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2G घोटाले का दाग मिटाने को फिर से नीलगिरि की 'प्रजा' के भरोसे ए राजा

2G घोटाले का दाग मिटाने को फिर से नीलगिरि की 'प्रजा' के भरोसे ए राजा

ए. राजा

ए. राजा

नीलगिरि तमिलनाडु की 19वीं लोकसभा सीट है, जो कि पश्चिमी घाट पर बसा एक शहर है. यह सीट शुरुआत से ही कांग्रेस का गढ़ रही है. 2014 के आम चुनाव में ए. राजा को इस सीट पर एआईएडीएमके उम्मीदवार ने हराया था. ए. राजा के हार की वजह बना 2-G स्कैम.

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    2-G स्कैम को लेकर राजनीतिक जगत के लोग क्या सोचते हैं, ए. राजा को इससे फर्क नहीं पड़ता है. वे अपने विरोधियों को गलत साबित करने के लिए जनता की अदालत में जा पहुंचे हैं. ए. राजा तमिलनाडु की नीलगिरि रिजर्व सीट से द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं. घोटाले के दाग से बेपरवाह ए. राजा नीलगिरि में अपनी दोबारा जीत को लेकर आश्वस्त भी हैं. इस सीट पर उनका मुकाबला ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) के उम्मीदवार से है.

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    नीलगिरि तमिलनाडु की 19वीं लोकसभा सीट है, जो कि पश्चिमी घाट पर बसा एक शहर है. यह सीट शुरुआत से ही कांग्रेस का गढ़ रही है. 2014 के आम चुनाव में ए. राजा को इस सीट पर एआईएडीएमके उम्मीदवार ने हराया था. ए. राजा के हार की वजह बना 2-G स्कैम. तमिलनाडु के पूर्व सीएम एम. करुणानिधि के करीबी रहे ए. राजा नीलगिरि सीट पर बाहरी उम्मीदवार के तौर पर मैदान में होंगे. यानी ये उनकी प्रतिष्ठित सीट नहीं है. ए. राजा मूल रूप से तमिलनाडु के मैदानी क्षेत्र पेरामबलूर से आते हैं. यहां से वह डीएमके की टिकट पर दो बार चुनाव भी जीत चुके हैं.

    नीलगिरी सीट के अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित होने के बाद ए. राजा 2009 के चुनाव में पेरामबलूर के बजाय इस सीट से मैदान में उतरे और जीत हासिल की. लेकिन, 2014 में उन्हें इसी सीट से एआईएडीएमके के गोपालाकृष्णन से शिकस्त मिली.

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    एआईएडीएमके ने इस बार नीलगिरि सीट से एम. त्यागराजन को खड़ा किया है. इस सीट पर कुछ छोटी पार्टियों ने भी उम्मीदवार खड़े किए हैं, लेकिन मुख्य मुकाबला डीएमके उम्मीदवार ए. राजा और एआईएडीएमके उम्मीदवार त्यागराजन के बीच है.


    बता दें कि 2019 के लोकसभा चुनाव में तमिलनाडु में धुर-विरोधी एआईएडीएमके व विपक्षी डीएमके 8 सीटों पर एक दूसरे के आमने-सामने हैं. दोनों दलों के बीच दक्षिण चेन्नई, कांचीपुरम (अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित), तिरुवनंतपुरम, तिरुनेलवेली, मयीलादुतुरै, सलेम, नीलगिरि (अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित) और पोल्लाची सीट पर सीधी लड़ाई है. एआईएडीएमके और डीएमके पार्टियां राज्य में 20 सीटों पर चुनाव लड़ रही हैं. शेष 19 सीटें उन्होंने अपनी-अपनी सहयोगी पार्टियों को दिया है.

    मजे की बात ये है कि स्थानीय लोगों के लिए भी ये बात मायने नहीं रखती कि ए. राजा का नाम टेलीकॉम घोटाले में आया. ऐसे ही एक पूर्व सरकारी कर्मचारी एम सेल्वलिंगम News18 से कहते हैं, 'टूजी घोटाला हमारे जैसे लोगों के लिए नहीं है. ये आप जैसे लोगों के लिए एक मुद्दा हो सकता है. हां, वे खुलकर इस बारे में बात कर रहे हैं. हमारे लिए बस इतना मायने रखता है कि उन्होंने अच्छा काम किया है. कोई भी उनसे मिल सकता है और वो उसकी मदद करते हैं.'

