल पैकेजिंग इकाइयों की स्थापना सरकार की पहल थी ताकि लोगों को पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके.

समिति का मानना है कि उपभोग के लिए पानी की मांग और आपूर्ति के बीच अंतर को पाटना सरकार की सबसे बड़ी सामाजिक जिम्मेदारी है. रिपोर्ट में कहा गया है, ‘समिति सुझाव देती है कि साफ एवं सुरक्षित पानी की उपलब्धता में सरकार को महत्वपूर्ण भूमिका निभानी चाहिए. भूमिगत जल हमारे लिए निश्चित जमापूंजी की तरह है और यह भविष्य में पानी की मांग की पूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.’

समिति पूरी मजबूती के साथ यह सिफारिश करती है कि सरकार को भूमिगत जल का इस्तेमाल करने की अनुमति केवल असाधरण परिस्थितियों में देनी चाहिए.
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