ये खास दर्जा खत्म कर अमेरिका ने दिया झटका, तो भारत ने कहा निराशाजनक

जीएसपी का लाभ लेने वाला भारत सबसे बड़ा विकासशील देश रहा, जिसके उत्पादों को अमेरिका में 5.6 बिलियन डॉलर तक के कारोबार पर ड्यूटी फ्री का लाभ मिला. अब अमेरिका ने भारत के इस दर्जे को खत्म करने की घोषणा की है.

News18Hindi
Updated: June 1, 2019, 6:07 PM IST
ये खास दर्जा खत्म कर अमेरिका ने दिया झटका, तो भारत ने कहा निराशाजनक
नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप. फाइल फोटो.
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Updated: June 1, 2019, 6:07 PM IST
भारत के तरजीही व्यावसायिक दर्जे को खत्म करने के अमेरिका के फैसले पर भारत ने निराशा व्यक्त की है. भारत को झटका देने वाली खबर आई कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जीएसपी व्यापार कार्यक्रम के तहत भारत को प्राप्त लाभार्थी विकासशील देश का दर्जा खत्म कर दिया. ट्रंप ने अपने कई सांसदों के अनुरोध को नज़रअंदाज़ करते हुए साफ कहा कि भारत ने अमेरिका को अपने बाजार तक समान और तर्कपूर्ण पहुंच देने का आश्वासन नहीं दिया इसलिए ये कदम उठाया गया.

वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान जारी करते हुए कहा है कि 'किसी भी द्विपक्षीय संबंध में, खासकर आर्थिक संबंधों में, कुछ ऐसे मुद्दे होते हैं, जिन पर समय समय पर संवाद कर हल निकाला जाता है. हम इस मुद्दे पर नियमित प्रक्रिया के रूप में कदम उठाएंगे और यूएस के साथ अपने आर्थिक एवं नागरिक संबंधों को मज़बूत रखने पर ज़ोर देंगे'.



भारत ने ये बयान जारी करते हुए आगे कहा है कि 'हमें विश्वास है कि आपसी लाभ को मद्देनज़र रखते हुए दोनों देश और भी मज़बूती से साथ मिलकर काम करने की राह बनाएंगे'. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि व्यापार में वरीयता की सामान्य व्यवस्था (जीएसपी) के तहत भारत को तरजीह देने वाला दर्जा 5 जून को समाप्त कर दिया जाएगा. इससे पहले ट्रंप ने इस साल चार मार्च को घोषणा की थी कि अमेरिका जीएसपी के तहत भारत का ये खास दर्जा समाप्त करना चाहता था.

ट्रंप ने शुक्रवार को कहा था कि 'भारत ने अमेरिका को अपने बाजार तक समान और उचित पहुंच देने का कोई आश्वासन नहीं दिया इसलिए पांच जून, 2019 से भारत का लाभार्थी विकासशील देश का दर्जा खत्म कर दिया जाना एकदम ठीक कदम होगा'. ट्रंप ने ये फैसला कई अमेरिकी सांसदों के अनुरोध को खारिज करते हुए किया. ट्रंप ने ये भी कहा था कि 4 मार्च को जारी किया गया 60 दिनों का नोटिस पीरियड 3 मई को खत्म हो चुका.

गौरतलब है कि गुरुवार को नरेंद्र मोदी और उनकी कैबिनेट के शपथ ग्रहण समारोह के कुछ ही घंटों बाद अमेरिका के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था कि ट्रंप प्रशासन ने भारत सरकार के साथ काम करने के लिए अपनी प्राथमिकताएं तय कर ली हैं, ताकि ये भी सुनिश्चित हो सके कि अमेरिका की कंपनियों को बेहतर बाज़ार मिल सके.

जीएसपी का लाभ लेने वाला सबसे बड़ा देश रहा भारत
जीएसपी कार्यक्रम के अंतर्गत, कांग्रेस के तय मानकों पर खरे उतरने वाले टेक्सटाइल और आटो उद्योग संबंधी करीब 2 हज़ार ऐसे उत्पादों को अमेरिका में ड्यूटी फ्री किया जाता है, जो वरीयता आधारित विकासशील देश के उत्पाद होते हैं. साल 2017 में भारत इस छूट का लाभ लेने वाला सबसे बड़ा देश था. जनवरी में जारी कांग्रेशनल रिसर्च रिपोर्ट के मुताबिक भारत से अमेरिका में करीब 5.7 बिलियन डॉलर तक का आयात ड्यूटी फ्री था, जबकि तुर्की इस कैटेगरी में पांचवा सबसे बड़ा देश था जिसे 1.7 बिलियन डॉलर के आयात पर छूट मिली थी.
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क्या होगा अमेरिका के फैसले का असर?
अमेरिका के इस फैसले के बाद भारत के कुछ उत्पाद अमेरिका में प्रशुल्क लगने के कारण महंगे हो जाएंगे. ऐसे में, भारत के उत्पादों की प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ना स्वाभाविक है. सामान्य तरजीही व्यवस्था (जीएसपी) अमेरिका के सबसे बड़े और पुराने व्यापार कार्यक्रमों में शुमार रही है. यह कार्यक्रम चुनिंदा देशों के हजारों उत्पादों को शुल्क से छूट देकर विकासशील देशों की आर्थिक क्षमता को बढ़ावा देने के लिए शुरू किया गया था.

खबरों के मुताबिक, इस फैसले के बाद भारत ने कहा है कि अमेरिका द्वारा जीएसपी के तहत दी जाने वाली छूट को समाप्त किये जाने के अमेरिका के फैसले से भारत द्वारा किए जा रहे निर्यात पर बहुत असर नहीं पड़ेगा. भारत के वाणिज्य सचिव अनूप वाधवन ने कहा कि भारत जीएसपी के तहत अमेरिका को 5.6 अरब डॉलर के सामानों का निर्यात करता है, लेकिन इनमें से सिर्फ 1.90 करोड़ डॉलर मूल्य की वस्तुएं ही शुल्क छूट वाली श्रेणी में शामिल हैं.

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