    वहीं, ऊटी में ऑटो चलाने वाले रघु बीजेपी की वजह से ए. राजा को वोट करना चाहते हैं. वो कहते हैं, 'मैं जिंदगी भर एआईएडीएमके का समर्थक रहा हूं. लेकिन इस बार ए. राजा के लिए वोट करूंगा. क्योंकि मैं एआईएडीएमके की बीजेपी के साथ गठबंधन से खुश नहीं हूं.'


    रघु आगे बताते हैं, 'बीजेपी के साथ गठबंधन एआईएडीएमके को बर्बाद कर देगा. यहां के लोगों में कई कारणों से बीजेपी को लेकर गुस्सा है. हमें लगता है कि मोदी ने तमिलनाडु के गौरव को आहत किया है. ओ. पन्नीरसेल्वम (OPS) और ई. पलानीस्वामी (EPS) दोनों दिल्ली के शासकों के जागीरदारों की तरह व्यवहार कर रहे हैं. इसबार मैंने डीएमके को वोट करने का फैसला लिया है. अम्मा (जयललिता) के निधन के बाद एआईएडीएमके में अब कुछ नहीं रखा है.'

    छोटे व्यापारी विलियम को भी कुछ फर्क नहीं पड़ता कि ए. राजा का नाम 2-G स्कैम में आया. वो कहते हैं, 'ए राजा निर्दोष हैं. उन्हें इस स्कैम में साजिशन फंसाया गया. ए राजा लोगों के साथ आसानी से घुल-मिल जाती है. जमीनी मुद्दों को समझते हैं. हमें उम्मीद है कि वह नीलगिरि में बहुत अच्छा प्रदर्शन करेंगे. अगर चुनाव बाद यूपीए केंद्र की सत्ता में आती है, तो वह केंद्रीय मंत्री भी बन सकते हैं.'

    उनका ये भी मानना है, 'कोर्ट ने राजा को बरी कर दिया है. इससे साबित होता है कि 2-G घोटाला हुआ ही नहीं. यह घोटाला नियंत्रक व महालेखा परीक्षक (CAG) विनोद राय के दिमाग की उपज थी. उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिए. उन्होंने एक बड़ा घोटाला 'बनाया', जबकि घोटाला हुआ ही नहीं.'

    इस क्षेत्र में उम्मीदवारों की प्रतिष्ठा पर ऊंचे दांव लगे हैं. एआईएडीएमके में आंतरिक सिर फुटौव्वल का फ़ायदा भी राजा को मिल रहा है. पार्टी के अंदरूनी हालात से वाकिफ एक समर्थक का कहना है कि दो साल पहले जयललिता की मौत के बाद EPS-OPS की जोड़ी पार्टी में अनुशासन बनाए रखने में नाकाम रही है. जो लोग पार्टी की बीजेपी से गठजोड़ के खिलाफ हैं, वे इस चुनावी अभियान से खुद को अलग रखेंगे या फिर यह भी हो सकता है कि वे डीएमके को वोट दें.


    एआईएडीएमके से अलग हुआ धड़ा एएमएमके का नेतृत्व किसी जमाने में जयललिता की बहुत करीबी रहीं शशिकला नटराजन के भतीजे टीटीवी दिनकरन कर रहे हैं. वे भी EPS-OPS के वोट में सेंध लगाएंगे.

    कोयंबटूर स्थित राजनीतिक विश्लेषक रतन कुमार कहते हैं, 'मेरे हिसाब से राजा का चुनाव जीतना तय है. वह 100% नहीं बल्कि 200% चुनाव जीत रहे हैं. नीलगिरि में वे काफी लोकप्रिय हैं. पिछली बार उनके खिलाफ जो नकारात्मक प्रचार हुआ, उसकी वजह से वे चुनाव हार गए और यह भी याद रखिए कि उस समय जयललिता जीवित थीं और वह मुख्यमंत्री थीं.'

    बता दें कि नीलगिरि में 18 अप्रैल को राज्य की 38 लोकसभा सीटों के साथ ही मतदान होना है.

    (मूल रूप से अंग्रेजी में ये आर्टिकल पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें.)

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    Tags: 2G scam, A Raja, Aiadmk, DMK, Elections 2019, Lok Sabha Election 2019, Lok sabha elections 2019

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